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समय से साक्षात्कार कराती हैं प्रदर्शनकारी कलाएं
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शिब्ली इंटर कालेज में आयेजित पुस्तक मेले में पुस्तकों को देखते लोग।
- फोटो : AZAMGARH
रंगमंच सिखाता है लोगों से जोड़ना: अनीस
शिब्ली कॉलेज के पुस्तक मेले में कला व रंगमंच पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। प्रदर्शनकारी कलाएं और जन सामान्य का समकालीन समय से साक्षात्कार कराती हैं। यह बात अनीस आजमी ने कही। वह
उत्तर प्रदेश संस्कृृति विभाग, वन विभाग, जिला प्रशासन और नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित 22वें आजमगढ़ पुस्तक मेले के छठवें दिन ‘कला और रंगमंच की दुनिया’ विषय पर चर्चा कर रहे थे। वर्चुअल माध्यम से हिस्सेदारी करते हुए कहा कि रंगमंच जोड़ना सिखाता है।
अनीस आजमी ने कहा कि कला जीवन से जुड़ी होती है। इससे हम खुद से अलग नहीं कर सकते। अलग-अलग दौर में नाटक होते रहे हैं। समाज की अच्छे और खराब दोनों रूपों को सामने लाते रहे हैं। थियेटर हमें लोगों से जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। एक विद्यार्थी के सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में राजनिति से थियेटर को कोई संकट नहीं है। रंगमंच हमेशा सच को सामने लाता है और वह जनता की भावनाओं को प्रकट करता है। हम बड़ी से बड़ी बात को इसके जरिए आसानी से कह जाते हैं। उन्होंने शेक्सपीयर के हवाले से कहा है जीवन एक रंगमच है, हम इसमें अपनी भूमिका निभाते हैं। नाटक से दर्शक की समझ विकसित होती है। हमारी सांस्कृतिक पहचान भारतीय भाषाओं से हैं। सभी भाषाओं का सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति की संवाहक भारतीय भाषाएं ही हैं। अध्यक्षता पत्रकार राकेश कुमार ने की। संचालन करते हुए शिब्ली कालेज की छात्रा ने अफीफा नाज ने किया।
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सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा विषय पर हुई कार्यशाला
सड़क सुरक्षा विषय पर कार्यशाला में बच्चों ने सीखा कि जब सड़क के नियमों को व्यवहार में लायेंगें तभी सड़क दुर्घटना से निजात मिलेगी। बच्चों ने वाद विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से सड़क के नियमों को जाना साथ ही शपथ लिये कि हम जब भी वाहन चलायेंगें सड़क के नियमों का पालन अवश्य करेंगें। कार्यशाला का संचालन करते हुए विकल्प रंजन ने कहा कि सड़क के जो भी नियम सरकार द्वारा बनाये जाते हैं वो हमारे भले के लिए होते है। इसलिए सड़क सुरक्षा को नारे के रूप में नहीं जीवन जीने का तरीका है।
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23 नवम्बर को होगा पुस्तक मेले का समापन समारोह
जिलाधिकारी राजेश कुमार की पहल संस्कृति मंत्रालय से दास्ताने गोई मुल्ला नसरूद्दीन के किस्से की प्रस्तुति- थियेटर इन एजुकेशन के जत्था द्वारा प्रख्यात निर्देशक अब्दुल लतीफ खटाना के द्वारा किया जाएगा।
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शिब्ली कॉलेज के पुस्तक मेले में कला व रंगमंच पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। प्रदर्शनकारी कलाएं और जन सामान्य का समकालीन समय से साक्षात्कार कराती हैं। यह बात अनीस आजमी ने कही। वह
उत्तर प्रदेश संस्कृृति विभाग, वन विभाग, जिला प्रशासन और नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित 22वें आजमगढ़ पुस्तक मेले के छठवें दिन ‘कला और रंगमंच की दुनिया’ विषय पर चर्चा कर रहे थे। वर्चुअल माध्यम से हिस्सेदारी करते हुए कहा कि रंगमंच जोड़ना सिखाता है।
अनीस आजमी ने कहा कि कला जीवन से जुड़ी होती है। इससे हम खुद से अलग नहीं कर सकते। अलग-अलग दौर में नाटक होते रहे हैं। समाज की अच्छे और खराब दोनों रूपों को सामने लाते रहे हैं। थियेटर हमें लोगों से जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। एक विद्यार्थी के सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में राजनिति से थियेटर को कोई संकट नहीं है। रंगमंच हमेशा सच को सामने लाता है और वह जनता की भावनाओं को प्रकट करता है। हम बड़ी से बड़ी बात को इसके जरिए आसानी से कह जाते हैं। उन्होंने शेक्सपीयर के हवाले से कहा है जीवन एक रंगमच है, हम इसमें अपनी भूमिका निभाते हैं। नाटक से दर्शक की समझ विकसित होती है। हमारी सांस्कृतिक पहचान भारतीय भाषाओं से हैं। सभी भाषाओं का सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति की संवाहक भारतीय भाषाएं ही हैं। अध्यक्षता पत्रकार राकेश कुमार ने की। संचालन करते हुए शिब्ली कालेज की छात्रा ने अफीफा नाज ने किया।
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सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा विषय पर हुई कार्यशाला
सड़क सुरक्षा विषय पर कार्यशाला में बच्चों ने सीखा कि जब सड़क के नियमों को व्यवहार में लायेंगें तभी सड़क दुर्घटना से निजात मिलेगी। बच्चों ने वाद विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से सड़क के नियमों को जाना साथ ही शपथ लिये कि हम जब भी वाहन चलायेंगें सड़क के नियमों का पालन अवश्य करेंगें। कार्यशाला का संचालन करते हुए विकल्प रंजन ने कहा कि सड़क के जो भी नियम सरकार द्वारा बनाये जाते हैं वो हमारे भले के लिए होते है। इसलिए सड़क सुरक्षा को नारे के रूप में नहीं जीवन जीने का तरीका है।
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23 नवम्बर को होगा पुस्तक मेले का समापन समारोह
जिलाधिकारी राजेश कुमार की पहल संस्कृति मंत्रालय से दास्ताने गोई मुल्ला नसरूद्दीन के किस्से की प्रस्तुति- थियेटर इन एजुकेशन के जत्था द्वारा प्रख्यात निर्देशक अब्दुल लतीफ खटाना के द्वारा किया जाएगा।