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एक ही रात में राख हो गई 25 वर्षों की कमाई
ब्यूरो/ अमर उजाला /आजमगढ़
Updated Mon, 16 May 2016 11:16 PM IST
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आजमगढ़ के खुदादादपुर गांव में बवाल के बाद सोमवार को सरायमीर थाने पर हालात से निपटने के लिए रणनीति बनाते एडीजे ला एंड आर्डर दलजीत सिंह चौधरी।
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दो लोगों के विवाद को लेकर दो समुदायों में तनातनी के बाद दो दिनों तक हुई हिंसा की कीमत दोनों वर्गों को चुकानी पड़ी है। शनिवार की रात हुई घटना में खुदादादपुर निवासी मुसाफिर के घर हमला बोलने वालों ने तोड़फोड़, आगजनी कर इस कदर तबाही मचाई कि पीड़ित परिवार के सभी लोगों ने घर छोड़कर रिश्तेदारी में शरण लेनी पड़ी है। मुसाफिर के पिता सीताराम ने दर्द बयां करते हुए बताया कि 25 वर्षों की कमाई एक रात में राख हो गई। मकान के ढांचे को छोड़ कुछ नहीं बचा है जिससे जीवन यापन किया जा सके।
14 मई की रात के खौफनाक मंजर को यादकर सीताराम सहम उठते हैं। घटना के दिन शाम को साढ़े पांच बजे परिवार के सभी सदस्य छत पर थे। उसी समय कई लोग आए और दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए और तोड़फोड़ शुरू करने लगे। रिश्तेदार की लड़की की शादी में देने के लिए लाए गए रेफ्रिजरेटर समेत कूलर, इनवर्टर आदि को जला दिया गया। बाइक तोड़ दी गई। इसके बाद अन्य कमरों में भी उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की। पंखे तोड़ डाले गए। उपद्रवी गैस सिलेंडर भी उठा ले गए। पूजा घर तक को नहीं छोड़ा। इस कमरे का फाटक तोड़कर बक्सों को तोड़ दिया। यही नहीं उपद्रवी दो बक्से भी उठा ले गए जिसमें जेवर कपड़े आदि कीमती सामान थे। वह पहले अरब में कमाते थी और तीन साल पहले लौटे हैं। 25 वर्षों में जो भी कमाया था, सब एक रात में ही राख हो गया। तन पर पड़े कपड़े को छोड़ कुछ भी नहीं बचा है। घटना के समय परिवार के लोगों के साथ उन्होंने खुद छत के बगल में स्थित बाउंड्री वाल फांद कर जान बचाई। कहा कि उनकी पत्नी मेवाती, पुत्र मुसाफिर और उसकी पत्नी अमरेज और उसकी पत्नी रेनू और पांच पौत्रियां रानी की सराय स्थित मुसाफिर के ननिहाल गए हैं।
उधर, खुदादादपुर में जिन दलितों की मड़इयां और करकट जलाने के साथ तोड़ फोड़ की गई है उनमें जियालाल, श्रीपत, सेवा, प्यारेलाल, लालचंद, मेवाती, अनीता, रेनू शामिल हैं। पीड़ितों का कहना है कि दो समुदायों में चौथी बार संघर्ष की घटना हुई है। अगर प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए ठोस कदम नहीं उठाया तो वे मामले को शासन ले जाएंगे। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो वे पलायन करने के लिए विवश होंगे। घटना को लेकर पीड़ितों में दहशत है।
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14 मई की रात के खौफनाक मंजर को यादकर सीताराम सहम उठते हैं। घटना के दिन शाम को साढ़े पांच बजे परिवार के सभी सदस्य छत पर थे। उसी समय कई लोग आए और दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए और तोड़फोड़ शुरू करने लगे। रिश्तेदार की लड़की की शादी में देने के लिए लाए गए रेफ्रिजरेटर समेत कूलर, इनवर्टर आदि को जला दिया गया। बाइक तोड़ दी गई। इसके बाद अन्य कमरों में भी उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की। पंखे तोड़ डाले गए। उपद्रवी गैस सिलेंडर भी उठा ले गए। पूजा घर तक को नहीं छोड़ा। इस कमरे का फाटक तोड़कर बक्सों को तोड़ दिया। यही नहीं उपद्रवी दो बक्से भी उठा ले गए जिसमें जेवर कपड़े आदि कीमती सामान थे। वह पहले अरब में कमाते थी और तीन साल पहले लौटे हैं। 25 वर्षों में जो भी कमाया था, सब एक रात में ही राख हो गया। तन पर पड़े कपड़े को छोड़ कुछ भी नहीं बचा है। घटना के समय परिवार के लोगों के साथ उन्होंने खुद छत के बगल में स्थित बाउंड्री वाल फांद कर जान बचाई। कहा कि उनकी पत्नी मेवाती, पुत्र मुसाफिर और उसकी पत्नी अमरेज और उसकी पत्नी रेनू और पांच पौत्रियां रानी की सराय स्थित मुसाफिर के ननिहाल गए हैं।
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उधर, खुदादादपुर में जिन दलितों की मड़इयां और करकट जलाने के साथ तोड़ फोड़ की गई है उनमें जियालाल, श्रीपत, सेवा, प्यारेलाल, लालचंद, मेवाती, अनीता, रेनू शामिल हैं। पीड़ितों का कहना है कि दो समुदायों में चौथी बार संघर्ष की घटना हुई है। अगर प्रशासन ने शांति व्यवस्था के लिए ठोस कदम नहीं उठाया तो वे मामले को शासन ले जाएंगे। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो वे पलायन करने के लिए विवश होंगे। घटना को लेकर पीड़ितों में दहशत है।
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