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गलत तरीके से भूमि पर नाम दर्ज करने में लेखपाल दोषी
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आजमगढ़। सदर तहसील के ग्राम फखरूद्दीनपुर में जनसुनवाई के दौरान भूमि पर गलत तरीके से नाम दर्ज करने की शिकायत की गई थी। डीएम एनपी सिंह ने बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी से प्रकरण की जांच कराई। जांच में तत्कालीन लेखपाल को दोषी पाया गया है। इसमें लेखपाल पर एफआईआर कराने के साथ ही एसडीएम सदर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने डीएम के निर्देश पर ग्राम फखरूद्दीनपुर के चकबंदी अभिलेखों की जांच की। आधार वर्ष खतौनी फसली 1411 से 1416 के खाता संख्या 50 में अंकित गाटा संख्या 424 की 0.350 हेक्टेयर जमीन पर कन्हई पुत्र सुखराज का नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर अंकित है। अमल दरामद आदेश राजस्व निरीक्षक मुबारकपुर जरिए 25 अक्टूबर 2004 के अनुसार खाते पर मृतक कन्हई के स्थान पर जयशंकर पुत्र कन्हई का नाम बतौर वारिस दर्ज किया गया है। अमल दरामद राजस्य लेखपाल श्रीकांत प्रसाद ने 25 अक्टूबर 2004 को किया है। तहसील सदर द्वारा चकबंदी विभाग को उपलब्ध कराई गई खतौनी फसली 1411 से 1416 में खाता संख्या 50 पर जयशंकर पुत्र कन्हई का नाम तन्हा दर्ज पाया गया। इसी आधार पर चकबंदी क्रियाओं के अंतर्गत तैयार किए गए अभिलेखों में जयशंकर का नाम विवादित भूमि पर तन्हा दर्ज किया गया। क्षेत्रीय लेखपाल श्रीकांत प्रसाद कन्हई के पूर्व मृतक पुत्र शिवपूजन की पत्नी भगवानी को छोड़कर मात्र एक पुत्र जयशंकर का नाम दर्ज कर दिया गया। भगवानी ने इसकी शिकायत डीएम से की थी। प्रकरण में श्रीकांत प्रसाद प्रथम दृष्ट्या दोषी हैं। डीएम ने एसडीएम सदर को जांच कर आख्या उपलब्ध कराने और श्रीकांत प्रसाद के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं और पीड़िता को निशुल्क अधिवक्ता देने का निर्देंश विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया है।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने डीएम के निर्देश पर ग्राम फखरूद्दीनपुर के चकबंदी अभिलेखों की जांच की। आधार वर्ष खतौनी फसली 1411 से 1416 के खाता संख्या 50 में अंकित गाटा संख्या 424 की 0.350 हेक्टेयर जमीन पर कन्हई पुत्र सुखराज का नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर अंकित है। अमल दरामद आदेश राजस्व निरीक्षक मुबारकपुर जरिए 25 अक्टूबर 2004 के अनुसार खाते पर मृतक कन्हई के स्थान पर जयशंकर पुत्र कन्हई का नाम बतौर वारिस दर्ज किया गया है। अमल दरामद राजस्य लेखपाल श्रीकांत प्रसाद ने 25 अक्टूबर 2004 को किया है। तहसील सदर द्वारा चकबंदी विभाग को उपलब्ध कराई गई खतौनी फसली 1411 से 1416 में खाता संख्या 50 पर जयशंकर पुत्र कन्हई का नाम तन्हा दर्ज पाया गया। इसी आधार पर चकबंदी क्रियाओं के अंतर्गत तैयार किए गए अभिलेखों में जयशंकर का नाम विवादित भूमि पर तन्हा दर्ज किया गया। क्षेत्रीय लेखपाल श्रीकांत प्रसाद कन्हई के पूर्व मृतक पुत्र शिवपूजन की पत्नी भगवानी को छोड़कर मात्र एक पुत्र जयशंकर का नाम दर्ज कर दिया गया। भगवानी ने इसकी शिकायत डीएम से की थी। प्रकरण में श्रीकांत प्रसाद प्रथम दृष्ट्या दोषी हैं। डीएम ने एसडीएम सदर को जांच कर आख्या उपलब्ध कराने और श्रीकांत प्रसाद के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं और पीड़िता को निशुल्क अधिवक्ता देने का निर्देंश विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया है।
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