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मेंहनगर और अतरौलिया में बनेंगे दो और बृहद हो संरक्षण केंद्र
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मार्टीनगंज के सुरहन में गोवंश संरक्षण केंद्र।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाने की चिंता में किसान परेशान हैं। इसके लिए कहीं खेतों की निगरानी के लिए मजदूरों को रखा जा रहा है तो कहीं बैरिकेडिंग की जा रही है। इस समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस वित्तीय वर्ष में तीन-चार वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाने की योजना बनाई है। फिलहाल मेंहनगर के भरथीपुर और अतरौलिया के मकरहां में दो केंद्रों के लिए जमीन तलाश ली गई है। इसे गो संरक्षण केंद्र के नाम करने के लिए कमिश्नर और डीएम के पास फाइल भेज दी गई है।
शासन के निर्देश पर जिले में छुट्टा मवेशियों को पकड़ कर स्थायी और अस्थायी गोशालाओं में रखा जा रहा है, लेकिन यह प्रबंध पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। जिससे अक्सर किसान छुट्टा मवेशियों को लेकर प्रदर्शन और हंगामा करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने जनपद में वृहद गो संरक्षण केंद्रों के अलावा नगर निकायों में कान्हा गोशाला का निर्माण शुरू कराया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में तीन से चार वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए भूमि की तलाश शुरू है। मानक के अनुसार केंद्र के निर्माण के लिए लगभग एक हेक्टेयर बंजर या परती भूमि की आवश्यकता होती है। इसके पास चारागाह की भूमि भी होनी चाहिए। फिलहाल मेंहनगर तहसील के भरथीपुर में बंजर खाते की 1.787 हेक्टेयर भूमि और अतरौलिया के मकरहां में 0.405 हेक्टेयर भूमि तलाशी है। मेंहनगर की फाइल मंजूरी के लिए कमिश्नर वीवी पंत और मकरहां की फाइल डीएम के पास भेजी गई है। भूमि केंद्र के नाम पर हो जाने के बाद निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी भूमि की तलाश की जा रही है।
सुरहन में मवेशी पहुंचे, मियांपुर में निर्माण लगभग पूरा
जनपद में 1.20 करोड़ की लागत से मार्टीनंगज के सुरहन में वृहद गो संरक्षण केंद्र बन गया है। यहां 275 गोवंश भी रखे गए हैं। वहीं मेंहनगर के मियांपुर में भी निर्माण लगभग पूरा है। सोलर पावर प्लांट का कार्य होना है। इसके बाद यहां भी मवेशी रखे जाएंगे। इसके साथ ही डीएम के क्रिटिकल गैप से भी ठेकमा के पास हरईरामपुर में 60 मवेशियों की क्षमता की गोशाला बन रही है। यहां सिर्फ बाउंड्री का कार्य बचा है।
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दो कान्हा गोशालाओं का भी हो रहा निर्माण
जिले में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लागत से माहुल नगर पंचायत के खानजहांपुर और आजमगढ़ नगर पालिका के मुजफ्फरपुर में कान्हा गोशाला का भी निर्माण हो रहा है। इनके निर्माण के बाद गोवंश के संरक्षण की क्षमता में भी इजाफा होगा।
लगभग पांच हजार है छुट्टा मवेशियों की संख्या
पशुपालन विभाग के सर्वे के अनुसार जनपद में छुट्टा मवेशियों की संख्या 4924 है। अभी तक 250-250 की क्षमता के दो केंद्र तैयार हैं। दो केंद्र बनने के बाद ये क्षमता एक हजार की हो जाएगी। इसके साथ ही कान्हा गोशाला की क्षमता लगभग 500-500 पशुओं की है। दोनों के तैयार होने के बाद छुट्टा मवेशियों को रखने की क्षमता 2000 के पार हो जाएगी। अभी तक जनपद में 2845 छुट्टा मवेशियों को सुरहन के अलावा अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित किया गया है।
