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कर्बला में दफन हुए ताजिए
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- देर शाम कर्बला में दफन हुए ताजिए
नहीं निकला गया ताजियों का जुलूस,नहीं निकले अखाड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। मुहर्रम की दसवीं को अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों और इमाम हसन को खिराजे अकीदत पेश की। देर शाम कोरोना गाइड लाइन के अनुसार कर्बला में ताजिये दफन किए गए।कोरोना संक्रमण के कारण विगत वर्ष से ताजिए के जुलूस और अखाड़ा निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
जिला प्रशासन ने पांच लोगों के साथ ताजिये को कर्बला में दफन किए जाने का निर्देश दिया। सरकार द्वारा घरों में अलम और ताजिया रखकर इबादत किए जाने के आदेश के कारण इमाम चौकों पर ताजिए नहीं बैठाए गए। लोगों ने अपने-अपने घरों में कर्बला के शहीदों के नाम फातिहा कराया। जिन लोगों ने ताजिए अपने घरों में रखे थे, उन्होंने देर शाम अपने-अपने ताजियों को कर्बला के मैदान में दफन किया। इससे पहले मोहर्रम की दसवीं को नगर क्षेत्र के पहाड़पुर, कोट, जामा मस्जिद और कटरा से अखाड़े निकाले जाते रहे। जामा मस्जिद और कटरा का अखाड़ा एक साथ चलते थे। इनके खिलाड़ी लाठी, भाले, तलवार और जंजीरों से विभिन्न प्रकार के हैरतअंगेज कारनामे दिखाते हुए कटरा से मुख्य चौक पर आते थे। तो दूसरी तरफ पहाड़पुर और कोट का अखाड़ा एक साथ खेलते हुए तकिया, पुरानी कोतवाली होते मुख्य चौक पर ताजियों के साथ आते थे। चारो अखाड़ों के साथ नगर क्षेत्र के समस्त ताजिए हुआ करते थे। जो देर रात तक अखाड़ा खेलते हुए ताजियों के साथ कर्बला जाते थे। जहां देर रात समस्त ताजिए दफन कर दिए जाते थे। लेकिन विगत वर्ष से कोरोना संक्रमण के कारण न तो ताजियों का जुलूस निकाला जा रहा है, इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
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नहीं निकला गया ताजियों का जुलूस,नहीं निकले अखाड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। मुहर्रम की दसवीं को अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों और इमाम हसन को खिराजे अकीदत पेश की। देर शाम कोरोना गाइड लाइन के अनुसार कर्बला में ताजिये दफन किए गए।कोरोना संक्रमण के कारण विगत वर्ष से ताजिए के जुलूस और अखाड़ा निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
जिला प्रशासन ने पांच लोगों के साथ ताजिये को कर्बला में दफन किए जाने का निर्देश दिया। सरकार द्वारा घरों में अलम और ताजिया रखकर इबादत किए जाने के आदेश के कारण इमाम चौकों पर ताजिए नहीं बैठाए गए। लोगों ने अपने-अपने घरों में कर्बला के शहीदों के नाम फातिहा कराया। जिन लोगों ने ताजिए अपने घरों में रखे थे, उन्होंने देर शाम अपने-अपने ताजियों को कर्बला के मैदान में दफन किया। इससे पहले मोहर्रम की दसवीं को नगर क्षेत्र के पहाड़पुर, कोट, जामा मस्जिद और कटरा से अखाड़े निकाले जाते रहे। जामा मस्जिद और कटरा का अखाड़ा एक साथ चलते थे। इनके खिलाड़ी लाठी, भाले, तलवार और जंजीरों से विभिन्न प्रकार के हैरतअंगेज कारनामे दिखाते हुए कटरा से मुख्य चौक पर आते थे। तो दूसरी तरफ पहाड़पुर और कोट का अखाड़ा एक साथ खेलते हुए तकिया, पुरानी कोतवाली होते मुख्य चौक पर ताजियों के साथ आते थे। चारो अखाड़ों के साथ नगर क्षेत्र के समस्त ताजिए हुआ करते थे। जो देर रात तक अखाड़ा खेलते हुए ताजियों के साथ कर्बला जाते थे। जहां देर रात समस्त ताजिए दफन कर दिए जाते थे। लेकिन विगत वर्ष से कोरोना संक्रमण के कारण न तो ताजियों का जुलूस निकाला जा रहा है, इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
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