{"_id":"606cb16b8ebc3ecc5f0d177a","slug":"political-parties-came-down-in-support-of-traders-azamgarh-news-vns5837314180","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्यापारियों के समर्थन में उतर आए थे राजनैतिक दल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्यापारियों के समर्थन में उतर आए थे राजनैतिक दल
विज्ञापन
आजमगढ़। अधिकारियों के दुर्व्यवहार व सराफा कारोबारी की पिटाई पर आक्रोशित व्यापारियों के समर्थन में सभी राजनैतिक दलों के लोग पहुंच गए थे। सपा, कांग्रेस से लेकर सत्ताधारी दल भाजपा व विभिन्न संगठनों व व्यापारियों के सभी गुटों के पदाधिकारी भी शहर कोतवाली पर जुटे थे।
शहर कोतवाली में चल रहे व्यापारियों के घेराव व प्रदर्शन के समर्थन में सबसे पहले भाजपा नेता अखिलेश मिश्रा शहर कोतवाली पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसी भी मौके पर पहुंच गए। दोपहर के बाद सदर विधायक व पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने भी शहर कोतवाली में व्यापारियों के समर्थन में डेरा डाल दिया।
भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह के अलावा अजय सिंह आदि भी घंटो शहर कोतवाली में डेरा डाले हुए थे। व्यापारियों के भी कई संगठन है और सभी संगठनों के पदाधिकारी व व्यापारी मंगलवार को एकजुट नजर आए और सामुहिक रूप से अधिकारियों की कवायद का विरोध किया। सभी का यही कहना था कि सराफा व्यापारी की पिटाई के बजाए चालान आदि काटने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, यदि नियमानुसार कार्रवाई हुई होती तो यह हंगामा ही नहीं खड़ा हुआ होता।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर कोतवाली में चल रहे व्यापारियों के घेराव व प्रदर्शन के समर्थन में सबसे पहले भाजपा नेता अखिलेश मिश्रा शहर कोतवाली पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह के नेतृत्व में कांग्रेसी भी मौके पर पहुंच गए। दोपहर के बाद सदर विधायक व पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव ने भी शहर कोतवाली में व्यापारियों के समर्थन में डेरा डाल दिया।
विज्ञापन
भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह के अलावा अजय सिंह आदि भी घंटो शहर कोतवाली में डेरा डाले हुए थे। व्यापारियों के भी कई संगठन है और सभी संगठनों के पदाधिकारी व व्यापारी मंगलवार को एकजुट नजर आए और सामुहिक रूप से अधिकारियों की कवायद का विरोध किया। सभी का यही कहना था कि सराफा व्यापारी की पिटाई के बजाए चालान आदि काटने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, यदि नियमानुसार कार्रवाई हुई होती तो यह हंगामा ही नहीं खड़ा हुआ होता।
विज्ञापन