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मार्क्सवाद के बिना रांगेय राघव पर बातचीत असंभव: प्रो. समीर पाठक

Tue, 08 Apr 2025 11:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:59 PM IST
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Talking about Rangeya Raghav is impossible without Marxism: Prof. Sameer Pathak
चक्रपानपुर। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में मंगलवार को रांगेय राघव का सृजनलोक विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन हुआ। प्रो. समीर पाठक डीएवी कॉलेज, वाराणसी ने कहा कि मार्क्सवाद के बिना रांगेय राघव पर बातचीत असंभव है।
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रांगेय राघव शोधपीठ के प्रभारी प्रो. सुजीत कुमार ने हिंदी साहित्य के इस महान सृजनशील लेखक, उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार और इतिहासवेत्ता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। राघव की पत्नी सुलोचना राघव, पुत्री प्रो. सीमातिनी राघव और वरिष्ठ आलोचक प्रो. जीवन सिंह (अलवर, राजस्थान) के ऑनलाइन संदेश प्रसारित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि व चिंतक प्रो. एमपी सिंह (पूर्व प्रो., टी.डी. कॉलेज, वाराणसी) ने की। उन्होंने कहा कि यह शोधपीठ रांगेय राघव के विचारों को भविष्य में आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगी।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. रघुवंश मणि शिवहर्ष पीजी कॉलेज, बस्ती ने कहा कि राघव समय से आगे की सोच रखते थे, उनका दृष्टिकोण समकालीन और भविष्योन्मुखी था। वक्ता प्रो. वंदना चौबे आर्य महिला पीजी कॉलेज, वाराणसी ने बताया कि राघव ने कम समय में असाधारण साहित्य रचा, जो सामाजिक, ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक गहराई लिए हुए है।
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प्रो. समीर पाठक डीएवी कॉलेज, वाराणसी ने कहा कि मार्क्सवाद के बिना रांगेय राघव पर बातचीत असंभव है। उनकी भाषा शैली प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक थी। शोधपीठ का संचालन बड़ी जिम्मेदारी है। समापन पर प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह ने आभार जताया। मंच संचालन डॉ. संजय श्रीवास्तव ने किया।
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