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Azamgarh News: जिस रूट पर जांच करने निकलती है आरटीओ टीम, चालकों को पहले ही मिल जाती व्हाट्सएप पर जानकारी

Thu, 04 Jun 2026 12:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:11 AM IST
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On the route where the RTO team goes out to check, drivers already receive information on WhatsApp
चालकों ने बनाए अलग-अलग ग्रुप में लोकेशन हो रही सेंड। संवाद
आजमगढ़।
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ओवरलोड वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान की मुखबीरी वाट्सएप ग्रुप से हो रही है। जिले में ट्रक और बस चालकों के अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुपों पर एआरटीओ की चेकिंग टीमों का लोकेशन साझा करके चालकों को अलर्ट किया जाता है। सभी भाइयों से अनुरोध है कि अभी लखनऊ की टीम जिले में ही है, आप लोग सतर्क रहे...। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालक इस संदेश के आते ही कार्रवाई से बचने के लिए या तो रास्ता बदल लेते हैं या फिर किसी ढाबे पर वाहन खड़ा करके कुछ देर आराम करते हैं। अमर उजाला की टीम ने जब हकीकत जानने का प्रयास किया तो पता चला कि जिले में एक नहीं बल्कि कई वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। इसके अलग-अलग नाम हैं। आरटीओ भंवरनाथ आजमगढ़ लोकेशन ग्रुप, ट्रांसपोर्ट आजमगढ़ ग्रुप, ट्रक चालक ग्रुप, ट्रांसपोर्ट ग्रुप के नाम ये संचालित होते हैं। इस ग्रुप में चेकिंग स्थलों की लोकेशन, टीमों की गतिविधियों की जानकारी साझा की जाती है। एक ग्रुप आरटीओ भंवरनाथ आजमगढ़ लोकेशन ग्रुप में भंवरनाथ पर हो रही जांच की लोकेशन डाली गई थी। ग्रुप में इस मेसेज को प्रसारित करके अन्य वाहन चालकों को सतर्क किया जा रहा है ताकि वह कार्रवाई से बच सकें।
नए रास्ते की जानकारी भी वाट्सएप ग्रुप में होती है साझा
व्हाट्सएप ग्रुप में जांच होने की जानकारी मिलते ही ओवरलोड वाहन चालक, बिना परमिट संचालित वाहन और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों को ग्रुप में नए रास्तों की जानकारी दी जाती है। इसके बाद ये वाहन चालक अपना रास्ता बदल लेते हैं। या फिर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करके कार्रवाई से बचकर निकल जाते हैं। इससे परिवहन विभाग का अभियान जोर नहीं पकड़ रहा है।
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टाइपिंग से ज्यादा वॉयस मैसेज का हो रहा इस्तेमाल
चेकिंग टीमों की लोकेशन साझा करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों में लिखित संदेशों की अपेक्षा वॉयस रिकॉर्डिंग का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। वाहन चालक और संचालक कुछ सेकेंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजकर चेकिंग स्थल, टीम की संख्या और उनकी गतिविधियों की जानकारी एक-दूसरे तक पहुंचा रहे हैं। वॉयस मैसेज के जरिए सूचना तेजी से प्रसारित होने के साथ ही स्थानीय भाषा और बोली में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो जाती है। कई ग्रुपों में लगातार ऑडियो संदेश प्रसारित करके वाहन चालकों को सतर्क रहने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी जाती है।
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उठ रहे अहम सवाल
- क्या एआरटीओ और प्रवर्तन टीमों की लोकेशन लीक होने से सरकारी कार्रवाई की गोपनीयता भंग हो रही है।
- जब खुलेआम चेकिंग स्थलों की जानकारी साझा की जा रही है तो ऐसे ग्रुपों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
- लोकेशन मिलने के बाद रास्ता बदलने वाले वाहनों की निगरानी और धरपकड़ के लिए क्या वैकल्पिक रणनीति तैयार की गई है।
- परिवहन विभाग और पुलिस ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उनके संचालकों तक कब पहुंचेगी।
- यदि कार्रवाई से बचने के लिए संगठित तरीके से सूचनाओं का आदान-प्रदान हो रहा है, तो क्या यह कानून के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
- जिले में सक्रिय ऐसे व्हाट्सएप ग्रुपों की संख्या कितनी है और इनमें कितने वाहन संचालक जुड़े हैं।
- चेकिंग की जानकारी वायरल होने के बाद भी ओवरलोड और बिना परमिट वाहनों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है।

चेकिंग टीमों की लोकेशन वायरल होते ही ओवरलोड और बिना परमिट संचालित वाहनों के चालक सतर्क हो जाते हैं। कई चालक निर्धारित मार्ग छोड़कर वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ वाहन चेकिंग अभियान खत्म होने तक ढाबों, पेट्रोल पंपों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर खड़े कर दिए जाते हैं। इस तरह चालक कार्रवाई से बच निकलते हैं, जिससे परिवहन विभाग के प्रवर्तन अभियान का अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इस पर मंथन किया जा रहा कि इस मामले से कैसे निपटा जाए।- अतुल कुमार यादव, एआरटीओ प्रवर्तन आजमगढ़।
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