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आजमगढ़ में दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक संवाद शुरू, किसानों को दी महत्वपूर्ण जानकारियां
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आजमगढ़। सिधारी स्थित कृषि भवन में बुधवार को दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक संवाद की शुरूआत हुई। संवाद कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ब्लाकों के किसानों को योजनाओं के साथ अन्य जानकारियां दी गई। अध्यक्षता उप कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी डा. उमेश कुमार गुप्ता ने किया।
संवाद कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के कार्यालय अध्यक्ष डा. केएम सिंह ने किसानों को आगामी रबी की बुवाई की जानकारी दी। बताया कि मसूर की बुवाई नवंबर के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में, मटर की बुवाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के प्रथम सप्ताह में, चने की बुवाई नवंबर के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में तथा सब्जी मटर की बुवाई अक्टूबर के मध्य में करना लाभदायक होता है। बीज जनित बिमारियों से बचाव के लिए बीज उपचारित करके ही बुवाई करें। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि गेहूं की फसलों में खर-पतवार नियंत्रण के लिए 160 ग्राम क्लोडीनोकस (टापिक) का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना लाभदायक होता है। आलू में अगेती झुलसा रोग नियंत्रण के लिए 2.50 ग्राम कार्बेंडाजीम प्रति लीटर पानी की घोल में डुबोकर बुवाई करना लाभदायक है। पिछेती झूलसा रोग नियंत्रण के लिए दो एमएल रिडोमिल गोल्ड एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव लाभकारी है। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के वैज्ञानिक डा. अखिलेश ने किसानों को कृषि से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उप कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी डा. उमेश कुमार गुप्ता द्वारा कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के सलाहकार डा. रामकेवल यादव, विषय वस्तु विशेषज्ञ, सदर डा. हरिनाथ यादव, प्रभारी उप परियोजना निदेशक आत्मा डा. सीएल शर्मा, किसान हरिकृष्ण दूबे, महेंद्र सिंह चौहान, चंद्रभान यादव, श्रीमती मुंद्रिका एवं सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के कार्यालय अध्यक्ष डा. केएम सिंह ने किसानों को आगामी रबी की बुवाई की जानकारी दी। बताया कि मसूर की बुवाई नवंबर के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में, मटर की बुवाई अक्तूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के प्रथम सप्ताह में, चने की बुवाई नवंबर के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में तथा सब्जी मटर की बुवाई अक्टूबर के मध्य में करना लाभदायक होता है। बीज जनित बिमारियों से बचाव के लिए बीज उपचारित करके ही बुवाई करें। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आरके सिंह ने बताया कि गेहूं की फसलों में खर-पतवार नियंत्रण के लिए 160 ग्राम क्लोडीनोकस (टापिक) का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना लाभदायक होता है। आलू में अगेती झुलसा रोग नियंत्रण के लिए 2.50 ग्राम कार्बेंडाजीम प्रति लीटर पानी की घोल में डुबोकर बुवाई करना लाभदायक है। पिछेती झूलसा रोग नियंत्रण के लिए दो एमएल रिडोमिल गोल्ड एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव लाभकारी है। कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के वैज्ञानिक डा. अखिलेश ने किसानों को कृषि से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उप कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी डा. उमेश कुमार गुप्ता द्वारा कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के सलाहकार डा. रामकेवल यादव, विषय वस्तु विशेषज्ञ, सदर डा. हरिनाथ यादव, प्रभारी उप परियोजना निदेशक आत्मा डा. सीएल शर्मा, किसान हरिकृष्ण दूबे, महेंद्र सिंह चौहान, चंद्रभान यादव, श्रीमती मुंद्रिका एवं सौरभ सिंह आदि मौजूद रहे।
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