आजमगढ़। आशंसा समिति ने शनिवार को नेहरु हाल के सभागार में दशरथ सिह-जेके सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत लोकतंत्र का परिवर्तित होता स्वरूप और हमारी जवाब देही विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। सबसे पहले डा.जेके सिंह द्वारा रचित कविताओं और गीतों की संगीतमय प्रस्तुति की गई। बीएचयू के प्रोफेसर आनंद दीपायन ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है कि हम सभी विचारों को सम्मान दें। यदि हम ऐसा नहीं करते है तो हमारा समाज कविलाई समाज की तरफ अग्रसर होगा।
हमें सभी विचारों को साथ लेकर चलने की जरुरत है। भाकपा माले के नेता जय प्रकाश नारायण ने कहा कि दुनियां के पूंजीवादी देशों का मानना है कि अब पूंजी के विस्तार के लिए लोकतंत्र को कमजोर करना जरुरी है। भोपाल से आए माक्र्सवादी नेता बादल सरोज ने कहा कि 26नवंबर 1949 में डा.भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि हमने जो संविधान बनाया है वह तब तक नहीं सफल होगा जब तक कि हम सामाजिक लोकतंत्र को विकसित नहीं कर लेते है। लेखिका किरन सिंह ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गुजरात माडल का प्रचार किया और अब चुनाव बाद जनता पर सांप्रदायिक एजेंडा थोपे जा रही है। प्रोफेसर दीपक मलिक ने कहा कि देश की आजादी के बाद भारतीय राजनीति का एजेंडा वामपंथी तय करते थे। अब संघ परिवार तय कर रहा है। जिसे बदलना होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. बद्रीनाथ ने कहा कि भारत का लोकतंत्र आज खतरे में है। इस खतरे को समाजवादी एकता बनाकर खत्म किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डा. प्रज्ञा सिंह ने किया। कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। इस अवसर पर अधिवक्ता हामिद अली, राजेश सिंह, रमेश, विपिन यादव, जितेंद्र हरि पांडेय, जियालाल, अनिल कुमार राय, सच्चिदानंद राय, विशिष्ठ सिंह, जय प्रकाश सिंह, अमरजीत सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।