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जैसे इतनी रकम थोड़ी और जुगाड़ लेंगे ... सभी ने किया हज यात्रा पर सब्सिडी खत्म करने का स्वागत
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:45 AM IST
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हज
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केंद्र सरकार द्वारा हज सब्सिडी समाप्त किए जाने पर हज यात्रियों पर पड़ने वाले असर पर हज यात्रियों, हज सेवा समिति और उलेमाओं ने बेबाक राय रखी है। एक सुर में सभी ने हज यात्रा में मिलने वाली सब्सिडी खत्म करने का स्वागत किया।
कहा कि हज सब्सिडी के नाम पर एअर इंडिया को फायदा पहुंचाया जा रहा था। हज पर जाने वाले जैसे रकम की व्यवस्था करते हैं उसपर थोड़ा बोझ और सह लेंगे। लेकिन अच्छा हुआ कि धार्मिक यात्रा से सब्सिडी का भार उतर गया।
हज सेवा समिति के सदस्य और जिला हज ट्रेनर सलीम अहमद ने केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि हज सब्सिडी के नाम पर एअर इंडिया को फायदा पहुंचाया जा रहा था।
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पिछले साल हाजियों का रिटर्न किराया 68 हजार लिया गया जिसमें लगभग 12000 सब्सिडी दी गई थी। अगर सब्सिडी समाप्त कर देखा जाए तो किराया 80 हजार होगा। लेकिन इस वर्ष लखनऊ हज समिति ने 82 हजार किराया लिया है।
जिसमें सब्सिडी शामिल है कि नहीं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। वैसे भी हज यात्रियों से सब्सिडी के नाम पर मनमाना किराया लिया जाता था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आफताब आलम ने 2012 में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि 2022 तक सब्सिडी को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया जाए।
लेकिन एअर इंडिया को डूबते हुए देखकर इसे 2018 में ही समाप्त कर दिया गया।
शहर इमाम मौलाना इंतेखाब आलम कासमी ने केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी को समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि हज सेवा समिति पहले से ही सब्सिडी समाप्त किए जाने की मांग कर रही थी।
समिति हाजियों को ले आने और ले जाने के लिए इंटरनेशनल ग्लोबल टेंडर कराए जाने की भी मांग करती चली आ रही है, ताकि पारदर्शिता के साथ काम हो और मनमाने किराए पर रोक लग सके।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष तीन लाख 55 हजार लोगों ने हज फार्म भरे है। जिसमें तीन सौ रुपया फार्म का बढ़ाकर लिया गया था। इस प्रकार सरकार को साढ़े दस हजार करोड़ का फायदा हुआ है। इतना ही फायदा सरकार को प्रति वर्ष होता रहा है।
हज यात्रा पर जाने वाले रहमत अली रहमानी ने कहा कि सरकार को तो किसी भी धार्मिक यात्रा पर सब्सिडी नहीं देना चाहिए। हज यात्रियों ने कभी भी सरकार से सब्सिडी दिए जाने की मांग नहीं किया।
वो जैसे हज यात्रा की रकम का इंतजाम करता है वैसे ही कुछ और हजार का इंतजाम कर लेगा। लेकिन अब ऐसा ही कदम उठाते हुए मानसरोवर यात्रा के लिए दिए जा रहे डेढ़ लाख की सहायता को भी समाप्त कर देनी चाहिए।
अधिवक्ता हामिद अली ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आफताब आलम ने 2012 में केंद्र सरकार को 2022 तक धीरे-धीरे हज सब्सिडी को समाप्त करने का आदेश दिया था तो फिर सरकार 2018 में ही हज सब्सिडी को समाप्त कर क्या साबित करना चाह रही है, ये जरूर सोचने वाली बात है। क्या इसे 2019 के चुनाव के मद्देनजर उठाया कदम समझा जाए।
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कहा कि हज सब्सिडी के नाम पर एअर इंडिया को फायदा पहुंचाया जा रहा था। हज पर जाने वाले जैसे रकम की व्यवस्था करते हैं उसपर थोड़ा बोझ और सह लेंगे। लेकिन अच्छा हुआ कि धार्मिक यात्रा से सब्सिडी का भार उतर गया।
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हज सेवा समिति के सदस्य और जिला हज ट्रेनर सलीम अहमद ने केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि हज सब्सिडी के नाम पर एअर इंडिया को फायदा पहुंचाया जा रहा था।
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पिछले साल हाजियों का रिटर्न किराया 68 हजार लिया गया जिसमें लगभग 12000 सब्सिडी दी गई थी। अगर सब्सिडी समाप्त कर देखा जाए तो किराया 80 हजार होगा। लेकिन इस वर्ष लखनऊ हज समिति ने 82 हजार किराया लिया है।
जिसमें सब्सिडी शामिल है कि नहीं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। वैसे भी हज यात्रियों से सब्सिडी के नाम पर मनमाना किराया लिया जाता था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आफताब आलम ने 2012 में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि 2022 तक सब्सिडी को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया जाए।
लेकिन एअर इंडिया को डूबते हुए देखकर इसे 2018 में ही समाप्त कर दिया गया।
शहर इमाम मौलाना इंतेखाब आलम कासमी ने केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी को समाप्त किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि हज सेवा समिति पहले से ही सब्सिडी समाप्त किए जाने की मांग कर रही थी।
समिति हाजियों को ले आने और ले जाने के लिए इंटरनेशनल ग्लोबल टेंडर कराए जाने की भी मांग करती चली आ रही है, ताकि पारदर्शिता के साथ काम हो और मनमाने किराए पर रोक लग सके।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष तीन लाख 55 हजार लोगों ने हज फार्म भरे है। जिसमें तीन सौ रुपया फार्म का बढ़ाकर लिया गया था। इस प्रकार सरकार को साढ़े दस हजार करोड़ का फायदा हुआ है। इतना ही फायदा सरकार को प्रति वर्ष होता रहा है।
हज यात्रा पर जाने वाले रहमत अली रहमानी ने कहा कि सरकार को तो किसी भी धार्मिक यात्रा पर सब्सिडी नहीं देना चाहिए। हज यात्रियों ने कभी भी सरकार से सब्सिडी दिए जाने की मांग नहीं किया।
वो जैसे हज यात्रा की रकम का इंतजाम करता है वैसे ही कुछ और हजार का इंतजाम कर लेगा। लेकिन अब ऐसा ही कदम उठाते हुए मानसरोवर यात्रा के लिए दिए जा रहे डेढ़ लाख की सहायता को भी समाप्त कर देनी चाहिए।
अधिवक्ता हामिद अली ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आफताब आलम ने 2012 में केंद्र सरकार को 2022 तक धीरे-धीरे हज सब्सिडी को समाप्त करने का आदेश दिया था तो फिर सरकार 2018 में ही हज सब्सिडी को समाप्त कर क्या साबित करना चाह रही है, ये जरूर सोचने वाली बात है। क्या इसे 2019 के चुनाव के मद्देनजर उठाया कदम समझा जाए।