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निरस्त होंगे बाद के बैनामे
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:39 PM IST
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फोरलेन
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जिले में फोरलेन निर्माण में प्रभावित होने वाले उन किसानों की जमीनों का बैनामा निरस्त किया जाएगा, जो तीसरे और अंतिम प्रकाशन के बाद खरीदी गई हैं। जिलाधिकारी ने इस प्रकार के आदेश दिए हैं। एडीएम वित्त/राजस्व ने चार्ज संभालने के साथ ही रिकार्ड तलब किया है। भूमाफियाओं में इससे बौखलाहट है। आमजन में चर्चा है कि निष्पक्ष जांच हुई तो कई चौकाने वाले राज भी खुलेंगे।
नेशनल हाइवे 233 वाराणसी से लुंबनी तक बनाया जा रहा है। इसमें जिले के बूढ़नपुर, निजामाबाद, सदर, मेंहनगर और लालगंज तहसील क्षेत्र के 422 गांवों के किसानों की जमीनें जा रही हैं। जिन कास्तकारों की जमीन अधिगृहीत की गई है। उनके नाम का तीसरा और अंतिम प्रकाशन राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद 17 दिसंबर 2013 को किया गया। यह पूरी तरह से तय हो गया कि फोरलेन अब इसी मार्ग से गुजरेगा।
जमीन के एवज में छह गुना अधिक मुआवजा किसानों को मिल रहा है। इसके बाद भूमाफिया सक्रिय हुए और किसानों बरगलाकर विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन की रजिस्ट्री करा ली। माना जा रहा है कि इसमें कई ऊंची पहुंच वाले शामिल हैं। इनके रुतबे और भय के चलते किसानों ने औने-पौने दामों में अपनी जमीनें दे दी। शिकायत पर डीएम ने तत्कालीन एडीएम वित्त/राजस्व से जांच कराई।
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पता चला कि विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के एक कर्मचारी की मिलीभगत है। 15 जून को डीएम के आदेश पर इस मामले में सिधारी थाने में 14 लोगों पर केस दर्ज कराया गया। पूरे मामले की जांच के लिए सीडीओ के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इसी बीच एडीएम वित्त/राजस्व का स्थानांतरण होने से मामला रुक गया था लेकिन नवागत एडीएम वित्त/राजस्व ने पदभार संभालने के साथ ही पूरा रिकार्ड तलब किया है।
कमीशन न देने वाले की लटका देते थे फाइल : फोरलेन निर्माण में जिन 422 गांवों के किसानों की जमीनें जा रही हैं, उन्हें मुआवजा देने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये की धनउगाही किए जाने का मामला उजागर हुआ है। किसानों की मानें तो एजेंट क्षेत्र में घूमकर फाइलें इकट्ठा करते थे। किसान को अधिक मुआवजा दिलाने का लालच देकर उनसे कमीशन की बात पहले तय कर लेते थे। जो किसान कमीशन की धनराशि देता उसकी रकम खाते में आ जाती, अन्यथा फाइल में अड़चन दिखाकर मामला लटका देते।
सख्ती पर भूमिगत हो गए एजेंट : फोरलेन में अधिगृहीत किसानों की जमीन का मुआवजा देने के मामले में धांधली का मामला प्रकाश में आया और 15 जून को इस मामले की सिधारी थाने में केस दर्ज कराया गया। जिस दिन से मामला सुर्खियों में आया। तभी से विशेष ंभूमि अध्याप्ति कार्यालय के लोगों की मिलीभगत से गड़बड़ी करने वाले एजेंटों का पता नहीं चल रहा है। जगह-जगह कार्यालय खोलकर बैठे ऐसे लोगों के दफ्तर में जहां ताला बंद है। इनके घर किसान सुबह-शाम चक्कर लगा रहे हैं। किसानों से पूछताछ के बाद उन्हें मिलने दिया जा रहा। एजेंटों के दफ्तर, लालगंज में तीन, देवगांव में दो, बिंद्राबाजार में एक, कप्तानगंज में तीन, सदर में पांच आदि स्थानों पर थे।
