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जनपद की बदलती तस्वीर पर फिर लगा धब्बा

Wed, 10 Aug 2022 11:54 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 11:54 PM IST
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The changing picture of the district again got a blot
आजमगढ़। एक वक्त ऐसा भी था जब आजमगढ़ जिले को आतंक के गढ़ के नाम से लोग पुकारने लगे थे। इसके पीछे कारण यहीं था कि हर आतंकी घटना के बाद जिले से उसके तार जुड़ जाते थे। जिले में कोई आतंकी घटना तो नहीं हुई, लेकिन इसे आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाने लगा था। बड़ी मुश्किल से जिले के माथे पर लगा दाग धुलने लगा था, लेकिन एक बार फिर आतंकी के पकड़े जाने के बाद जिले के लोग शर्मसार हो गए हैं। आतंक व आजमगढ़ की बात की जाए तो सबसे पहले जिले का नाम 1993 में मुंबई सीरियल ब्लॉस्ट में आया। जिसमें जिले के सरायमीर कस्बे के रहने वाले अबू सलेम का नाम सामने आया था। अबू सलेम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी रहा है। वर्तमान में वह जेल की सलाखों के पीछे है। इसके बाद जुलाई 2008 में एक बार फिर जिला सुर्खियों में तब आया जब अहमदाबाद सीरियल ब्लॉस्ट के मास्टर माइंड के रुप में जिले के रहने वाले अबू बशर का नाम सामने आया। 26 जुलाई 2008 को हुए इस सीरियल ब्लास्ट में चार दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी तो वहीं दो सौ से अधिक लोग जख्मी हुए थे। सरायमीर थाना क्षेत्र के बीनापारा निवासी अबू बशर इस घटना का मास्टर माइंड माना जाता है। इसके साथ ही सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर निवासी मो. आरिज, शहर के बाजबहादुर निवासी मोहम्मद सैफ, कंधरापुर के शाहपुर शकीब, शहर के बदरका निवासी शैफर रहमान, जीशान भी इस मामले में आरोपी हैं। इन सभी को फांसी की सजा कोर्ट से सुनाई जा चुकी है।
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बाटला हाउस कांड भी जिले को सुर्खियों में लाया। दिल्ली के जामियानगर में आईएम के आतंकियों से पुलिस की हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे। जिसमें आतिफ अमीन व साजिद शामिल थे। वहीं जीशान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा आरिज उर्फ जुनैद, शहजाद उर्फ पप्पू भागने में सफल हुए थे। इस मामले में सरायमीर के संजरपुर निवासी डॉ. शहनवाज, शादाब उर्फ बड़ा साजिद, राशिद, आसिफ व आफताब का नाम भी शामिल है। इन पर एआईए ने 10-10 लाख का इनाम घोषित कर रखा है। इसके अलावा प्रदेश के वाराणसी, गोरखपुर में हुए बम धमाकों में भी इनका नाम आया है।
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कैसेट किंग की यहीं बने असलहे से हुई थी हत्या
टी-सीरीज कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या में भी जिले का नाम आया था। इसको भले ही जिले के लोगों ने अंजाम नहीं दिया था, लेकिन हत्या में प्रयुक्त तमंचा आजमगढ़ जिले का ही बना हुआ था। तमंचे पर मेड इन बम्हौर लिखा था और बम्हौर गांव भी जिले के मुबारकपुर थाना अंतर्गत आता है। अब तो नहीं लेकिन एक वक्त था जब तमसा नदी किनारे स्थित इस गांव में बड़े स्तर पर अवैध असलहों का निर्माण होता था।
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विस्फोटक के साथ पकड़ा गया था हकीम तारिक
जिले से मुंबई गए युवाओं के भटकने व आतंकी कनेक्शन होने की बात पहले भी सामने आ चुकी है। खासतौर से सरायमीर, संजरपुर, बिलरियागंज, शहर कोतवाली क्षेत्र के युवाओं का नाम आया हुआ है। 2007 में रानी की सराय में क्लीनिक चलाने वाले हकीम तारिक कासमी को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से विस्फोटक के साथ पकड़ा गया था। इतना ही नहीं जिले के ही रहने वाले असदुल्लाह अख्तर को नेपाल बार्डर से आतंकी यासीन भटकल के साथ गिरफ्तार किया गया था।
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