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Azamgarh News: पुलिस हिरासत में माैत मामले में 10 लाख का मुआवजा देने का आदेश

Wed, 17 Dec 2025 12:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 12:53 AM IST
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Order to pay compensation of Rs 10 lakh in case of death in police custody
24 जियाउद्दीन। संवाद
अंबारी। आंबेडकरनगर में वर्ष 2021 में हुई जियाउद्दीन की संदिग्ध हालत में पुलिस हिरासत में मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने राज्य के गृह सचिव को आदेश दिया है कि मृतक के परिजनों को दो महीने के भीतर मुआवजे का भुगतान किया जाए। भुगतान से संबंधित प्रमाण आयोग को उपलब्ध कराया जाए।
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पवई थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव के रहने वाले जियाउद्दीन को मार्च 2021 में आंबेडकरनगर नगर पुलिस ने डकैती में शामिल होने के शक के आधार पर हिरासत में लिया था। अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। परिजनों ने शव पर गंभीर चोटों के निशान होने का आरोप लगाते हुए पुलिस पिटाई से मौत का आरोप लगाया था। इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई और आठ पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया।
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इनसेट
2022 में पुलिस ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया
वर्ष 2022 में पुलिस ने अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल की। जियाउद्दीन की मौत का कारण “हार्ट अटैक” बताया। आरोपी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी। मृतक के परिजनों ने इस रिपोर्ट का विरोध किया। इसके बाद वर्ष 2024 में अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को “अधूरी और गलत” मानते हुए खारिज कर दिया। मामले की दोबारा डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच करने का आदेश दिया। अभी भी मामले की जांच चल रही है।इनसेट
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30 मार्च को मृतक के भाई ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई
इस प्रकरण में मृतक जियाउद्दीन के भाई शहाबुद्दीन ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता के माध्यम से 30 मार्च को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने विस्तृत जांच कराई। लंबी जांच के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि जियाउद्दीन को पुलिस कर्मी थाने लाए थे। इसमें कोई संदेह नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक जियाउद्दीन के शरीर पर आठ चोटें पाई गईं, इनके संबंध में पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। आयोग ने कहा कि पुलिस यह स्पष्ट करने में असफल रही कि ये चोटें कब और कैसे लगीं। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्य पर पुलिस मौन है कि हिरासत के दौरान चोटें कैसे आईं। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि मौत पुलिस हिरासत में नहीं हुई। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस ने गलती छिपाने के लिए भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मुआवजे के आदेश का पालन न होने की स्थिति में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। जियाउद्दीन पवई थाना क्षेत्र के हाजीपुर गांव का रहने वाला था। मृतक के भाई शहाबुद्दीन ने बताया कि पुलिस की प्रताड़ना के कारण ही भाई की मौत हुई थी।
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