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Azamgarh News: सठियांव मिल परिक्षेत्र में गन्ने की बोआई 971 हेक्टेयर घटी

Thu, 27 Aug 2026 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 12:52 AM IST
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Sugarcane sowing in the Sathiaon mill zone has decreased by 971 hectares.
सठियांव चीनी मिल। श्रोत-लाइब्रेरी
सठियांव चीनी मिल परिक्षेत्र में इस साल गन्ने की बोआई का रकबा 971 हेक्टेयर कम हो गया है। पिछले साल की तुलना में यह गिरावट दर्ज की गई है।
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किसानों की गन्ना उत्पादन में रुचि लगातार घट रही है, जिससे इस साल कुल 14 हजार 440 हेक्टेयर में ही गन्ने की फसल लगाई गई है। गन्ना आपूर्ति और समय पर भुगतान न मिलने जैसी समस्याओं से किसानों का मोहभंग हुआ है।
चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र में किसानों का समय से भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद गन्ना आपूर्ति को लेकर होने वाली परेशानियों के कारण किसानों ने गन्ने की फसल लगाने में रुचि नहीं दिखाई।
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जिस समय चीनी मिल का नए कलेवर में शुभारंभ हुआ था, तो उम्मीद थी कि जो किसान गन्ने की खेती से मुंह मोड़ चुके हैं, वे इस ओर फिर से लौटेंगे। हालांकि, मिल के संचालन के बाद गन्ने का उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन जितना रकबा बढ़ने की उम्मीद थी, उतना नहीं बढ़ा।
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वहीं, अब इसमें धीरे-धीरे गिरावट भी आ रही है। यदि गन्ने का रकबा इसी तरह घटता रहा तो मिल के संचालन पर संकट गहरा सकता है।
सठियांव चीनी मिल परिक्षेत्र में लगातार तीन साल से गन्ने की बोआई का क्षेत्रफल कम हो रहा है। वर्ष 2024-25 में 17 हजार 426 हेक्टेयर में गन्ना लगा था, जो 2025-26 में घटकर 15 हजार 411 हेक्टेयर हो गया। इस साल 2026-27 में यह आंकड़ा 14 हजार 440 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
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चीनी मिल ने किया पिछले सत्र का भुगतान
मिल प्रबंधन की मानें तो गन्ना पेराई सत्र 2025-26 में सठियांव चीनी मिल 133 दिन चली थी। इस दौरान 23 हजार 633 किसानों ने मिल को 35 लाख 24 हजार क्विंटल गन्ने की आपूर्ति की थी। किसानों को कुल एक अरब 36 करोड़ सात लाख 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया। कई वर्षों के बाद ऐसा हुआ कि किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान समय से मिला। इस साल चीनी मिल ने दो लाख 85 हजार क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था, जिसमें से दो लाख 54 हजार क्विंटल चीनी का विक्रय हो चुका है। चीनी मिल के गोदाम में 31 हजार क्विंटल चीनी का भंडार यूपीपीसी ने आरक्षित कर रखा है।
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बोले किसान

- गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक साल का समय लगता है। गर्मी में तपन और जाड़े के दिनों में ठंड में काम करना और मजदूरों को न मिलना। इसमें लागत भी अधिक लगती है। -राजू यादव, मखदूमपुर।
- गन्ने की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए हर समय रखवाली करने के बावजूद भी चूहों से रखवाली करना कठिन है। पशु और चूहे खेत के भीतर ही रहकर फसल चट कर जाते हैं। इसकी छिलाई, कटाई और ढुलाई भी महंगी पड़ती है। -अनिरुद्ध यादव, देवकली तारन।
- हमारे यहां से चीनी मिल दूर नहीं है। रबी फसल गेहूं और खरीफ की मुख्य फसल धान की खेती करते हैं। इसके तैयार होने पर इसे बेचकर भुगतान का इंतजार नहीं करना होता है। -अरविंद, जमुड़ी।
- हम गन्ने की बोआई करते हैं। चीनी मिल में गन्ने की आपूर्ति भी करते हैं। किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है। चीनी मिल प्रबंधन का सहयोग भी समय-समय पर मिलता है। -संतोष यादव, सरदारपुर खुझिया।

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गत वर्ष की अपेक्षा इस साल गन्ने की फसल कम लगी है। किसानों को फसल लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा और नवीन पेराई सत्र में किसानों को परेशानी न हो, इसका प्रयास रहेगा। चीनी मिल सठियांव के परिक्षेत्र आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, जौनपुर और वाराणसी जनपदों के गन्ना किसानों का सर्वेक्षण पूरा हो गया है। गन्ना सर्वेक्षण को विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही किसान मिल पर भी अपना सर्वे देख सकते हैं। -डॉ. विनय प्रताप सिंह, मुख्य गन्ना अधिकारी।
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