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Azamgarh News: एबीवीपी के बैनर तले छात्रों ने सुहेलदेव विवि परिसर में किया प्रदर्शन
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विवि परिसर में प्रदर्शन करते मऊ स्थित महाविद्यालयों के छात्र व छात्राएं। संवाद
चक्रपानपुर। “नियम सबके लिए एक, विश्वविद्यालय की मनमानी बंद करो” के नारों के साथ सैकड़ों छात्रों ने बृहस्पतिवार को महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। मऊ के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले एकत्र हुए और परीक्षा प्रणाली में दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।छात्रों का आरोप है कि एक ही सेमेस्टर में 4-4 विषयों में बैक आने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कॉपियों में 22 से 46 अंकों तक की हेरफेर का मामला उठाते हुए छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। साथ ही, एक बैक पेपर के लिए 600 रुपये शुल्क को लेकर भी छात्रों में नाराजगी देखी गई। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में संचालित पाठ्यक्रमों की परीक्षा लिखित रूप में कराई जाती है, जबकि संबद्ध महाविद्यालयों के छात्रों की परीक्षा ओएमआर शीट पर ली जाती है।छात्रों ने इसे “दोहरा मापदंड” करार देते हुए पूछा, “नियम सबके लिए एक क्यों नहीं?” एक छात्र रविंद्र ने कहा कि नियमित कक्षाएं करने के बावजूद मऊ के कई कॉलेजों में दर्जनों छात्रों के चार-चार विषयों में बैक आना गंभीर चिंता का विषय है।एबीवीपी के मंत्री शशिकांत मंगलम ने कहा कि हमारी मुख्य मांग है कि नियम सबके लिए समान हों। महाविद्यालयों के लिए ओएमआर और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए लिखित परीक्षा क्यों? नियमों में बदलाव क्यों किया गया? छात्रों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह समस्या मऊ जनपद के कई कॉलेजों में व्याप्त है और बैक पेपर के कारण छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुलसचिव डॉ. अंजनी मिश्र ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी समस्याएं सुनी गई हैं और उनके आवेदन लिए गए हैं।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नियमानुसार किया जाता है। यदि कोई त्रुटि होगी तो सुधार किया जाएगा। पॉलिसी से जुड़े निर्णय उच्चाधिकारियों से चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे। हम छात्र हित में प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों से एक सप्ताह का समय लिया गया है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुलसचिव डॉ. अंजनी मिश्र ने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी समस्याएं सुनी गई हैं और उनके आवेदन लिए गए हैं।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नियमानुसार किया जाता है। यदि कोई त्रुटि होगी तो सुधार किया जाएगा। पॉलिसी से जुड़े निर्णय उच्चाधिकारियों से चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे। हम छात्र हित में प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों से एक सप्ताह का समय लिया गया है।
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