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Azamgarh News: हड़ताल पर सचिव, ताले में डीएपी, किसान परेशान
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सहकारी समिति जहानागंज बंद। संवाद
रबी फसलों की बोआई शुरू हो चुकी है, लेकिन समितियों पर ताला बंद होने से किसान परेशान हैं। सचिवों के लखनऊ में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने में चले जाने से जिन समितियों पर डीएपी उपलब्ध है, वहां भी खाद ताले में बंद है।
किसान जब सहकारी समितियों पर पहुंच रहे हैं तो पता चल रहा है कि सचिवों की हड़ताल के चलते वहां ताला बंद है। जिले में इस बार 2.95 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बोआई का लक्ष्य है। बोआई के दौरान किसान खेतों में डीएपी डालते हैं।
धान की कटाई के साथ वे बोआई के लिए खाद-बीज की तैयारी भी कर रहे हैं। जिले में 250 सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों में उर्वरकों का वितरण किया जाता है।
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मंगलवार को समितियों की जब पड़ताल कराई गई तो कई समितियों पर ताले बंद मिले। किसान समितियों पर ताला देखकर वापस लौट जा रहे थे। बरदह, बूढ़नपुर, फूलपुर, चक्रपानपुर, निजामाबाद और जहानागंज क्षेत्र की समितियों पर डीएपी नहीं है। फरिहा क्षेत्र की कयामुद्दीन गौरा पट्टी और वनगांव समितियों में ताला बंद रहा।
पवई: ब्लॉक क्षेत्र में आठ समितियां हैं। आलू, चना, मटर और सरसों की बोआई के लिए किसान डीएपी लेने समितियों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां ताला बंद मिल रहा है।
अतरौलिया: रबी की बोआई के समय किसानों को डीएपी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। पड़ताल में क्षेत्र की गजईपुर मुंडेरा, तेजा जगदीशपुर, अतरौलिया, पकरडीहा और इदिलपुर की पांचों समितियां बंद मिलीं। किसानों को ऊंचे दामों पर बाजार से डीएपी खरीदनी पड़ रही है।
मुबारकपुर: क्षेत्र की अमिलो समिति से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। इस समय हड़ताल से यह भी बंद हो गई है। इसके अलावा गुजरपार, समेंदा, असोना, बम्हौर, शाहगढ़ और सठियांव समितियों पर अभी उर्वरक वितरण का काम शुरू नहीं हुआ है।
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सचिवों की हड़ताल से खाद वितरण प्रभावित
मेंहनगर। बीते 14 अक्तूबर से शुरू हुए सचिवों के धरने के कारण समितियों पर खाद वितरण प्रभावित हो गया है। 22 अक्तूबर से सचिव अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं। इससे क्षेत्र की सभी 18 समितियों पर ताले लटके हुए हैं। किसान विनोद यादव, राजेश सिंह और रामआधार ने बताया कि सचिवों की हड़ताल के कारण उर्वरक वितरण प्रभावित हो गया है। इसका फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं। वे ऊंचे दामों पर उर्वरक बेच रहे हैं। संवाद
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डीएपी के लिए देने पड़ रहे 1900 रुपये
तहबरपुर। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से किसानों को क्षेत्र में सरकारी दर पर उर्वरक मिलना मुश्किल हो गया है। टीकापुर की समिति बंद मिली। सचिव अशोक कुमार यादव ने बताया कि समिति में फिलहाल उर्वरक उपलब्ध नहीं है। किसान राहुल सिंह, अभिषेक यादव और नवीन राय ने बताया कि समिति पर खाद उपलब्ध न होने से बाजार में 1350 रुपये की जगह 1900 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। संवाद
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फोटो संख्या- 24
समितियों पर डीएपी नहीं है। जहां है भी, वहां के सचिवों के हड़ताल पर होने के कारण समितियों पर ताला बंद है। इससे रबी की बोआई की तैयारी नहीं हो पा रही है। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने का फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं। बाजार में 19 सौ रुपये तक डीएपी मिल रही है। दुकानदारों पर विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। -मधुबन सिंह, किसान, बरदह
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फोटो संख्या- 25
जब बोआई का समय आता है, तब-तब कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। इससे किसान प्रभावित होते हैं। सचिव हड़ताल पर हैं तो प्रशासन को डीएपी बांटने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसान अधिक कीमत वसूलने की समस्या से बच सकें। उन्हें बोआई के लिए आसानी से उर्वरक मिल जाए। -विजयी लोहार, किसान, अतरौलिया
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जिले में डीएपी की कमी नहीं है। समितियों पर एक हजार मीट्रिक टन डीएपी और दो हजार टन एनपीके उपलब्ध है। इसके अलावा स्टॉक में 600 मीट्रिक टन डीएपी और 25 सौ मीट्रिक टन एनपीके पड़ी है। इस बार एनपीके का मूल्य 1450 से बढ़कर 2150 हो गया है, जबकि डीएपी का निर्धारित मूल्य 1350 रुपये प्रति बोरी ही है। जो समितियां बंद हैं, वहां किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में निकट के इफको, कृभको, डीसीडीएफ, पीसीएफ, केएसके, गन्ना समिति और एग्रीजंक्शन केंद्रों से वितरण का कार्य कराया जा रहा है। -अजय कुमार, एआर सहकारिता
