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आरटीई के तहत गरीब बच्चों का दाखिला लेने से कतरा रहे निजी स्कूल

Sat, 10 Oct 2020 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 11:45 PM IST
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Private schools are avoiding admission of poor children under RTE
आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद निजी स्कूल निर्धारित सीटों की तुलना में गरीब बच्चों का एडमीशन लेने में आनाकानी कर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अब हर निजी स्कूल स्कूलों को निर्धारित सीटों में से गरीब बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क प्रवेश लेना है। बीएसए ने गरीब बच्चों का प्रवेश लेने के लिए विद्यालयों को आदेश जारी किया है। मगर, कई नामचीन स्कूलों ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों का दाखिला नहीं लिया। इसे लेकर बीएसए से शिकायत भी की गई है।
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आरटीई के तहत दुर्बल वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला कराने का प्रावधान है। इसके एवज में सरकार संबंधित स्कूल को प्रतिमाह प्रतिपूर्ति शुल्क मुहैया कराती है। इस बार बच्चों के दाखिले के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन मांगे गए थे। आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए मार्च से आवेदन शुरू हुए थे। कोरोना के कारण आरटीई के तहत आवेदन के लिए चार बार आवेदन प्रक्रिया की तिथि भी बढ़ाई गई थी। अब ब्लॉकवार आवंटित स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रथम चरण में 1351, दूसरे चरण में 722 व तीसरे चरण में 412 बच्चों का चयन हुआ। इनमें से 412 बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया गतिशील है। बाकी बच्चों को विद्यालयों में दाखिला मिल गया है। पिछले माह इन बच्चों के दाखिले के लिए भी संबंधित विद्यालयों के लिए आदेश जारी किए गए, मगर तमाम प्राइवेट विद्यालय इन बच्चों के दाखिला नहीं कर रहे।
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अभिभावकों को टरका रहे स्कूल संचालक, दो स्कूलों भेजा पत्र
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत शहर के कई ऐसे विद्यालय हैं जिन्होंने गरीब बच्चों का प्रवेश आसानी से ले लिया है। लेकिन बिलरियागंज क्षेत्र व शहर के एक नामचीन विद्यालय में बच्चों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। प्रवेश के लिए पहुंचने वाले स्कूल प्रबंधक अभिभावकों को कोई न कोई कमी बताकर टरका देते हैं। बार-बार स्कूलों से टरकाए जाने से कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला वहां न कराने का फैसला ले लिया। हालांकि बीएसए ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों का दाखिला न लेने वाले दो नामचीन स्कूलों को पत्र भी भेजा है। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश जारी किया है कि गरीब बच्चों के प्रवेश न लेने वाले विद्यालय को नोटिस भेजी जाए। इसके बाद भी दाखिला नहीं लेने हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गरीब बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों में कराया जा रहा है। कुछ विद्यालयों में दाखिला न लेने को लेकर शिकायत मिली है। विद्यालयों को पत्र लिखा गया है। यदि वह दाखिला नहीं लेते हैं तो विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।
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