फोरलेन निर्माण में अधिगृहीत जिन किसानों की जमीन की रजिस्ट्री तीसरे प्रकाशन के बाद कराई गई हैं, उन्हें निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी ने एडीएम को आदेश दिया है। भूखंडों का रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। सूची तैयार होने पर कार्रवाई की जाएगी। - महेंद्र वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी
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नेशनल हाइवे 233 वाराणसी से लुंबनी तक बनाया जा रहा है। इसमें जिले के बूढ़नपुर, निजामाबाद, सदर, मेंहनगर और लालगंज तहसील क्षेत्र के 422 गांवों के किसानों की जमीनें जा रही हैं। जिन कास्तकारों की जमीन अधिगृहीत की गई है। उनके नाम का तीसरा और अंतिम प्रकाशन राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद 17 दिसंबर 2013 को किया गया। यह पूरी तरह से तय हो गया कि फोरलेन अब इसी मार्ग से गुजरेगा।
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जमीन के एवज में छह गुना अधिक मुआवजा किसानों को मिल रहा है। इसके बाद भूमाफिया सक्रिय हुए और किसानों बरगलाकर विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी जमीन की रजिस्ट्री करा ली। माना जा रहा है कि इसमें कई ऊंची पहुंच वाले शामिल हैं। इनके रुतबे और भय के चलते किसानों ने औने-पौने दामों में अपनी जमीनें दे दी। शिकायत पर डीएम ने तत्कालीन एडीएम वित्त/राजस्व से जांच कराई।
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पता चला कि विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के एक कर्मचारी की मिलीभगत है। 15 जून को डीएम के आदेश पर इस मामले में सिधारी थाने में 14 लोगों पर केस दर्ज कराया गया। पूरे मामले की जांच के लिए सीडीओ के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इसी बीच एडीएम वित्त/राजस्व का स्थानांतरण होने से मामला रुक गया था लेकिन नवागत एडीएम वित्त/राजस्व ने पदभार संभालने के साथ ही पूरा रिकार्ड तलब किया है।
कमीशन न देने वाले की लटका देते थे फाइल : फोरलेन निर्माण में जिन 422 गांवों के किसानों की जमीनें जा रही हैं, उन्हें मुआवजा देने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये की धनउगाही किए जाने का मामला उजागर हुआ है। किसानों की मानें तो एजेंट क्षेत्र में घूमकर फाइलें इकट्ठा करते थे। किसान को अधिक मुआवजा दिलाने का लालच देकर उनसे कमीशन की बात पहले तय कर लेते थे। जो किसान कमीशन की धनराशि देता उसकी रकम खाते में आ जाती, अन्यथा फाइल में अड़चन दिखाकर मामला लटका देते।
सख्ती पर भूमिगत हो गए एजेंट : फोरलेन में अधिगृहीत किसानों की जमीन का मुआवजा देने के मामले में धांधली का मामला प्रकाश में आया और 15 जून को इस मामले की सिधारी थाने में केस दर्ज कराया गया। जिस दिन से मामला सुर्खियों में आया। तभी से विशेष ंभूमि अध्याप्ति कार्यालय के लोगों की मिलीभगत से गड़बड़ी करने वाले एजेंटों का पता नहीं चल रहा है। जगह-जगह कार्यालय खोलकर बैठे ऐसे लोगों के दफ्तर में जहां ताला बंद है। इनके घर किसान सुबह-शाम चक्कर लगा रहे हैं। किसानों से पूछताछ के बाद उन्हें मिलने दिया जा रहा। एजेंटों के दफ्तर, लालगंज में तीन, देवगांव में दो, बिंद्राबाजार में एक, कप्तानगंज में तीन, सदर में पांच आदि स्थानों पर थे।
फोरलेन निर्माण में अधिगृहीत जिन किसानों की जमीन की रजिस्ट्री तीसरे प्रकाशन के बाद कराई गई हैं, उन्हें निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी ने एडीएम को आदेश दिया है। भूखंडों का रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। सूची तैयार होने पर कार्रवाई की जाएगी। - महेंद्र वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी