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Azamgarh News: अधिकारियों को पता ही नहीं कौन चला रहा है अंतरजातीय विवाह योजना
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आजमगढ़। अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर 5 लाख की सहायता राशि देती हैं। यूपी में 2013 से यह योजना लागू है। इसके लिए हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के अनुसार शादी को रजिस्टर करना होगा।
लड़की या लड़का में से कोई एक दलित समुदाय से होना चाहिए। इस योजना को लागू हुए लगभग 12 साल हो गए अभी तक जिले के जिम्मेदारों को यह भी नहीं मालूम कि इस योजना का संचालन कहां से होता है। ऐसे में अंतरजातीय विवाह की बात ही दूर है।
सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित किया जाता है। इस योजना के तहत पति-पत्नी दोनों भारत के नागरिक होने चाहिए और पति-पत्नी में से एक अनुसूचित जाति का होना चाहिए तथा वह राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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विवाहित जोड़े को प्रोत्साहन के केंद्र व राज्य सरकार की ओर से पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। साथ ही डॉक्टर भीमराव अंबेडकर फंड के तहत 2.5 लाख रुपए की राशि भी देने का प्रावधान है।
ताकि नई शादी के बाद जोड़े को किसी भी तरह की आर्थिक दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। इस योजना को लागू हुए लगभग 12 साल हो गए हैं। लेकिन समाज कल्याण विभाग हो या फिर जिला प्रोबेशन कार्यालय दोनों विभागों के अधिकारियों को यह नहीं मालूम की इस योजना का संचालन कहा से होता है। ऐसे में इस योजना का लाभ कितने लोगों को मिला होगा इस बात की कल्पना करना भी बेमानी है।
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लड़की या लड़का में से कोई एक दलित समुदाय से होना चाहिए। इस योजना को लागू हुए लगभग 12 साल हो गए अभी तक जिले के जिम्मेदारों को यह भी नहीं मालूम कि इस योजना का संचालन कहां से होता है। ऐसे में अंतरजातीय विवाह की बात ही दूर है।
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सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित किया जाता है। इस योजना के तहत पति-पत्नी दोनों भारत के नागरिक होने चाहिए और पति-पत्नी में से एक अनुसूचित जाति का होना चाहिए तथा वह राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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विवाहित जोड़े को प्रोत्साहन के केंद्र व राज्य सरकार की ओर से पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। साथ ही डॉक्टर भीमराव अंबेडकर फंड के तहत 2.5 लाख रुपए की राशि भी देने का प्रावधान है।
ताकि नई शादी के बाद जोड़े को किसी भी तरह की आर्थिक दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। इस योजना को लागू हुए लगभग 12 साल हो गए हैं। लेकिन समाज कल्याण विभाग हो या फिर जिला प्रोबेशन कार्यालय दोनों विभागों के अधिकारियों को यह नहीं मालूम की इस योजना का संचालन कहा से होता है। ऐसे में इस योजना का लाभ कितने लोगों को मिला होगा इस बात की कल्पना करना भी बेमानी है।