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पर्यटन की संभावनाएं अपार लेकिन मिले पर्यटन का मिले दर्जा

Mon, 24 Jan 2022 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 11:54 PM IST
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The possibilities of tourism are immense but get the status of tourism
महराजगंज स्थित भैरव धाम मंदिर।-प्लान खबर की फोटो - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। जनपद धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कई स्थान ऐसे हैं जिनका धार्मिक और पौराणिक रूप से काफी महत्व है। जनपद में कई धार्मिक स्थानों का विकास तो किया गया लेकिन अभी इन स्थानों पर और कार्य कराए जाने की जरूरत है। जनपद में पर्यटन की अपार संभावनाए हैं लेकिन इन स्थानों का पर्यटन केंद्र के रूप में विकास कराए जाने की जरूरत है।
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जिला मुख्यालय से 27 किमी दूर महराजगंज कस्बे के समीप स्थित भैरोनाथ मंदिर जनपद ही नहीं अन्य जनपदों के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। हर पूर्णिमा के दिन यहां मेला लगता है। यह मंदिर 16 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। इसका चौथाई भाग अतिक्रमण का शिकार है।
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जनपद मुख्यालय से 15 किमी दूर स्थित निजामाबाद कस्बा कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है।यहां विश्व प्रसिद्ध गुरद्वारा चरण पादुका साहिब है तो पतित पावनी तमसा नदी के तट पर सती अनुसूइया के पुत्र ऋषि दत्तात्रेय धाम भी है। कस्बे से सटे हुसैनाबाद, जहां विश्व प्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी को परंपरागत हस्तशिल्पी तराशते हैं। इस ब्लैक पाटरी को सूबे की सरकार ने भी तरजीह देते हुए ओडीओपी यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल किया है। आरोग्य की देवी कही जाने वाली माता शीतला का मंदिर भी यहीं हैं।
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अवंतिकापुरी धाम अपनी भव्यता को बनाए हुए। यह स्थल राजा जन्मेजय की नाग यज्ञ भूमि के नाम से जानी जाती है। इस धाम की कई दंतकथाएं वर्णिंत हैं। इस स्थली की पुरातत्व विभाग सारनाथ द्वारा खोदाई भी की जा चुकी है जिसमें वर्तमान मंदिर के नीचे दसवीं शताब्दी के अवशेष पाया गया। मुहरें, मनका, तांबे के सिक्के आदि मिले थे। मंदिर के ठीक सामने 84 बीघा का जलसरोवर विद्यमान है। इसी सरोवर में डुबकी लगा कर लोग मंदिर में पूजन-अर्चन करते हैं। दो करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण का कुछ कार्य हुआ लेकिन और कार्य कराए जाने की जरूरत है।

तमसा व मंजूषा नदी के संगम पर स्थित पौराणिक स्थली दुर्वासा धाम है। महर्षि दुर्वासा ने यहां तप किया था। अयोध्या और काशी के समान दूरी पर स्थित तपोस्थली पर दुर्वेस्वर शिवलिंग दो भागों में विभाजित है।
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