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Azamgarh News: आश्वासनों के पुल बांधकर डलवाए वोट, सड़कें आज तक नहीं बनीं

Wed, 28 Oct 2026 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 12:16 AM IST
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They secured votes by making a barrage of promises, yet the roads have still not been built.
खरैलिया ढाला से सोनौरा अजगरा संपर्क मार्ग। संवाद
लोकसभा चुनाव हुए ढाई साल और विधानसभा चुनाव को पांच साल होने को आए, लेकिन मतदान के दिन जिन गांवों में ग्रामीणों ने सड़क, पुल और अन्य मांगों को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था, वहां समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
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एसडीएम से लेकर नेताओं ने उस वक्त आश्वासन देकर ग्रामीणों से कुछ वोट डलवा लिए थे। इसके बाद किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। चुनावों के दौरान अक्सर कहीं न कहीं से ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ और ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा ग्रामीणों द्वारा बुलंद किया जाता है। ग्रामीणों के बहिष्कार की सूचना मिलते ही नेता और अधिकारी सक्रिय हो जाते हैं।
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वे ग्रामीणों से उनकी मांगों को पूरा करने का वादा करके मतदान तो करा लेते हैं, लेकिन इसके बाद कोई उस समस्या की ओर फिर ध्यान नहीं देता। जिले में सबसे अधिक ‘रोड या पुल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा सगड़ी विधानसभा क्षेत्र के देवारा एरिया में उठा था।
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सगड़ी में पुल और रास्ते की उठी थी मांग
लाटघाट। बांका गांव के ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा देकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। इसी तरह खरैलिया ढाले पर सोनौरा-अजगरा संपर्क मार्ग की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। यहां भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान गांव पहुंचकर समस्या दूर करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में कोई सुध लेने नहीं आता। ग्रामीणों ने यहां भी ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा देकर विरोध जताया था। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। मानिकपुर-अभन पट्टी संपर्क मार्ग की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां के ग्रामीण भी आवागमन की समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
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बोले ग्रामीण
चुनाव आते ही नेता सफेद कुर्ता पहनकर गांव पहुंचते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। इसके बाद ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार करते रह जाते हैं। हर साल उन्हें आश्वासनों के नाम पर ठगी का अहसास होता है। -जयराम, मानिकपुर।
चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव में आकर पुल बनवाने का भरोसा देते हैं। कई बार वादा किया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाढ़ के दिनों में ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। -पतिराज, बांका।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद उन्होंने 15 से 16 स्थान चिह्नित किए हैं, जहां संपर्क मार्गों को ऊंचा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुल-पुलियों का निर्माण बड़े स्तर का कार्य है। इसके लिए उच्चाधिकारियों और शासन का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों से बात की जाएगी। -संजीव कुमार राय, एसडीएम।
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रास्ते को लेकर बुलंद की आवाज, अंजाम तक नहीं पहुंची
बूढ़नपुर। विकासखंड अहरौला की ग्राम पंचायत कोठरा के दाही बढ़यापार गांव के ग्रामीण वर्षों से बेहतर संपर्क मार्ग की सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को पगडंडी जैसे रास्ते का सहारा लेना पड़ता है। बारिश के दिनों में रास्ते पर पानी भर जाने से आवागमन मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसके चलते उन्होंने चुनाव में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा दिया था। इसके बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई। अब वे आगामी विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करेंगे। संवाद
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बोले ग्रामीण
रिश के दिनों में रास्ते पर कमर तक पानी भर जाता है। इससे स्कूली बच्चों का विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो जाता है। अधिक बारिश होने पर बच्चों की पढ़ाई कई महीनों तक प्रभावित होने की आशंका रहती है। गांव में किसी के बीमार पड़ने पर उसे चारपाई पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है। -निन्हकू निषाद, दाही बढ़यापार।
यह रास्ता हमारे आवागमन का प्रमुख साधन है। इसके बावजूद वर्षों से इसकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया गया, लेकिन चुनाव के दौरान सड़क निर्माण का आश्वासन तो मिला, लेकिन चुनाव बीतने के बाद कोई ठोस पहल नहीं हुई। -विनोद निषाद, दाही बढ़यापार।

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मामला पुराना है और दो गांवों के बीच का है। कुछ दूरी तक रास्ते का निर्माण कराया गया है, लेकिन विवाद के कारण आगे का निर्माण कार्य बाधित हो रहा है। चकमार्ग अभिलेखों में किसी दूसरी जगह दर्ज है, जबकि मौके पर रास्ता दूसरी जगह बना हुआ है। राजस्व कर्मियों की गलती के कारण यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। -सागर सिंह, खंड विकास अधिकारी, अहरौला।

खरैलिया ढाला से सोनौरा अजगरा संपर्क मार्ग। संवाद

खरैलिया ढाला से सोनौरा अजगरा संपर्क मार्ग। संवाद

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