{"_id":"66e5e97205e48378ae0fcf09","slug":"musahar-basti-road-not-left-in-consolidation-azamgarh-news-c-258-1-svns1001-120632-2024-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: चकबंदी में नहीं छोड़ा मुसहर बस्ती का रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: चकबंदी में नहीं छोड़ा मुसहर बस्ती का रास्ता
विज्ञापन
अमिलो। जहानागंज-सठियांव मार्ग पर ग्राम पंचायत महुआ मुरारपुर में शनिवार को चौपाल में ज्वांइट मजिस्ट्रेट सदर सुनील कुमार धनवंता ने फरियाद सुनीं। उन्होंने मौके पर पहुंचकर लोगों की समस्या देखी और उसके निराकरण का आश्वासन दिया। इस दौरान महुआ मुरापुर से आए एक फरीयादी ने बताया कि गांव में चकबंदी तो हुई, लेकिन मुसहर बस्ती का रास्ता ही चकबंदी में नहीं छोड़ा गया।
सदर तहसील के जहानगंज क्षेत्र के महुआ मुरारपुर में चकबंदी विभाग की मनमानी कार्यशैली से ग्रामीण का चक आबादी भूमि में और आबादी के भूमि को चक में परिवर्तित करने के साथ रास्ते भी इधर उधर किए गए हैं। मुसहर बस्ती का रास्ता ही नहीं छोड़ा गया है। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था।
चौपाल में ग्रामीण सुदर्शन यादव ने कहा कि चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन में न आकर रात में आते थे। ग्रामीण मानेंद्र सिंह ने बताया कि चकरोड की भी चकबंदी करके चक में शामिल कर दिया गया है। सड़क के पास जहां मकान बना हुआ है, वहां कास्तकारी दर्ज कर दी गई है। सन 1961 से मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वादी अब नहीं रहे। उनकी मृत्यु हो गई। इससे मामला और उलझ गया है। जहां 50 वर्षों से रोड पर मकान दुकान आबाद है। वहां भी किसी का चक लगा दिया गया है। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सदर तहसील के जहानगंज क्षेत्र के महुआ मुरारपुर में चकबंदी विभाग की मनमानी कार्यशैली से ग्रामीण का चक आबादी भूमि में और आबादी के भूमि को चक में परिवर्तित करने के साथ रास्ते भी इधर उधर किए गए हैं। मुसहर बस्ती का रास्ता ही नहीं छोड़ा गया है। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था।
विज्ञापन
चौपाल में ग्रामीण सुदर्शन यादव ने कहा कि चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन में न आकर रात में आते थे। ग्रामीण मानेंद्र सिंह ने बताया कि चकरोड की भी चकबंदी करके चक में शामिल कर दिया गया है। सड़क के पास जहां मकान बना हुआ है, वहां कास्तकारी दर्ज कर दी गई है। सन 1961 से मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वादी अब नहीं रहे। उनकी मृत्यु हो गई। इससे मामला और उलझ गया है। जहां 50 वर्षों से रोड पर मकान दुकान आबाद है। वहां भी किसी का चक लगा दिया गया है। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
विज्ञापन