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तीन दिनों में 18 घंटे बंद रही मिल
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 28 Mar 2016 11:48 PM IST
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दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव
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सपा मुखिया और सांसद मुलायम सिंह यादव ने दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव को पुन: चालू कर जिले को उद्योग शून्य होने से तो बचा लिया लेकिन तकनीकी खामी के चलते सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट उद्देश्यों पर खरा नहीं उतर रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 72 घंटे के अंदर (तीन दिन) मिल 18 घंटे बंद रही हैं। इसके चलते मिल को लगभग 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुुआ है। ठेके पर मिल चलाने वाले ठेकेदार के पास तकनीकी टीम की कमी का खामियाजा किसान और मिल कर्मचारी दोनों भुगत रहे हैं।
नवनिर्मित दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव का उद्घाटन बीते 22 मार्च को सपा मुखिया और सांसद मुलायम सिंह यादव और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संयुक्त रूप से किया था। 26 मार्च से मिल में पेराई का कार्य शुरू हुआ। 26 से 28 मार्च के बीच 72 घंटे के अंदर मिल 18 घंटे तकनीकी खामी के कारण बंद रही। प्रबंधन तंत्र के आंकड़े पर ध्यान दें तो उनके अनुसार अब तक 16 हजार कुंतल गन्ने की पेराई की जा चुकी है।
बताते चलें कि मिल में क्रस किए गए गन्ने का भुगतान क्वालिटी के अनुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय के रूप में क्रमश: 290, 280 और 275 रुपये के अनुसार करती है। इस लिहाजा सबसे निम्न स्तर के गन्ने का मूल्य करीब 44 लाख रुपये का होगा क्योंकि पेरे गए गन्ने के बाद ब्रेकडाउन होने से उक्त जूस की चीनी नहीं बन सकती। मिल भाषा में कुछ अंतराल के बाद मिल का संचालन शुरू हो गया तो सबसे घटिया चीनी बनेगी। अगर समय ज्यादा हुआ तो उसकी शक्ल चोटे में बदल जाएगी। इसके अलावा बिजली और क्रस आदि में जो खर्च हुआ वह अलग। मिल को चलाने की जिम्मेदारी ठेकेदार के हाथों में है।
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प्रथम दृष्टया कारणों पर ध्यान दें तो नई तकनीकी से बनी मिल के बारे में सामान्य कर्मचारियों को जानकारी नहीं है। नाम न छापने के शर्त पर मिल के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार के पास तकनीकी इंजीनियरों की कमी है। मिल में उनके अलावा कोई नहीं है। जबकि मिल चलाने का करार ठेकेदार के पास है। इस समय मिल संघ से कुछ आधा दर्जन अधिकारी मिल चलाने के लिए डटे हैं। जिसमें मुख्य गन्ना अधिकारी, मुख्य अभियंता के साथ चीफ केमिस्ट आदि शामिल हैं।
मिल आधुनिक मशीनों से तैयार की गई है। थोड़ी बहुत परेशानियां तो आती ही रहेंगी। हालांकि मिल बंद होने से नुकसान तो हो रहा है लेकिन उसका वास्तविक आंकड़ा देना मुश्किल है। ठेकेदार के पास टेक्निकल टीम की कमी है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। यह कंपनी पहले भी कई मिलों को संचालित कर चुकी है। हम आशा करते हैं कि जल्द ही सारी खामियां दूर कर ली जाएंगी। - एएस पोरस, प्रधान प्रबंधक दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव
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नवनिर्मित दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव का उद्घाटन बीते 22 मार्च को सपा मुखिया और सांसद मुलायम सिंह यादव और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संयुक्त रूप से किया था। 26 मार्च से मिल में पेराई का कार्य शुरू हुआ। 26 से 28 मार्च के बीच 72 घंटे के अंदर मिल 18 घंटे तकनीकी खामी के कारण बंद रही। प्रबंधन तंत्र के आंकड़े पर ध्यान दें तो उनके अनुसार अब तक 16 हजार कुंतल गन्ने की पेराई की जा चुकी है।
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बताते चलें कि मिल में क्रस किए गए गन्ने का भुगतान क्वालिटी के अनुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय के रूप में क्रमश: 290, 280 और 275 रुपये के अनुसार करती है। इस लिहाजा सबसे निम्न स्तर के गन्ने का मूल्य करीब 44 लाख रुपये का होगा क्योंकि पेरे गए गन्ने के बाद ब्रेकडाउन होने से उक्त जूस की चीनी नहीं बन सकती। मिल भाषा में कुछ अंतराल के बाद मिल का संचालन शुरू हो गया तो सबसे घटिया चीनी बनेगी। अगर समय ज्यादा हुआ तो उसकी शक्ल चोटे में बदल जाएगी। इसके अलावा बिजली और क्रस आदि में जो खर्च हुआ वह अलग। मिल को चलाने की जिम्मेदारी ठेकेदार के हाथों में है।
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प्रथम दृष्टया कारणों पर ध्यान दें तो नई तकनीकी से बनी मिल के बारे में सामान्य कर्मचारियों को जानकारी नहीं है। नाम न छापने के शर्त पर मिल के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार के पास तकनीकी इंजीनियरों की कमी है। मिल में उनके अलावा कोई नहीं है। जबकि मिल चलाने का करार ठेकेदार के पास है। इस समय मिल संघ से कुछ आधा दर्जन अधिकारी मिल चलाने के लिए डटे हैं। जिसमें मुख्य गन्ना अधिकारी, मुख्य अभियंता के साथ चीफ केमिस्ट आदि शामिल हैं।
मिल आधुनिक मशीनों से तैयार की गई है। थोड़ी बहुत परेशानियां तो आती ही रहेंगी। हालांकि मिल बंद होने से नुकसान तो हो रहा है लेकिन उसका वास्तविक आंकड़ा देना मुश्किल है। ठेकेदार के पास टेक्निकल टीम की कमी है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। यह कंपनी पहले भी कई मिलों को संचालित कर चुकी है। हम आशा करते हैं कि जल्द ही सारी खामियां दूर कर ली जाएंगी। - एएस पोरस, प्रधान प्रबंधक दी किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव