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Azamgarh News: सड़कों पर फर्राटा भर रहे जुगाड़ वाहन, नियमों की उड़ा रहे धज्जियां
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आजमगढ़। पंजीकरण, बीमा, साइलेंसर नहीं है। प्रदूषण का प्रमाण भी नहीं। सड़क पर न तो कोई इन्हें रोकता है और न ही चेक करता है। सिस्टम पर भारी जुगाड़ वाहन शहर में फर्राटा भर नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हर चौराहे पर मुस्तैद होने का दावा करने वाली यातायात पुलिस इन वाहनों को देखकर मुंह फेर लती है। परिवहन विभाग भी इसे लेकर मौन है।
शहर की सड़कों पर पुराने स्कूटर व बाइक या फिर उसके इंजन से बनाए गए माल वाहक वाहनों की भरमार है। जिले में ऐसे वाहन पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में बढ़ गए हैं। इंजन का प्रयोग कर गन्ने की पेराई में करते हैं। इन वाहनों में आगे के हिस्से में बाइक जबकि पीछे के हिस्से में ठेला लगा होता है। वहीं बाजारों में दुकानदारों का इन ठेला वालों को पूरा संरक्षण मिलता है।
सामान खरीदने आने वाले लोगों को दुकानदार ही इनके नंबर मुहैया कराते हैं। कुछ दुकानदारों ने तो अपने कर्मचारियों को ही ये जुगाड़ वाहन बनवाकर दे रखे हैं। सिविल लाइन, नरौली, रेलवे स्टेशन व सिधारी रोड पर माल ढुलाई का कार्य ये ही रिक्शा करते हैं।
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हादसों का बन रहे कारण
आजमगढ़। जुगाड़ से बनाए गए वाहन सड़कों पर बिना किसी फिटनेस के दौड़ते हैं। समय पर इनके ब्रेक भी सही तरीके से लग जाएंगे इसका कोई भरोसा नहीं हैं। सड़क पर सरिया या दूसरा ऐसा ही सामान लेकर दौड़ते ये वाहन कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। वातावरण में जहर घोल रहे इन जुगाड़ वाहनों में 15 से 20 साल पुराने खटारा स्कूटरों, मोटर साइकिलों के इंजन लगाए जाते हैं। इतना ही नहीं एक जुगाड़ एक लीटर ईंधन में 25 से 30 किलोमीटर चलता है। देहात क्षेत्रों में तो पंपिंग सेट का इंजन फिट कर जुगाड़ तैयार किए जाते हैं।
बिना रोड टैक्स की दौड़ती हैं जुगाड़ गाड़ियां
आजमगढ़। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार जुगाड़ किसी वाहन की श्रेणी में नहीं आते हैं। आम वाहनों के लिए रोड टैक्स, इंश्योरेंस फिटनेस सहित तमाम तरीके टैक्स देय होते हैं मगर इन वाहनों के चालक कोई टैक्स नहीं देते। नए वाहन एक्ट के अनुसार सड़क पर बिना पंजीयन कोई गाड़ी चलाना अपराध है। प्रदूषण करने वाली गाड़ियां तो कतई नहीं चलेंगी।
ठेले में बाइक या स्कूटर का इंजन जोड़कर चलाना, यहां तक बाइक में भी कंपनी की ओर से दिए गए साइलेंसर, हॉर्न आदि के अलावा अलग से साइलेंसर या हॉर्न लगवाकर गाड़ी चलाना नियम विरुद्घ है। यदि पुलिस पकड़ती है तो सीज की कार्रवाई कर सकती है। परिवहन विभाग 5000 का जुर्माना ही लगा सकता है।
अतुल यादव, एआरटीओ प्रवर्तन।
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शहर की सड़कों पर पुराने स्कूटर व बाइक या फिर उसके इंजन से बनाए गए माल वाहक वाहनों की भरमार है। जिले में ऐसे वाहन पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में बढ़ गए हैं। इंजन का प्रयोग कर गन्ने की पेराई में करते हैं। इन वाहनों में आगे के हिस्से में बाइक जबकि पीछे के हिस्से में ठेला लगा होता है। वहीं बाजारों में दुकानदारों का इन ठेला वालों को पूरा संरक्षण मिलता है।
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सामान खरीदने आने वाले लोगों को दुकानदार ही इनके नंबर मुहैया कराते हैं। कुछ दुकानदारों ने तो अपने कर्मचारियों को ही ये जुगाड़ वाहन बनवाकर दे रखे हैं। सिविल लाइन, नरौली, रेलवे स्टेशन व सिधारी रोड पर माल ढुलाई का कार्य ये ही रिक्शा करते हैं।
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हादसों का बन रहे कारण
आजमगढ़। जुगाड़ से बनाए गए वाहन सड़कों पर बिना किसी फिटनेस के दौड़ते हैं। समय पर इनके ब्रेक भी सही तरीके से लग जाएंगे इसका कोई भरोसा नहीं हैं। सड़क पर सरिया या दूसरा ऐसा ही सामान लेकर दौड़ते ये वाहन कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। वातावरण में जहर घोल रहे इन जुगाड़ वाहनों में 15 से 20 साल पुराने खटारा स्कूटरों, मोटर साइकिलों के इंजन लगाए जाते हैं। इतना ही नहीं एक जुगाड़ एक लीटर ईंधन में 25 से 30 किलोमीटर चलता है। देहात क्षेत्रों में तो पंपिंग सेट का इंजन फिट कर जुगाड़ तैयार किए जाते हैं।
बिना रोड टैक्स की दौड़ती हैं जुगाड़ गाड़ियां
आजमगढ़। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार जुगाड़ किसी वाहन की श्रेणी में नहीं आते हैं। आम वाहनों के लिए रोड टैक्स, इंश्योरेंस फिटनेस सहित तमाम तरीके टैक्स देय होते हैं मगर इन वाहनों के चालक कोई टैक्स नहीं देते। नए वाहन एक्ट के अनुसार सड़क पर बिना पंजीयन कोई गाड़ी चलाना अपराध है। प्रदूषण करने वाली गाड़ियां तो कतई नहीं चलेंगी।
ठेले में बाइक या स्कूटर का इंजन जोड़कर चलाना, यहां तक बाइक में भी कंपनी की ओर से दिए गए साइलेंसर, हॉर्न आदि के अलावा अलग से साइलेंसर या हॉर्न लगवाकर गाड़ी चलाना नियम विरुद्घ है। यदि पुलिस पकड़ती है तो सीज की कार्रवाई कर सकती है। परिवहन विभाग 5000 का जुर्माना ही लगा सकता है।
अतुल यादव, एआरटीओ प्रवर्तन।
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