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नई आरक्षण नीति से जनपद की 25 से 30 प्रतिशत सीटों का बन गया समीकरण

Sat, 20 Mar 2021 11:37 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 11:37 PM IST
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With the new reservation policy, the equation of 25 to 30 percent seats in the district became
आजमगढ़। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा नई आरक्षण नीति के अनुसार प्रस्तावित आरक्षण की सूची तैयार कर शनिवार की देर शाम प्रकाशन कर दिया गया। इस आरक्षण सूची में लगभग 25 से 30 प्रतिशत सीटों का आरक्षण परिवर्तित हो गया है। आरक्षण में परिवर्तन होने से अब इन सीटों पर चुनावी वैतरणी पार करने के लिए धुरंधरों को अब नए सिरे से समीकरण तैयार करना होगा।
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जिला प्रशासन द्वारा शनिवार की देर शाम प्रस्तावित आरक्षण सूची का प्रकाशन कर दिया गया। आरक्षण सूची के प्रकाशन को लेकर सुबह से ही विकास भवन पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। पूर्व में प्रकाशित सूची को ही लोग देख रहे थे। लेकिन जिला प्रशासन देर शाम सूची का प्रकाशन किया गया। इस प्रस्तावित आरक्षण सूची पर गौर करें तो प्रधानी और बीडीसी के आरक्षण में जनपद की लगभग 25 से 30 प्रतिशत सीटों पर परिवर्तित हो गया है। चाहे वह ग्राम प्रधान पद की सीट हो या क्षेत्र पंचायत की या जिला पंचायत सदस्य पद की सीट हो। पूर्व में हुए आरक्षण के आधार पर बहुत से लोगों ने महिला सीट होने पर अपनी पत्नियों को मैदान में उतार दिया था। लेकिन नए आरक्षण में वह सीट पुरुषों के चुनाव लड़ने के लिए भी खुल गई। ऐसे में अब वह सोच में पड़ गए हैं कि वह अपनी पत्नी को ही मैदान में रहने दें या फिर अपने ताल ठोंकें। क्योंकि बहुत से लोगों ने पत्नी को मैदान में उतारकर उसके नाम से पोस्टर बैनर भी बनवा लिए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों के सामने है जिन लोगों ने पूर्व में पिछड़ी जाति या अनुसूचित जाति की सीट होने पर अपने स्थान पर दूसरे को मैदान में उतारा था। अब सीट सामान्य होने पर उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। क्योंकि जिसे वह मैदान में उतार चुके हैं वह मानेगा या नहीं इस बात की चिंता भी उन्हें सताने लगी है। ऐसे में नई आरक्षण नीति के तहत जारी प्रस्तावित आरक्षण सूची ने कई धुरंधरों को नया समीकरण बनाने के लिए विवश कर दिया है।
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मीरा यादव का फैसला करना हुआ कठिन
आजमगढ़। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव ने पिछला चुनाव ऊसुरकुढ़वा से जीता था। इस बार पूर्व के आरक्षण में इस सीट को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया था। जिसके कारण निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ने परशुरामपुर सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। लेकिन नए आरक्षण में इस सीट को अनारक्षित कर दिया गया है। वहीं, उसुर कुढ़वा पिछड़ी महिला के लिए आरक्षित हो गया है।अब देखना यह है कि निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अपनी पुरानी सीट पर वापस लौटती हैं या फिर परशुरामपुर सीट से ही चुनाव मैदान में उतरती है।
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हाफिजपुर जिला पंचायत सीट हुई अनारक्षित
आजमगढ़। जनपद में हाफिजपुर जिला पंचायत सीट काफी सुर्खियों में रहती है। पूर्व में हुए आरक्षण में यह सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो गई थी। शिब्ली छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष पप्पू कुमार यादव इस सीट से अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतार कर प्रचार प्रसार में जुटे थे, लेकिन अब इस सीट पर वह खुद भी चुनाव लड़ सकते हैं। देखना यह है कि उनकी पत्नी चुनाव लड़ती हैं या फिर वह खुद मैदान में उतरकर ताल ठोंकते हैं।

शासन द्वारा जारी नई आरक्षण नीति के तहत प्रस्तावित आरक्षण सूची जारी कर दी गई है। इस आरक्षण सूची के जारी होने के बाद जिले में लगभग 25 से 30 प्रतिशत सीटों का आरक्षण बदल गया है। अब इस पर 23 मार्च तक दावे और आपत्तियां ली जाएगी। फिर उनका निस्तारण कर 26 मार्च को अंतिम आरक्षण सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
लालजी दुबे, डीपीआरओ।
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