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Azamgarh News: हवा में नमी से बढ़े कान में दर्द और मवाद के मरीज
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अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीज। संवाद
मानसून के दौरान हवा में बढ़ी नमी अब लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। फंगल, बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण बढ़ने से नाक, कान और गले (ईएनटी) से संबंधित मरीजों की संख्या जिला अस्पताल की ओपीडी में बढ़ रही है।
मरीज कान में दर्द, मवाद (ओटोरिया), गले में संक्रमण, बुखार, नाक बंद होने और गले में खराश जैसी समस्याओं को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकेवल ने बताया कि इन दिनों ईएनटी ओपीडी में प्रतिदिन 145 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं।
इनमें लगभग 70 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कान में दर्द, मवाद (ओटोरिया) या संक्रमण की समस्या होती है। इसके अलावा गले में दर्द, टॉन्सिल संक्रमण, बुखार, नाक बंद होना और एलर्जी के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
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बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जा रहा है। कई लोग कान की सफाई के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कान की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार कराने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या कान में ड्रॉप डालने से बचना चाहिए।
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मरीज कान में दर्द, मवाद (ओटोरिया), गले में संक्रमण, बुखार, नाक बंद होने और गले में खराश जैसी समस्याओं को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकेवल ने बताया कि इन दिनों ईएनटी ओपीडी में प्रतिदिन 145 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं।
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इनमें लगभग 70 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कान में दर्द, मवाद (ओटोरिया) या संक्रमण की समस्या होती है। इसके अलावा गले में दर्द, टॉन्सिल संक्रमण, बुखार, नाक बंद होना और एलर्जी के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
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बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जा रहा है। कई लोग कान की सफाई के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या कॉटन बड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कान की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार कराने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या कान में ड्रॉप डालने से बचना चाहिए।

अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीज। संवाद