फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   The condition of animals imprisoned in cow shelter sites is critical

गो आश्रय स्थलों में कैद पशुओं की हालत नाजुक

Mon, 17 Aug 2020 10:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2020 10:51 PM IST
विज्ञापन
The condition of animals imprisoned in cow shelter sites is critical
आजमगढ़। सरकार की ओर से गोवंश के वध पर प्रतिबंध लगाने के बाद जब इनकी बाढ़ सी आ गई तो इन्हें आश्रय स्थलों का निर्माण कराकर उसमें रखने का निर्देश दिया। निर्देश पर छुट्टा पशुओं को लाकर दड़बे में बंद तो कर दिया गया लेकिन फिर इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। आज बाड़ों में बंद इन पशुओं की हालत दयनीय है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब एसडीएम सदर ने स्वतंत्रता दिवस के दिन जहानागंज विकास खंड की किशनपुर गो आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। आश्रय स्थल में मरे पशुओं के शव एक जगह रखे हुए मिले थे। मरने वाले पशुओं का पोस्टमार्टम हुआ या नहीं, इस संबंध में भी ग्राम विकास अधिकारी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। वहीं जब सोमवार को गो आश्रय स्थलों की पड़ताल की गई तो लगभग हर जगह पर एक ही स्थिति देखने को मिली। किशुनपुर में सोमवार को भी पशुओं के मरने का सिलसिला जारी रहा। अहरौला में कई पशु मरणासन्न अवस्था में पाए गए। वहीं सगड़ी तहसील के चालाकपुर में भी पशुओं के मरने का सिलसिला जारी है।
विज्ञापन

मरणासन्न अवस्था में मिले गोवंश और सांड़
अहरौला। विकासखंड के बस्तीभुजबल ग्राम पंचायत में गौवंश आश्रय स्थल का निर्माण कराया गया है। सोमवार को आश्रय स्थल पर ड्यूटी में लगे तीन सफाईकर्मी राजेंद्र प्रसाद, हरिराम, मंसूर अहमद के साथ दो पीआरडी के जवान हरिशंकर यादव और तीर्थराज मौजूद थे। पूछने पर पता चला कि मौके पर कुल 46 पशु हैं, जिसमें एक गाय व एक सांड़ मरणासन्न अवस्था में हैं। गाय व सांड़ दोनो को कीड़े पड़ गए हैं। कई रोज पहले अहरौला पशु चिकत्सालय के प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र कन्नौजिया आए थे और मरहम देकर चले गए फिर नहीं आए। चारे में भूसा व चोकर दिया जा रहा है चोकर भी खत्म हो गया है। ड्यूटी पर मौजूद लोगों का कहना है कि हमारा जो काम है कर रहे हैं। चोकर आदि के बारे में सेक्रेटरी व प्रधान को अवगत करा देते हैं उसकी व्यवस्था कब करेंगे वही लोग जाने। कुछ गाय का टैग भी नहीं किया गया है। हम लोगों की ड्यूटी छह माह में गोशाले पर आती है दो दिन से हम लोग ड्यूटी पर है तबसे किसी पशु की मौत नहीं हुई है। गोशाले पर गोवंशीयों का हिसाब किताब रखने वाले किसी रजिस्टर की जानकारी से इंकार किया।
विज्ञापन

किशुनपुर में आज भी मरे चार मवेशी
जहानागंज। विकास खंड के किशुनपुर गांव में बने गोशाला में सोमवार को भी चार गायें मरी हुई पाई गई। खंड विकास अधिकारी ऋषिपाल सिंह ने बताया कि हम आज सुबह से यहां गोशाला पर हैं, सभी पशुओं की टैगिंग हो गई। अब आठ पशु की टैगिंग नहीं हो पाई है। मृत पशुओं को गाड़ने के लिए गड्ढा खोदा गया है लेकिन बरसात की वजह से वहां गड्ढे तक ठेला नहीं जा पा रहा है। इसलिए मृत्यु पशुओं को बाहर ही रखना पड़ा। यहां काफी काम अभी बाकी हैं करवाना है, इसमें पानी की व्यवस्था, गार्ड रूम, लाइट की व्यवस्था, भूसा घर सब सही कराना है। इस गांव में जो नए सचिव नियुक्त होंगे उनसे यही काम कराया जाएगा। ब्लाक के भोपतपुर गांव में भी 30 पशु के क्षमता का पशुशाला बन रहा है जो 15 दिन में पूर्ण हो जाएगा। पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रविप्रकाश ने बताया कि आज जो चार गाय मरी हैं, वह कमजोरी के कारण उठ नही पा रहीं थीं। कमजोरी का कारण यह है कि हरा चारा मिलता नहीं है और केवल भूसा खाने से कमजोरी हो जाती है। पशुशाला पर एडीओ पंचायत जनार्दन सिंह भी मौजूद थे। गोशाला पर तीन सिफ्ट में चार चार सफाई कर्मी की ड्यूटी रहती है, साथ में पीआरडी के जवान भी रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