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समितियों के सचिव हड़ताल पर हैं, लेकिन जिले में निजी दुकानों पर उर्वरकों की कमी नहीं है। वैसे भी अभी बोआई शुरू नहीं हुई है और मांग कम है। दुकानों की जांच की जा रही है। ओवररेटिंग की समस्या नहीं है। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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किसान जब सहकारी समितियों पर पहुंच रहे हैं तो पता चल रहा है कि सचिवों की हड़ताल के चलते वहां ताला बंद है। जिले में इस बार 2.95 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बोआई का लक्ष्य है। बोआई के दौरान किसान खेतों में डीएपी डालते हैं।
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धान की कटाई के साथ वे बोआई के लिए खाद-बीज की तैयारी भी कर रहे हैं। जिले में 250 सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों में उर्वरकों का वितरण किया जाता है।
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मंगलवार को समितियों की जब पड़ताल कराई गई तो कई समितियों पर ताले बंद मिले। किसान समितियों पर ताला देखकर वापस लौट जा रहे थे। बरदह, बूढ़नपुर, फूलपुर, चक्रपानपुर, निजामाबाद और जहानागंज क्षेत्र की समितियों पर डीएपी नहीं है। फरिहा क्षेत्र की कयामुद्दीन गौरा पट्टी और वनगांव समितियों में ताला बंद रहा।
पवई: ब्लॉक क्षेत्र में आठ समितियां हैं। आलू, चना, मटर और सरसों की बोआई के लिए किसान डीएपी लेने समितियों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां ताला बंद मिल रहा है।
अतरौलिया: रबी की बोआई के समय किसानों को डीएपी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। पड़ताल में क्षेत्र की गजईपुर मुंडेरा, तेजा जगदीशपुर, अतरौलिया, पकरडीहा और इदिलपुर की पांचों समितियां बंद मिलीं। किसानों को ऊंचे दामों पर बाजार से डीएपी खरीदनी पड़ रही है।
मुबारकपुर: क्षेत्र की अमिलो समिति से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। इस समय हड़ताल से यह भी बंद हो गई है। इसके अलावा गुजरपार, समेंदा, असोना, बम्हौर, शाहगढ़ और सठियांव समितियों पर अभी उर्वरक वितरण का काम शुरू नहीं हुआ है।
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सचिवों की हड़ताल से खाद वितरण प्रभावित
मेंहनगर। बीते 14 अक्तूबर से शुरू हुए सचिवों के धरने के कारण समितियों पर खाद वितरण प्रभावित हो गया है। 22 अक्तूबर से सचिव अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं। इससे क्षेत्र की सभी 18 समितियों पर ताले लटके हुए हैं। किसान विनोद यादव, राजेश सिंह और रामआधार ने बताया कि सचिवों की हड़ताल के कारण उर्वरक वितरण प्रभावित हो गया है। इसका फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं। वे ऊंचे दामों पर उर्वरक बेच रहे हैं। संवाद
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डीएपी के लिए देने पड़ रहे 1900 रुपये
तहबरपुर। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से किसानों को क्षेत्र में सरकारी दर पर उर्वरक मिलना मुश्किल हो गया है। टीकापुर की समिति बंद मिली। सचिव अशोक कुमार यादव ने बताया कि समिति में फिलहाल उर्वरक उपलब्ध नहीं है। किसान राहुल सिंह, अभिषेक यादव और नवीन राय ने बताया कि समिति पर खाद उपलब्ध न होने से बाजार में 1350 रुपये की जगह 1900 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। संवाद
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फोटो संख्या- 24
समितियों पर डीएपी नहीं है। जहां है भी, वहां के सचिवों के हड़ताल पर होने के कारण समितियों पर ताला बंद है। इससे रबी की बोआई की तैयारी नहीं हो पा रही है। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने का फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं। बाजार में 19 सौ रुपये तक डीएपी मिल रही है। दुकानदारों पर विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। -मधुबन सिंह, किसान, बरदह
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फोटो संख्या- 25
जब बोआई का समय आता है, तब-तब कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। इससे किसान प्रभावित होते हैं। सचिव हड़ताल पर हैं तो प्रशासन को डीएपी बांटने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसान अधिक कीमत वसूलने की समस्या से बच सकें। उन्हें बोआई के लिए आसानी से उर्वरक मिल जाए। -विजयी लोहार, किसान, अतरौलिया
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जिले में डीएपी की कमी नहीं है। समितियों पर एक हजार मीट्रिक टन डीएपी और दो हजार टन एनपीके उपलब्ध है। इसके अलावा स्टॉक में 600 मीट्रिक टन डीएपी और 25 सौ मीट्रिक टन एनपीके पड़ी है। इस बार एनपीके का मूल्य 1450 से बढ़कर 2150 हो गया है, जबकि डीएपी का निर्धारित मूल्य 1350 रुपये प्रति बोरी ही है। जो समितियां बंद हैं, वहां किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में निकट के इफको, कृभको, डीसीडीएफ, पीसीएफ, केएसके, गन्ना समिति और एग्रीजंक्शन केंद्रों से वितरण का कार्य कराया जा रहा है। -अजय कुमार, एआर सहकारिता
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समितियों के सचिव हड़ताल पर हैं, लेकिन जिले में निजी दुकानों पर उर्वरकों की कमी नहीं है। वैसे भी अभी बोआई शुरू नहीं हुई है और मांग कम है। दुकानों की जांच की जा रही है। ओवररेटिंग की समस्या नहीं है। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी

सहकारी समिति जहानागंज बंद। संवाद

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