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सर्पदंश से मृत बालक 20 वर्ष बाद लौटा
azamgarh
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:16 AM IST
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अमिलो (आजमगढ़)। मुबारकपुर थाना क्षेत्र के पाही गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया है। करीब 20 साल पहले सांप के काटने से जिस बालक की मौत हो गई थी, वह युवक के रूप में जिंदा होकर लौटा है। उसके शरीर पर बचपन में जलने के निशान से घरवालों ने पहचान करके उसे गले से लगा लिया। इस घटना की क्षेत्र में चर्चा है।
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के पाहीं गांव दलित बस्ती में छह वर्ष के एक बालक दीपक को 20 वर्ष पूर्व सांप ने काट लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने उसे केले के पत्ते पर लिटाकर तमसा नदी में प्रवाहित कर दिया। लेकिन 20 वर्ष बाद वही बालक जिंदा होकर लौटा और अपने मां-बाप के पैरों से लिपट गया। दीपक ने बताया कि वह मऊ बनदेवी में एक साधू के यहां रहता था। वहीं पर पला बढ़ा और वहां से वह मजदूरी करने आसपास के क्षेत्रों में जाया करता था। तीन वर्ष पूर्व उक्त साधू का निधन हो गया। उसके बाद वह वहां से मुबारकपुर आ गया और मजदूरी करने लगा।
जहां मजदूरी करता था वहीं खाकर सो जाता था। मुबारकपुर में मजदूरी करने के दौरान ही उसकी मुलाकात पाही गांव के एक मजदूर राजेंद्र से हुई। दीपक ने राजेंद्र ने अपनी पूरी दास्तां बयां किया। राजेंद्र को 20 वर्ष पहले की घटना मालूम थी। वह मजदूरी करके जब घर पहुंचा तो सीधे दीपक के घर पहुंचा। उसने दीपक के पिता अनिल और माता बिंदु को इसकी जानकारी दी। अनिल और बिंदु आज शनिवार को मुबारकपुर पहुंचकर उससे मिले। पहचान की पुष्टि के लिए उसके शरीर पर बचपन में जलने का निशान देखा और उसे गले से लगा लिया।
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मुबारकपुर थाना क्षेत्र के पाहीं गांव दलित बस्ती में छह वर्ष के एक बालक दीपक को 20 वर्ष पूर्व सांप ने काट लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने उसे केले के पत्ते पर लिटाकर तमसा नदी में प्रवाहित कर दिया। लेकिन 20 वर्ष बाद वही बालक जिंदा होकर लौटा और अपने मां-बाप के पैरों से लिपट गया। दीपक ने बताया कि वह मऊ बनदेवी में एक साधू के यहां रहता था। वहीं पर पला बढ़ा और वहां से वह मजदूरी करने आसपास के क्षेत्रों में जाया करता था। तीन वर्ष पूर्व उक्त साधू का निधन हो गया। उसके बाद वह वहां से मुबारकपुर आ गया और मजदूरी करने लगा।
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जहां मजदूरी करता था वहीं खाकर सो जाता था। मुबारकपुर में मजदूरी करने के दौरान ही उसकी मुलाकात पाही गांव के एक मजदूर राजेंद्र से हुई। दीपक ने राजेंद्र ने अपनी पूरी दास्तां बयां किया। राजेंद्र को 20 वर्ष पहले की घटना मालूम थी। वह मजदूरी करके जब घर पहुंचा तो सीधे दीपक के घर पहुंचा। उसने दीपक के पिता अनिल और माता बिंदु को इसकी जानकारी दी। अनिल और बिंदु आज शनिवार को मुबारकपुर पहुंचकर उससे मिले। पहचान की पुष्टि के लिए उसके शरीर पर बचपन में जलने का निशान देखा और उसे गले से लगा लिया।
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