चालाकपुर में 20 दिन में 10 पशुओं की मौत
लाटघाट। अस्थाई निराश्रित गो आश्रय स्थल चालाकपुर में सोमवार को कुल 56 पशु मौजूद रहे । 10 पशुओं की मौत 20 दिन में हो गई है। 15 अगस्त को एक पशु मरा और 10 दिन पूर्व पांच से सात पशु मर गए। ड्यूटी पर तैनात सफाई कर्मी राकेश ,जवाहरलाल ने बताया कि पशु आश्रय गृह के अगल-बगल कोई जमीन खाली नहीं है । जहां पशुओं को दफनाया जा सके। बरसात हो जाने पर चांदपट्टी बिलरियागंज मार्ग पर जो आश्रय स्थल के ठीक सामने सड़क के किनारे अभी जो पशु मरे हैं उनको गाड़ा गया है। 65 पशु रजिस्टर में है, 56 पशु मौके पर हैं । पीआरडी के चंद्रकेश व संत विजय ने बताया कि जब बरसात होती है तो पशुओं की समस्याएं और बढ़ जाती है। मृत पशुओं को गाड़ने के लिए कोई जगह नहीं बची है। ग्राम प्रधान तूफानी पटेल ने बताया कि पहले पशु मरे हैं ।इस समय कोई पशु नहीं मरा है। एक पशु 15 अगस्त को मरा है। पशु डा. बीएल यादव पशुओं की देखरेख के लिए आते हैं।

दाना पानी के अभाव में दम तोड़ रहे बेजुबान
मेंहनगर। कस्बे के वार्ड नं दो में अस्थायी निराश्रित गौसाला बनाई गई हैं। शुरुआती दिनों में यहां निरश्रित पशुओं की संख्या 126 बताई गई। जबकि आज इनकी संख्या 106 ही रह गई हैं। जहां चार पशु विमारी की हालत में जमीन गिरे पड़े हैं। पशुशाला में सोमवार को पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था नहीं थी। हरे चारे के लिए तीन बोझ बाजरा रखा गया था।जबकि उसको काटा नहीं गया था। चार बीमार पशुओं के दवा इलाज के बाबत पूछे जाने पर मजदूर संजय राम ने बताया कि डाक्टर साहब आते है और इंजेक्शन लग रहा है। चारा के बाबत संजय ने बताया कि भूसा ब्लाक मुख्यालय पर रखा जाता हैं और प्रतिदिन लाया जाता हैं। आज अभी नहीं आया है। जबकि तैनात पांच कर्मचारियों में केवल संजय ही मौके पर था। पशुओं की व्यवस्था के बाबत खाना पूर्ति ही नजर आ रही थी। वार्ड के ही एक नागरिक नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अभी परसों चार पशु जो बीमार थे मर गए। प्न्हें पशुशाला मे दफनाया गया है। इसके लिए जब नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मिश्र से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि भूसा और हरे चारा की पर्याप्त व्यवस्था हैं। बीमार पशुओं का दवा ईलाज चल रहा है। पशुओं की संख्या पर ई ओ ने बताया कि यहां के लोकल लोगों द्वारा छुटटा पशुओं को कभी कभी जबरदस्ती पशुशाला में घुसा दिया जाता है। मंना करने पर लड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी डा. जेपी सिंह ने बताया कि लगभग सभी पशुओं को जियो टैगिंग कर दी गई। कुछ की करनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed