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Azamgarh News: सीएचसी और पीएचसी में फायर फाइटिंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
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आजमगढ़। जनपद के अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंंद्रों पर आगलगी की घटना से निपटने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। सिर्फ फायर सिलिंंडर से ही काम चलाया जा रहा है। विभाग इनके पीछे बजट न होने की बात कह रहा है। ऐसे में अगर किसी सीएचसी या पीएचसी में आगलगी की घटना होती है लोगों की सुरक्षा रामभरोसे होगी।
जनपद में 67 सीएचसी और पीएचसी हैं। यहां पर प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में मरीज इलाज और जांच कराने आते हैं। डिलीवरी की सुविधा होने के कारण प्रसूता भी भर्ती होती हैं, लेकिन इन सीएचसी और पीएचसी पर आग से निपटने के पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल उठता है। सीएचसी बरदह, बिलरियांगज, महाराजगंज, जीयनपुर, बूढ़नपुर, बरदह, जहानागंज, सठियांव, मेंहनगर आदि स्थानों पर आगलगी की घटना से निपटने के लिए पर्याप्त फायर फाइटिंग की व्यवस्था नहीं हैं। सीएचसी और पीएचसी में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कहीं- कहीं फायर सिलिंडर लटका दिए गए हैं। यह सिलिंडर क्रियाशील है या नहीं इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं रहती है। पांच या दस हजार लीटर पानी की टंकी भी नहीं लगी हुई हैं। सीएचसी फूलपुर में सिर्फ 12 फायर सिलिंडर लगे हुए हैं।
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टंकी में नहीं भरा जाता पानी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुबारकपुर में प्रतिदिन दर्जनों लोग अपना इलाज कराने आते हैं। बाहर कुछ फायर सिलिंडर लगे हुए हैं लेकिन आग से निपटने के लिए पानी की टंकी में कभी पानी नहीं भरा जाता। इसके कारण यह निक्रिय है। इस संबंध में अधीक्षक डॉ. सीपी गुप्ता ने बताया कि टंकी का निर्माण हुआ है लेकिन छत कमजोर है। इसीलिए टंकी में पानी नहीं भरा गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सब कुछ मौजूद है।
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वर्षों बाद भी चालू नहीं हो सका फायर सिस्टम
अहरौला। सीएचसी अहरौला 30 बेड का अस्पताल है। यहां प्रतिदिन 150 सौ से ज्यादा ओपीडी, पांच से छह प्रसव कराए जाते हैं। आगलगी की घटना से निपटने के लिए वर्षों पूर्व परिसर में फायर सिस्टम लगाने का काम शुरू हुआ जो आज तक पूरा नहीं हुआ। छत पर सप्लाई को टंकी पर लगा मोटर व अन्य सिस्टम निष्क्रिय पड़े हुए हैं। अधीक्षक डॉ. मोहनलाल ने बताया कि फायर सिस्टम चालू नहीं है। इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। कार्यदायी संस्था ने कुछ दिन पहले पुनः सर्वे किया है।
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कुछ जगहों पर फायर सिस्टम लगाने का काम चल रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर बजट न होने के कारण काम रुका हुआ है। शासन से बजट मिलने के बाद सभी जगहों पर फायर सिस्टम लगवा दिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ।
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जनपद में 67 सीएचसी और पीएचसी हैं। यहां पर प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में मरीज इलाज और जांच कराने आते हैं। डिलीवरी की सुविधा होने के कारण प्रसूता भी भर्ती होती हैं, लेकिन इन सीएचसी और पीएचसी पर आग से निपटने के पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल उठता है। सीएचसी बरदह, बिलरियांगज, महाराजगंज, जीयनपुर, बूढ़नपुर, बरदह, जहानागंज, सठियांव, मेंहनगर आदि स्थानों पर आगलगी की घटना से निपटने के लिए पर्याप्त फायर फाइटिंग की व्यवस्था नहीं हैं। सीएचसी और पीएचसी में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कहीं- कहीं फायर सिलिंडर लटका दिए गए हैं। यह सिलिंडर क्रियाशील है या नहीं इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं रहती है। पांच या दस हजार लीटर पानी की टंकी भी नहीं लगी हुई हैं। सीएचसी फूलपुर में सिर्फ 12 फायर सिलिंडर लगे हुए हैं।
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टंकी में नहीं भरा जाता पानी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुबारकपुर में प्रतिदिन दर्जनों लोग अपना इलाज कराने आते हैं। बाहर कुछ फायर सिलिंडर लगे हुए हैं लेकिन आग से निपटने के लिए पानी की टंकी में कभी पानी नहीं भरा जाता। इसके कारण यह निक्रिय है। इस संबंध में अधीक्षक डॉ. सीपी गुप्ता ने बताया कि टंकी का निर्माण हुआ है लेकिन छत कमजोर है। इसीलिए टंकी में पानी नहीं भरा गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए सब कुछ मौजूद है।
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वर्षों बाद भी चालू नहीं हो सका फायर सिस्टम
अहरौला। सीएचसी अहरौला 30 बेड का अस्पताल है। यहां प्रतिदिन 150 सौ से ज्यादा ओपीडी, पांच से छह प्रसव कराए जाते हैं। आगलगी की घटना से निपटने के लिए वर्षों पूर्व परिसर में फायर सिस्टम लगाने का काम शुरू हुआ जो आज तक पूरा नहीं हुआ। छत पर सप्लाई को टंकी पर लगा मोटर व अन्य सिस्टम निष्क्रिय पड़े हुए हैं। अधीक्षक डॉ. मोहनलाल ने बताया कि फायर सिस्टम चालू नहीं है। इसकी रिपोर्ट भेजी गई है। कार्यदायी संस्था ने कुछ दिन पहले पुनः सर्वे किया है।
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कुछ जगहों पर फायर सिस्टम लगाने का काम चल रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर बजट न होने के कारण काम रुका हुआ है। शासन से बजट मिलने के बाद सभी जगहों पर फायर सिस्टम लगवा दिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ।