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आरक्षण ने होली से पहले कई चेहरों का उड़ाया रंग
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आजमगढ़। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को नई आरक्षण नीति के अनुसार प्रस्तावित आरक्षण सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। लेकिन इस आरक्षण सूची ने होली से पहले चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे कई लोगों के चेहरे का रंग उड़ा दिया है। क्योंकि उनकी सीट का आरक्षण बदल चुका है। इनमें से बहुत से लोगों को अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से आस बंधी है।
जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को जारी प्रस्तावित आरक्षण सूची में पूर्व में हुए आरक्षण के हिसाब से लगभग 25 से 30 प्रतिशत सीटों का आरक्षण बदल चुका है। इन सीटों पर चुनावी ताल ठोकने की तैयारी में जुटे लोगों का समीकरण गड़बड़ हो गया है। वहीं कुछ लोगों ने पूर्व में हुए आरक्षण के बाद जब सीट अपने लड़ने लायक नहीं रही तो आरक्षण के हिसाब से दूसरे को मैदान में उतार दिया। अब जबकि नए आरक्षण सीट उनके लड़ने लायक हो गई है तो उनकी समझ़ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। वहीं बहुत से लोग पूर्व में हुए आरक्षण पर ताल ठोंक रहे थे। उनके द्वारा हजारों रुपये खर्च कर पोस्टर बैनर आदि छपवा लिए थे। ज्यादातर लोगों ने इन्हें गांव में चस्पा भी करवा दिया था। लेकिन नई आरक्षण नीति ने उनका सारा गणित फेल कर दिया। ऐसे में अब उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। प्रस्तावित आरक्षण सूची के प्रकाशन के बाद मैदान से बाहर हुए लोगों को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से उम्मीद बंधी है। उन्हें उम्मीद है कि पूर्व की भांति सुप्रीम कोर्ट भी प्रस्तावित आरक्षण सूची पर रोक लगाएगी और उन्हें एकबार फिर मैदान में उतरने का मौका मिलेगा। वहीं प्रस्तावित आरक्षण सूची पर रविवार से आपत्तियां लेने का कार्य शुरू हो गया। मैदान से बाहर से बहुत से लोग पूर्व के कारण और आबादी का हवाला देकर आपत्तियां दाखिल करने में जुट गए हैं। अब हर कोई अपनी गणित को सेट करने में जुट गया है।
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जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को जारी प्रस्तावित आरक्षण सूची में पूर्व में हुए आरक्षण के हिसाब से लगभग 25 से 30 प्रतिशत सीटों का आरक्षण बदल चुका है। इन सीटों पर चुनावी ताल ठोकने की तैयारी में जुटे लोगों का समीकरण गड़बड़ हो गया है। वहीं कुछ लोगों ने पूर्व में हुए आरक्षण के बाद जब सीट अपने लड़ने लायक नहीं रही तो आरक्षण के हिसाब से दूसरे को मैदान में उतार दिया। अब जबकि नए आरक्षण सीट उनके लड़ने लायक हो गई है तो उनकी समझ़ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। वहीं बहुत से लोग पूर्व में हुए आरक्षण पर ताल ठोंक रहे थे। उनके द्वारा हजारों रुपये खर्च कर पोस्टर बैनर आदि छपवा लिए थे। ज्यादातर लोगों ने इन्हें गांव में चस्पा भी करवा दिया था। लेकिन नई आरक्षण नीति ने उनका सारा गणित फेल कर दिया। ऐसे में अब उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। प्रस्तावित आरक्षण सूची के प्रकाशन के बाद मैदान से बाहर हुए लोगों को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका से उम्मीद बंधी है। उन्हें उम्मीद है कि पूर्व की भांति सुप्रीम कोर्ट भी प्रस्तावित आरक्षण सूची पर रोक लगाएगी और उन्हें एकबार फिर मैदान में उतरने का मौका मिलेगा। वहीं प्रस्तावित आरक्षण सूची पर रविवार से आपत्तियां लेने का कार्य शुरू हो गया। मैदान से बाहर से बहुत से लोग पूर्व के कारण और आबादी का हवाला देकर आपत्तियां दाखिल करने में जुट गए हैं। अब हर कोई अपनी गणित को सेट करने में जुट गया है।
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