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प्रकृति के दोहन से बढ़ रही हैं समस्याएं

Fri, 22 Apr 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Fri, 22 Apr 2016 11:58 PM IST
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पृथ्वी िदवस - फोटो : महीपाल ‌सिंह
जल, जंगल और जमीन कभी धरती की शोभा हुआ करते थे लेकिन जनसंख्या वृद्धि के साथ ही इसका दोहन पृथ्वी पर वास करने वाले मानव सहित सभी जीव जंतुओं के लिए बडा खतरा है। दिन प्रतिदिन धरती पर जंगल और कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम होता जा रहा है। शहरीकरण की दौड़ में कल कारखाने, बिल्डिंग के साथ ही सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। विकास की अंधी दौड़ से पृथ्वी का जिस प्रकार दोहन हो रहा है उससे पर्यावरण का संकट पैदा हो गया है। बदलते दौर में लोग पशु पालन से परहेज कर रहे। इसका परिणाम है कि दूध, दही, मक्खन आदि के लाले पड़े हैं।
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जिले में धरती का क्षेत्रफल चार लाख हेक्टेयर है। जिसमें लगभग तीन लाख हेक्टेयर में खेती होती है। जबकि दस साल पहले यह आंकड़ा लगभग तीन लाख दस हजार हेक्टेयर था। वैसे जिला कृषि विभाग की तरफ से प्रतिवर्ष किसानों के खेतों में मृदा परीक्षण का कार्य कराया जाता है। लेकिन भूमि के अंदर कितनी दूरी तक धरती प्रदूषित हो चुकी है, यह बताने वाला कोई नहीं है। उपेक्षा से धरती बंजर होती जा रही है।
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इसी तरह से धड़ल्ले से पेड़-पौधों की अंधाधुध कटौती का परिणाम है कि बीते कुछ वर्ष से बारिश समय से नहीं हो पा रही है। जबकि पेड़-पौधे हमारे लिए न केवल शुद्ध हवा देने का काम करते हैं, बल्कि मानसून का संतुलन बनाए रखने में भी इनका खास महत्व है। बड़े वृक्षों के भारी मात्रा में काटे जाने की वजह से बीते कई वर्ष से ठीक तरह से वर्षा नहीं हो पा रही। बारिश न होने से जहां जल संकट की समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसे में जब जिले की छोटी-बड़ी दस नदियां लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही हैं।
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प्रकृति के धरोहर के रुप में मिले पशुओं के पालन से भी लोगों का मोह भंग हो गया है। पौधों के साथ-साथ पशु भी काटे जा रहे हैं। जिल में बेरोकटोक स्लाटर हाउस संचालित हो रहे हैं। पशुओं के काटे जाने पर रोक लगाने की कई बार मांग उठी। लेकिन कोई ठोस पहल अब तक नहीं हो सकी। दुधारू पशुओं की संख्या कम होने की वजह से लोगों को दूध, दही, घी आदि की परेशानी हो रही है।

जिला कृषि अधिकारी बंसत कुमार दुबे ने बताया कि प्रकृति ने धरोहर के रुप में मनुष्य को कई अमूल्य चीजें प्रदान की हैं। उन सभी का जरूरत से ज्यादा दोहन हो रहा है। यदि इस पर समय रहते नहीं चेता गया तो आने वाले दिनों में इसके भयंकर परिणाम देखने के मिलेंगे। 
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