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ट्रेनों में बढ़ी भीड़, टिकट के लिए परेशान हो रहे यात्री
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आजमगढ़। छठ पूजा और दीवाली की वापसी भीड़ के कारण सभी ट्रेनों में काफी भीड़ चल रही है। महानगरों के लिए चलने वाली ट्रेनों वेटिंग की संख्या दो सौ से अधिक है और यात्रियों को कंफर्म सीट नहीं मिल पा रही है।
कोरोना काल में कई ट्रेनों को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन खुलने के बाद रेलवे ने ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया। साथ ही बिना कंफर्म टिकट के यात्रा न करने की रोक लगा दी। गोदान एक्सप्रेस, उत्सर्ग एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस व कैफियात एक्सप्रेस समेत सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से यात्री परेशान हैं। इनमें दो सौ तक वेटिंग चल रही है। तत्काल टिकट ही लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। यात्री तत्काल टिकट के लिए सुबह से ही लाइन में लगे रहते हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। इससे दलाल सक्रिय हो गए हैं। फर्जी साफ्टवेयर की मदद से वे टिकट बना रहे हैं। रेलवे काउंटर का क्लर्क जब तक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है। तब तक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं। एजेंट, अपने रिश्तेदार, दोस्त और अन्य के नाम पर मेल आईडी के जरिए आईआरसीटीसी की आईडी बनाते हैं। एक आईडी से एक माह में अधिकतम छह तत्काल टिकट बनती हैं, लेकिन यदि 100 आईडी होती हैं तो 600 टिकट बनती हैं। मंडल वाणिज्य निरीक्षक मिथिलेश कुमार का कहना है कि त्योहारों के कारणों ट्रेनों में अधिक भीड़ हो रही है। तत्काल टिकट भी अधिक नहीं बुक हो रहे जिससे यात्रियों को समस्याएं आ रही है।
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कोरोना काल में कई ट्रेनों को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन खुलने के बाद रेलवे ने ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया। साथ ही बिना कंफर्म टिकट के यात्रा न करने की रोक लगा दी। गोदान एक्सप्रेस, उत्सर्ग एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस व कैफियात एक्सप्रेस समेत सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से यात्री परेशान हैं। इनमें दो सौ तक वेटिंग चल रही है। तत्काल टिकट ही लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। यात्री तत्काल टिकट के लिए सुबह से ही लाइन में लगे रहते हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। इससे दलाल सक्रिय हो गए हैं। फर्जी साफ्टवेयर की मदद से वे टिकट बना रहे हैं। रेलवे काउंटर का क्लर्क जब तक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है। तब तक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं। एजेंट, अपने रिश्तेदार, दोस्त और अन्य के नाम पर मेल आईडी के जरिए आईआरसीटीसी की आईडी बनाते हैं। एक आईडी से एक माह में अधिकतम छह तत्काल टिकट बनती हैं, लेकिन यदि 100 आईडी होती हैं तो 600 टिकट बनती हैं। मंडल वाणिज्य निरीक्षक मिथिलेश कुमार का कहना है कि त्योहारों के कारणों ट्रेनों में अधिक भीड़ हो रही है। तत्काल टिकट भी अधिक नहीं बुक हो रहे जिससे यात्रियों को समस्याएं आ रही है।
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