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महीनों से सुलग रही थी नफरत की चिंगारी
ब्यूरो/ अमर उजाला /आजमगढ़
Updated Mon, 16 May 2016 11:16 PM IST
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उपद्रव के बाद खुदादादपुर और सरायमीर मार्ग पर पसरा सन्नाटा।
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निजामाबाद थाने के खुदादादपुर गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक घटना के पीछे कारण चाहे जो भी बताया जा रहा हो, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनातनी काफी दिनों से चल रही थी। दोनो समुदायों में जब-जब विवाद हुआ तो पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई के बजाय मामले को दबाने का ही प्रयास किया। इसी का नतीजा है कि फरिहा से सरायमीर तक इलाका बीते तीन दिनों से लगातार सुलगता रहा। मामले में ठोस कार्रवाई पहले ही की गई होती तो शायद माहौल इतना खराब नहीं होता।
पहले के चर्चित मामलों पर गौर करें तो खुदादादपुर गांव में 22 मार्च को होली के दिन रंग लगाने की बात पर दो समुदायों के बीच मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस मामले में पुलिस और पीड़ितों की तरफ से करीब दो सौ लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। संगीन धाराओं में रिपोर्ट तो दर्ज हो गई लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। यहीं से एक समुदाय के लोगों का हौसला बढ़ा और टकराव शुरू हो गया। इसके बाद 22 अप्रैल को मुबारकपुर कस्बे में धार्मिक वाक्य लिखे कागज के टुकड़े से बना दोना मिलने पर एक समुदाय के लोग भड़क उठे और पालिका कार्यालय सहित कई घरों में तोड़फोड़, आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।
इस मामले में 670 लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई लेकिन आरोपी पकड़ से दूर रहे। घटना की जांच एसटीएफ वाराणसी को सौंपी गई। लेकिन अभी तक मुख्य आरोपी पकड़ से दूर हैं। यह मामला शांत भी नहीं हो सका कि तीन मई को खुदादादपुर गांव में और पवई थाने के रज्जाकपुर गांव में मामूली सी बात पर विवाद भड़क गया। पुलिस ने एक साथ हुई दोनों घटनाओं पर तात्कालिक रूप से विराम तो लगा दिया था। लेकिन मूलजड़ तक नहीं पहुंच सकी। उसकी इसी निष्क्रियता और राजनैतिक दवाब का परिणाम खुदादादपुर गांव की घटना के रूप में सामने आया है। इसको लेकर क्षेत्र के हर वर्ग के लोगों में आक्रोश दिखा।
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पहले के चर्चित मामलों पर गौर करें तो खुदादादपुर गांव में 22 मार्च को होली के दिन रंग लगाने की बात पर दो समुदायों के बीच मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस मामले में पुलिस और पीड़ितों की तरफ से करीब दो सौ लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। संगीन धाराओं में रिपोर्ट तो दर्ज हो गई लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। यहीं से एक समुदाय के लोगों का हौसला बढ़ा और टकराव शुरू हो गया। इसके बाद 22 अप्रैल को मुबारकपुर कस्बे में धार्मिक वाक्य लिखे कागज के टुकड़े से बना दोना मिलने पर एक समुदाय के लोग भड़क उठे और पालिका कार्यालय सहित कई घरों में तोड़फोड़, आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।
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इस मामले में 670 लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई लेकिन आरोपी पकड़ से दूर रहे। घटना की जांच एसटीएफ वाराणसी को सौंपी गई। लेकिन अभी तक मुख्य आरोपी पकड़ से दूर हैं। यह मामला शांत भी नहीं हो सका कि तीन मई को खुदादादपुर गांव में और पवई थाने के रज्जाकपुर गांव में मामूली सी बात पर विवाद भड़क गया। पुलिस ने एक साथ हुई दोनों घटनाओं पर तात्कालिक रूप से विराम तो लगा दिया था। लेकिन मूलजड़ तक नहीं पहुंच सकी। उसकी इसी निष्क्रियता और राजनैतिक दवाब का परिणाम खुदादादपुर गांव की घटना के रूप में सामने आया है। इसको लेकर क्षेत्र के हर वर्ग के लोगों में आक्रोश दिखा।
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