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Azamgarh News: विश्वविद्यालय में मां-बेटी सम्मेलन का शुभारंभ
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मां बेटी सम्मेलन में छात्राओं को जानकाकरी देते कुलपति प्रो. संजीव कुमार।
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के अनुपालन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार के मार्गदर्शन में ‘मां-बेटी सम्मेलन’ का प्रथम दिवस शुक्रवार को विश्वविद्यालय के फैसिलिटी सेंटर में आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य मां और बेटी के बीच स्वस्थ संवाद को बढ़ावा देना तथा समाज को सशक्त बनाने की नींव रखना है। इस दौरान 100 छात्राओं के स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया गया।
कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मां और बेटी के बीच स्वस्थ संवाद, जागरूकता और विश्वास ही समाज को सशक्त बनाने की आधारशिला है। विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास और स्वास्थ्य के प्रति भी प्रतिबद्ध है।
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सम्मेलन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. रजनी त्रिपाठी, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, ने कहा कि महिलाओं और किशोरियों का स्वास्थ्य न केवल व्यक्तिगत, बल्कि पूरे समाज की उन्नति का आधार है।
उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता, संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव और एचपीवी टीकाकरण जैसी छोटी-छोटी जागरूकताओं के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम की संभावनाओं पर जोर दिया।
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ने कहा कि किशोरावस्था से ही बेटियों को अपने शरीर, पोषण और स्वच्छता के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए, जिसमें मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
डॉ. स्नेहा सेठ, क्लिनिकल एवं पारिवारिक मनोवैज्ञानिक, ने आज की पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर बात की। परामर्श सत्र में भावनात्मक संतुलन, आत्म-सम्मान और सकारात्मक सोच के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतंभरा ने किया। छात्राओं, माताओं और शिक्षिकाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
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इस सम्मेलन का उद्देश्य मां और बेटी के बीच स्वस्थ संवाद को बढ़ावा देना तथा समाज को सशक्त बनाने की नींव रखना है। इस दौरान 100 छात्राओं के स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया गया।
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कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मां और बेटी के बीच स्वस्थ संवाद, जागरूकता और विश्वास ही समाज को सशक्त बनाने की आधारशिला है। विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास और स्वास्थ्य के प्रति भी प्रतिबद्ध है।
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सम्मेलन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. रजनी त्रिपाठी, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, ने कहा कि महिलाओं और किशोरियों का स्वास्थ्य न केवल व्यक्तिगत, बल्कि पूरे समाज की उन्नति का आधार है।
उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता, संतुलित आहार, एनीमिया से बचाव और एचपीवी टीकाकरण जैसी छोटी-छोटी जागरूकताओं के माध्यम से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम की संभावनाओं पर जोर दिया।
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ने कहा कि किशोरावस्था से ही बेटियों को अपने शरीर, पोषण और स्वच्छता के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए, जिसमें मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
डॉ. स्नेहा सेठ, क्लिनिकल एवं पारिवारिक मनोवैज्ञानिक, ने आज की पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर बात की। परामर्श सत्र में भावनात्मक संतुलन, आत्म-सम्मान और सकारात्मक सोच के व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋतंभरा ने किया। छात्राओं, माताओं और शिक्षिकाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।