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अगर पट्टीदार यादव तो ‘मृतक‘ कैसे एससी
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Wed, 07 Mar 2018 12:03 AM IST
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Lal Bihari Mritak
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प्रशासन के गले की फांस बन चुके लाल बिहारी मृतक के अभिलेखों की जांच में जिला प्रशासन जुटा है। इस मामले में नित नए तथ्य सामने आ रहे हैं। मामले की जांच के दौरान पता चला है कि खलीलाबाद में लालबिहारी कुछ अभिलेखों में यादव हैं और कई में खुद को एससी बताते हैं। प्रशासन अब इसकी जांच में जुटा हुआ है।
वर्ष 1994 में सीआरओ कोर्ट से हुआ एक फैसला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बना हुआ है। काफी दिनों पहले बंद हुए मामले में लालबिहारी ‘मृतक’ ने 25 करोड़ का मुआवजा मांगकर फिर से हवा दे दी है। हाईकोर्ट ने शासन से इस संबंध में जवाब मांगकर प्रशासन के हाथ पांव फूला दिए हैं। सोमवार को प्रशासन ने मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील से रजिस्ट्री के उन अभिलेखों को मंगाया जिसके जरिए जमीन की खरीद और बिक्री की गई थी।
इसी क्रम में जिला प्रशासन निजामाबाद तहसील के मिर्जापुर ब्लाक के खलीलाबाद गांव स्थित उनके पूर्वजों का इतिहास खंगालने में भी लगा हुआ है। इन्हीं अभिलेखों की जांच में प्रशासन को एक अभिलेख मिला है, जिसमें लालबिहारी के नाम के आगे यादव दर्ज है, जबकि लाल बिहारी खुद को एससी बताते हैं।
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इसी कोटे के तहत उन्होंने अपने बेटे के नाम पर गैस एजेंसी भी ले रखी है। इन अभिलेखों ने प्रशासन को भी परेशान कर रखा है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। फिलहाल जिला प्रशासन 13 मार्च से पूर्व हाईकोर्ट में शपथ पत्र देने की तैयारी में है।
प्रशासन जो चाहे कहे मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है। यदि उसके पास कुछ है तो साबित करे। क्योंकि जो बात वह कहेंगे उसे उन्हें साक्ष्य के साथ अदालत में रखना होगा। वैसे कोई मुझे यादव, कोई पंडित कहता है लेकिन मैं एससी हूं। -लालबिहारी मृतक।
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वर्ष 1994 में सीआरओ कोर्ट से हुआ एक फैसला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बना हुआ है। काफी दिनों पहले बंद हुए मामले में लालबिहारी ‘मृतक’ ने 25 करोड़ का मुआवजा मांगकर फिर से हवा दे दी है। हाईकोर्ट ने शासन से इस संबंध में जवाब मांगकर प्रशासन के हाथ पांव फूला दिए हैं। सोमवार को प्रशासन ने मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील से रजिस्ट्री के उन अभिलेखों को मंगाया जिसके जरिए जमीन की खरीद और बिक्री की गई थी।
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इसी क्रम में जिला प्रशासन निजामाबाद तहसील के मिर्जापुर ब्लाक के खलीलाबाद गांव स्थित उनके पूर्वजों का इतिहास खंगालने में भी लगा हुआ है। इन्हीं अभिलेखों की जांच में प्रशासन को एक अभिलेख मिला है, जिसमें लालबिहारी के नाम के आगे यादव दर्ज है, जबकि लाल बिहारी खुद को एससी बताते हैं।
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इसी कोटे के तहत उन्होंने अपने बेटे के नाम पर गैस एजेंसी भी ले रखी है। इन अभिलेखों ने प्रशासन को भी परेशान कर रखा है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। फिलहाल जिला प्रशासन 13 मार्च से पूर्व हाईकोर्ट में शपथ पत्र देने की तैयारी में है।
प्रशासन जो चाहे कहे मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है। यदि उसके पास कुछ है तो साबित करे। क्योंकि जो बात वह कहेंगे उसे उन्हें साक्ष्य के साथ अदालत में रखना होगा। वैसे कोई मुझे यादव, कोई पंडित कहता है लेकिन मैं एससी हूं। -लालबिहारी मृतक।