जिलाधिकारी ने इस वर्ष तीन से चार वृहद गो संरक्षण केंद्र निर्माण की योजना बनाई है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। सभी के बनने के बाद जनपद में छुट्टा मवेशियों के रखने की क्षमता पर्याप्त हो जाएगी।
- डॉ. वीके सिंह, सीवीओ
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शासन के निर्देश पर जिले में छुट्टा मवेशियों को पकड़ कर स्थायी और अस्थायी गोशालाओं में रखा जा रहा है, लेकिन यह प्रबंध पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। जिससे अक्सर किसान छुट्टा मवेशियों को लेकर प्रदर्शन और हंगामा करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने जनपद में वृहद गो संरक्षण केंद्रों के अलावा नगर निकायों में कान्हा गोशाला का निर्माण शुरू कराया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में तीन से चार वृहद गो संरक्षण केंद्र बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए भूमि की तलाश शुरू है। मानक के अनुसार केंद्र के निर्माण के लिए लगभग एक हेक्टेयर बंजर या परती भूमि की आवश्यकता होती है। इसके पास चारागाह की भूमि भी होनी चाहिए। फिलहाल मेंहनगर तहसील के भरथीपुर में बंजर खाते की 1.787 हेक्टेयर भूमि और अतरौलिया के मकरहां में 0.405 हेक्टेयर भूमि तलाशी है। मेंहनगर की फाइल मंजूरी के लिए कमिश्नर वीवी पंत और मकरहां की फाइल डीएम के पास भेजी गई है। भूमि केंद्र के नाम पर हो जाने के बाद निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इसके अलावा अन्य स्थानों पर भी भूमि की तलाश की जा रही है।
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सुरहन में मवेशी पहुंचे, मियांपुर में निर्माण लगभग पूरा
जनपद में 1.20 करोड़ की लागत से मार्टीनंगज के सुरहन में वृहद गो संरक्षण केंद्र बन गया है। यहां 275 गोवंश भी रखे गए हैं। वहीं मेंहनगर के मियांपुर में भी निर्माण लगभग पूरा है। सोलर पावर प्लांट का कार्य होना है। इसके बाद यहां भी मवेशी रखे जाएंगे। इसके साथ ही डीएम के क्रिटिकल गैप से भी ठेकमा के पास हरईरामपुर में 60 मवेशियों की क्षमता की गोशाला बन रही है। यहां सिर्फ बाउंड्री का कार्य बचा है।
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दो कान्हा गोशालाओं का भी हो रहा निर्माण
जिले में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लागत से माहुल नगर पंचायत के खानजहांपुर और आजमगढ़ नगर पालिका के मुजफ्फरपुर में कान्हा गोशाला का भी निर्माण हो रहा है। इनके निर्माण के बाद गोवंश के संरक्षण की क्षमता में भी इजाफा होगा।
लगभग पांच हजार है छुट्टा मवेशियों की संख्या
पशुपालन विभाग के सर्वे के अनुसार जनपद में छुट्टा मवेशियों की संख्या 4924 है। अभी तक 250-250 की क्षमता के दो केंद्र तैयार हैं। दो केंद्र बनने के बाद ये क्षमता एक हजार की हो जाएगी। इसके साथ ही कान्हा गोशाला की क्षमता लगभग 500-500 पशुओं की है। दोनों के तैयार होने के बाद छुट्टा मवेशियों को रखने की क्षमता 2000 के पार हो जाएगी। अभी तक जनपद में 2845 छुट्टा मवेशियों को सुरहन के अलावा अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित किया गया है।
जिलाधिकारी ने इस वर्ष तीन से चार वृहद गो संरक्षण केंद्र निर्माण की योजना बनाई है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। सभी के बनने के बाद जनपद में छुट्टा मवेशियों के रखने की क्षमता पर्याप्त हो जाएगी।
- डॉ. वीके सिंह, सीवीओ