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Azamgarh News: आंख नहीं तो क्या, अंगुलियों के स्पर्श से करती हैं खूबसूरत कढ़ाई

Fri, 13 Oct 2023 12:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Oct 2023 12:22 AM IST
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What if she doesn't have eyes? She does beautiful embroidery with the touch of fingers.
आजमगढ़। आजमगढ़। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, इस कहावत पूरी तरह से विभा गोयल के ऊपर फिट बैठती है। जब पढ़ाई के दौरान आंखों ने उनका साथ छोड़ दिया, फिर भी उन्होंने निराशा को अपने पास फटकने नहीं दिया। जिसका परिणाम है कि आज वह दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
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नगर के सब्जी मंडी मुहल्ला निवासिनी विभा गोयल शुरू से ऐसी नहीं थी। वह भी आम बच्चों तरह ही सबकुछ देख सकती थी। जिसके जरिए उन्होंने बीए तक की शिक्षा भी ग्रहण की। जब उन्होंने एमए में प्रवेश लिया तो उनके आंखों की रोशनी कम होने लगी। जब उन्होंने चिकित्सकों को इसे दिखाया तो उन्होंने बताया कि उन्हें रेटिनाइटिक्स सिग्मेंटोसा नामक बीमारी हो गई है। जिसका इलाज नहीं हो सकता। कुछ दिनों बाद धीरे-धीरे कर उनके आंखों की रोशनी चली गई। जिससे उनकी दुनिया में अंधेरा छा गया। ऐसे हालात में लोग निराश हो जाते हैं। लेकिन विभा ने हिम्मत नहीं हारी। अपने दम पर कुछ अलग करने की ठानी। कढ़ाई और पेंटिंग में शुरू से उनकी काफी थी। उन्हें कढ़ाई के काम को आगे बढ़ाने की ठानी। धीरे-धीरे वह आंख न होने के बाद भी मात्र ऊंगलियों से छूकर आकर्षक कढ़ाई करने में माहिर हो गई। उन्होंने घर के सामने ही अपने मकान में एक दुकान डाली और महिलाओं को सिलाई-बुनाई कढ़ाई का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज वह अपने दम पर अपना पूरा खर्च वहन करती है। इसके साथ ही वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। विभा गोयल का कहना है कि आदमी अगर ठान ले तो क्या नहीं कर सकता। कोई भी हुनर कभी बेकार नहीं जाता। आंख रहते हुए मैंने जो हुनर सीखा। वहीं आंख की रोशनी जाने के बाद मेरे काम आया।
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न्यू कला केंद्र समिति के नाम से संचालित सेंटर से वर्तमान में वह प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आमदनी कर लेती हैं। इसके साथ ही सेंटर पर स्थापित आर्ट कलेक्शन की दुकान चल निकली, जिससे होने वाली आमदनी उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है। इस दुकान को उनके भांजे आकाश देखते हैं। उनके दोनों भाई विशाल और विकास भी बिजनेस कर परिवार को एक सूत्र में पिरोए हुए हैं।
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विभा की बड़ी बहन भी इसी बीमारी से खो चुकी हैं आंखों की रोशनी
आजमगढ़। विभा गोयल ने बताया कि जिस बीमारी ने उनके आंखों की रोशनी छीनी, उसी बीमारी के कारण उनकी बड़ी बहन की दुनिया में भी अंधेरा छा गया। जिस समय उनकी बहन के आंखों की रोशनी गई, उस समय उनकी शादी हो चुकी थी। शादी के लगभग दो साल बाद वह बीमारी से ग्रसित हुईं। इसके बाद से वह भी अपने पुत्र आकाश के साथ यहीं रहती हैं।

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राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजी जा चुकी है विभा
आजमगढ़। दिव्यांग विभा के हौसले और उनके हुनर को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें 2020 में राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा था। इसके पहले वह निर्वाचन आयोग की ओर से लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए ब्रांड एंबेस्डर भी बनाया था।
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