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World Saree Day : शबाना आजमी बोलीं- मां ने कराई साड़ी से पहली मुलाकात, आज भी संजोकर रखा है उनका कलेक्शन

Thu, 21 Dec 2023 05:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंबुज राय, आजमगढ़
अंबुज राय, आजमगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 21 Dec 2023 05:32 AM IST
सार

इस खास दिन पर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने खास राज खोला है। आजमगढ़ आईं शबाना ने कहा कि साड़ी से पहली मुलाकात मां शौकत कैफी ने कराई थी।

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World Saree Day: Shabana Azmi said- Mother made me meet her for the first time with saree
शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज विश्व साड़ी दिवस है। इस खास दिन पर फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने खास राज खोला है। आजमगढ़ आईं शबाना ने कहा कि साड़ी से पहली मुलाकात मां शौकत कैफी ने कराई थी। उन्होंने अतीत के आईने में झांकते हुए कहा कि मेरा साड़ी से परिचय अपनी मां के जरिये हुआ था। मां शौकत कैफी साड़ियों की शौकीन थीं। मां के पास भारत के अलग-अलग शहरों की साड़ियों का अच्छा कलेक्शन था, जिसे आज भी संजोकर रखा है। उस जमाने में जिस तरह का सिल्क बनता था, अब वैसा नहीं मिलता है।
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शबाना ने अमर उजाला से विशेष बात की और अपने साड़ी प्रेम की जानकारी दी। वह कहती हैं कि हर भारतीय महिला की पहचान साड़ी है। हमारे पास बंगाली, गुजराती, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय साड़ियों का विशाल कलेक्शन है। किसी भी खास मौके पर साड़ी पहनना पसंद करती हूं। साड़ियों के कारण अलग पर्सनालिटी डेवलप होती है। मनीष मल्होत्रा ने साड़ियों को डिजाइन किया है। खास स्टाइल की साड़ियां हैं। आलिया भट्ट पर शिफॉन साड़ी का लुक इतना पॉपुलर हो गया कि नई पीढ़ी भी दीवानी हो गई। साड़ी के प्रति महिला व युवतियों का क्रेज बढ़ा है। संवाद
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साड़ी बाजार पर चीन के थ्रेड का असर
शबाना कहती हैं कि अफसोस की बात यह कि साड़ी का बाजार चीन के थ्रेड से प्रभावित हुआ है। सस्ती साड़ी के चक्कर में चायना निर्मित कुछ सामग्री का इस्तेमाल किया जाना लगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान होता है। साड़ी की खूबसूरती कम हो जाती है।
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खूबसूरती बढ़ाती है साड़ी
फिल्म अभिनेत्री कहती हैं कि साड़ी ऐसा परिधान है, जिसे आप कहीं भी पहनकर जा सकती हैं। त्योहार, शादी, घर, पार्टी। यहां तक कि ऑफिस में भी पहन करती हैं। साड़ी में महिलाएं बेहद खूबसूरत दिखती हैं। अब तो बालीवुड की दुनिया में भी अभिनेत्रियां साड़ी ही पहन रही हैं। इसकी बानगी रॉकी और रानी की प्रेम कहानी फिल्म में देखने को मिल रही है।

साड़ी एक, पहनने के तरीके अलग-अलग
शबाना ने कहा कि साड़ी तो हर प्रांत की एक ही होती है। लेकिन, इसे पहनने का तरीका अलग-अलग होता है। इसे देख ऐसा लगता है, जैसे एक गुलदस्ते में इन्हें सजाया गया हो। धीरे-धीरे लोगों का रुझान फिर से इसकी ओर हो रहा है।


पावरलूम की जगह हैंडलूम को दिया जाए बढ़ावा
फिल्म अभिनेत्री ने कहा कि मुबारकपुर के कलाकार काफी मेहनती हैं। उनके हाथों में हुनर है। उनकी बुनी हुईं साड़ियां बनारस जाती हैं। वहां से उसे वाराणसी साड़ी के नाम से जाना जाता है। पावरलूम की जगह हैंडलूम को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कारण कि जो डिजाइन हैंडलूम से साड़ी पर उकेरी जा सकती है, वह पावरलूम से नहीं हो सकती। हैंडलूम को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि गांव-गांव में मुबारकपुर की साड़ी और निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी के प्रचार के लिए कैंप लगाने चाहिए।
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