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Azamgarh News: बंटवारा के समय पाकिस्तान जाने का ताउम्र रहा पछतावा
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अंबारी। फूलपुर तहसील क्षेत्र के कुसहा गांव में पाकिस्तानी नागरिक अनीश आजमी की 95 वर्ष की उम्र में रविवार को निधन हो गया। वे बीजा पर पिछले 18 वर्षों से अपने पैतृक गांव में रह रहे थे। बंटवारा के समय पाकिस्तान जाने का उन्हें ताउम्र पछतावा रहा। इस दर्द को वे अक्सर लोगों से साझा करते रहते थे। उनकी माने तो पाकिस्तान में रहने लायक नहीं है। वहां का हालात बहुत ही खराब है।
अनीश आजमी पुत्र फैजुल हसन हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे के समय 1951 में कुछ रिश्तेदारों के साथ पाकिस्तान चले गए। वहां जाने के बाद उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता मिल गई थी। वहां पर निजी स्कूल में शिक्षण कार्य कर जीवन यापन करते थे। वहां रहते हुए ही उनकी शादी यहां पर हुई थी। उनके पास दो बेटे मो. राशिद और मो. शाहिद हैं। परिवार के लोगों के पाकिस्तान न जाने पर बीजा पर 2005 में यहां आकर अपने परिवार के साथ रहने लगे थे। अनीश, सफीक व रफीक तीन सगे भाइयों में अनीश सबसे बड़े थे। परिवार के लोगों ने बताया कि जब दोनों देशों के हालात सही रहते थे तो वह आते थे। वे कहते थे कि पाकिस्तान के हालात बहुत ही खराब हैं। नासमझी के चलते पाकिस्तान चला गया था। उस समय लाहौर में रंगून से डाक से अखबार आता था। कुछ समय वे कतर भी रहे। वहां से आने में ज्यादा आसानी होती थी। अनीश की मौत की सूचना पर एलआईयू के लोग भी मौके पर पहुंचे थे।
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अनीश आजमी पुत्र फैजुल हसन हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे के समय 1951 में कुछ रिश्तेदारों के साथ पाकिस्तान चले गए। वहां जाने के बाद उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता मिल गई थी। वहां पर निजी स्कूल में शिक्षण कार्य कर जीवन यापन करते थे। वहां रहते हुए ही उनकी शादी यहां पर हुई थी। उनके पास दो बेटे मो. राशिद और मो. शाहिद हैं। परिवार के लोगों के पाकिस्तान न जाने पर बीजा पर 2005 में यहां आकर अपने परिवार के साथ रहने लगे थे। अनीश, सफीक व रफीक तीन सगे भाइयों में अनीश सबसे बड़े थे। परिवार के लोगों ने बताया कि जब दोनों देशों के हालात सही रहते थे तो वह आते थे। वे कहते थे कि पाकिस्तान के हालात बहुत ही खराब हैं। नासमझी के चलते पाकिस्तान चला गया था। उस समय लाहौर में रंगून से डाक से अखबार आता था। कुछ समय वे कतर भी रहे। वहां से आने में ज्यादा आसानी होती थी। अनीश की मौत की सूचना पर एलआईयू के लोग भी मौके पर पहुंचे थे।
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