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Azamgarh News: खत्म हुईं उम्मीदें, आंखों से बहीं आंसुओं की धाराएं, पिता से संपर्क टूटते ही बिखर गए 5 बच्चों के सपने

Sat, 13 Jun 2026 12:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 12:28 AM IST
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Hope ended, streams of tears flowed from the eyes, the dreams of 5 children shattered as soon as contact with their father was lost
सगड़ी के अराजी देवारा करखिया महड़ौर का पूरा गांव में गमगीन हाल में बैठा परिवार। संवाद
लाटघाट (आजमगढ़)। सगड़ी तहसील के आराजी देवारा करखिया महड़ौर गांव के रामचंद्र अपने पांच बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना लेकर फरवरी 2024 में रूस गए थे। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए गए रामचंद्र से परिवार को ढेरों उम्मीदें थीं। लेकिन दो साल बाद शुक्रवार की रात जब ताबूत में रामचंद्र का कंकाल लाया गया तो परिजनों की उम्मीदें खत्म हो गईं और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ी।
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रामचंद्र की पत्नी सुमित्रा ने बताया कि एक एजेंट के माध्यम से उनके पति सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने रूस गए थे। शुरुआत में करीब एक महीने तक फोन पर नियमित बातचीत होती रही। पति बच्चों की पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों पर वह चिंता जताते थे। फिर अचानक एक दिन फोन बंद हो गया। परिवार ने सोचा कि शायद नेटवर्क की समस्या होगी, लेकिन दिन, सप्ताह और फिर महीने बीतते गए। रामचंद्र का कोई संदेश नहीं आया। घर में कमाने वाला कोई नहीं था। धीरे-धीरे बची-खुची जमा पूंजी खत्म हो गई। बच्चों की फीस और अन्य खर्च उठाना मुश्किल हो गया।
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पांचों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई। सबसे बड़े बेटे सोनू ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी, आर्थिक तंगी के कारण आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सका। मोनू की पढ़ाई भी बाधित हो गई, जबकि बेटियां शिखा और अनन्या तथा सबसे छोटा बेटा अंकुश भी अभावों के बीच बचपन गुजार रहे हैं। सुमित्रा कहती हैं कि मायके के सहयोग से किसी तरह परिवार का खर्च चल रहा है। परिवार ने एंबेसी, मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों के यहां गुहार लगाई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली थी।
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रामचंद्र के साथ गए अरविंद भी लापता

जनवरी में रामचंद्र के पिता और बेटे का डीएनए सैंपल लिया गया तो परिवार की उम्मीदें फिर जाग उठीं। उन्हें लगा कि शायद अब कोई अच्छी खबर मिलेगी और रामचंद्र लौट आएंगे। लेकिन मई में उनकी मौत की सूचना मिली। रामचंद्र के साथ रूस गए गांव के अरविंद का भी कोई पता नहीं चल सका है। उनकी पत्नी बिंदु और दो छोटे बच्चे आज भी उनकी वापसी की राह देख रहे हैं। एक परिवार के लिए इंतजार खत्म हो गया, लेकिन दूसरे परिवार की आंखों में उम्मीद और अनिश्चितता दोनों है।
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