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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरो पर, सजे बाजार

Wed, 17 Aug 2022 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 11:36 PM IST
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Preparations for Shri Krishna Janmashtami in full swing, decorated market
आजमगढ़। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां अब जोरों पर चल रही है। बाजारों में बुधवार को भीड़ रही। लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप व श्रृंगार का सामान खरीदा। कई परिवार अपने बच्चों को राधा और कृष्ण के स्वरूप से सजाने के लिए खरीदारी करते नजर आए। 18-19 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाएगा। इस बार 19 अगस्त सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। इधर पर्व मनाने के लिए लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। बाजार भी सज गए हैं। भगवान श्रीकृष्ण के झूले, सिंहासन, श्रृंगार का सामान व पोशाकों की अलग-अलग रेंज उपलब्ध हैं। बाजार में श्रीकृष्ण के कलात्मक गहनों की विशेष मांग है। लोग लड्डू गोपाल, बांसुरी बजाते भगवान श्रीकृष्ण, माखन खाते कान्हा, मोर पंख धारण किए कान्ह, राधा-कृष्ण व अन्य मूर्तियां भक्तजन खरीदते नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के श्रृंगार के सामान में पोशाक की पगड़ी, माला, बांसुरी, कुंडल व अन्य सामान लोग खरीदते दिखाई दे रहे हैं। कुछ स्थानों पर लोग बच्चों के लिए उनके साइज की ड्रेस, मुकुट, बांसुरी, कमरबंद, माला, बाजूबंद व अन्य श्रृंगार के सामान भी खरीदते थे। वहीं, दुकानदारों का कहना है कि इस बार लोगों में जन्माष्टमी को लेकर उत्साह है। युवतियां और महिलाएं सामान खरीदने के लिए निकल रही हैं। इस बार भगवान की पोशाक व अन्य पूजन के सामान की कीमत में वृद्धि हुई है।
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जन्माष्टमी व्रत से पापों का होता है नाश
आजमगढ़। भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र से युक्त शुभ मुहूर्त में मध्य रात्रि के समय दुष्टों का विनाश करने एवं धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्री हरि विष्णु का श्री कृष्ण अवतार हुआ था। यह तिथि जन्माष्टमी के नाम से विख्यात है। इस वर्ष इस महापर्व का सुखद संयोग 19 अगस्त दिन शुक्रवार को प्राप्त होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित नीतेश मिश्रा ने बताया कि उक्त दिन उदया तिथि से ही अष्टमी तिथि मिल रही है जो रात्रि 1 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। कृतिका नक्षत्र रहेगी रोहिणी भोर में 4.58 बजे के बाद लगेगी। भविष्य पुराण के अनुसार जन्माष्टमी व्रत से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है। स्कंदपुराण के अनुसार उक्त व्रत को करने से लक्ष्मी की प्राप्ति व कार्यों की सिद्धि होती है। जबकि ब्रह्मवैवर्तपुराण में उक्त व्रत को कोटि गुना अधिक फलदायी कहा गया है। पर्वोत्सव में मध्य रात्रि की शुभ बेला में भगवान श्री कृष्ण के बाल विग्रह रूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर उनके श्री चरणों को धोकर नववस्त्र से अलंकृत कर माखन मिश्री का भोग लगाकर षोडशोपचार से पूजन कर उन्हे पालने में झुलाना चाहिए। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप व गोपाल सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए।
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