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सियासत के फेर में नहीं बन सकी परशुरामपुर तहसील, लंबे समय से उठ रही मांग

Thu, 20 Jan 2022 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jan 2022 11:12 PM IST
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Parshurampur tehsil could not be made in favor of politics, demand has been rising for a long time
गोपालपुर विधानसभा के परशुरामपुर गांव को तहसील बनाने का सपना कब साकार होगा, इसका इंतजार यहां के मतदाताओं को आज भी है। बताया जा रहा है कि राजनीतिक दलों ने परशुरामपुर को तहसील बनाने के नाम पर बीते 13 साल से सिर्फ सियासत की। हालांकि भाजपा की सरकार में तहसील बनाने की कवायद तेज हुई लेकिन फिर से सियासत के फेर में उलझकर रह गई। तहसील बनाने की मांग को लेकर लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
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सगड़ी तहसील की गिनती जिले में सबसे बड़ी तहसील में होती है। इसका क्षेत्रफल 881 वर्ग किमी है। करीब 10 लाख से अधिक इसकी आबादी है। इस तहसील से कुल 973 गांव जुड़े हुए हैं। तहसील पर काम पड़ने पर 20 से 22 किमी की दूरी तय कर लोगों को आना पड़ता है। ऐसे में जनता की मांग और जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर परशुरामपुर को नई तहसील बनाने का प्रस्ताव अप्रैल 2008 में तैयार कर शासन को भेजा गया था। प्रस्ताव में तहसील सगड़ी के कुल 973 गांवों में 515 गांव सगड़ी और 458 गांव प्रस्तावित नई तहसील परशुरामपुर में शामिल करने का उल्लेख किया गया था। नई तहसील बनाने के लिए बूढ़नपुर तहसील के 25 लेखपाल क्षेत्र वाले गांव को शामिल किया जाना था। वर्ष 2019 में इसकी कवायद तेज हुई। बूढ़नपुर के 25 लेखपाल क्षेत्र वाले गांवों को जोड़ने की कवायद शुरू हुई। इसे लेकर बूढ़नपुर तहसील के अधिवक्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद कार्रवाई की रफ्तार धीमी हो गई। धीरे-धीरे परशुरामपुर को नई तहसील बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।
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