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Azamgarh News: यहां हिंदू-मुस्लिम बराबर लेकिन 35 वर्षों से नहीं हो रही बकरीद पर कुर्बानी
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मुबारकपुर थाना क्षेत्र का लोहरा गांव में घरों की तलाशी लेकर बाहर निकलती पुलिस। संवाद
- फोटो : जेतवन परिसर में पूजा करते बौद्ध अनुयायी।
आजमगढ़। जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र का लोहरा गजहड़ा गांव एक ऐसा अनोखा गांव है, जहां पिछले लगभग 35 वर्षों से बकरीद के मौके पर कुर्बानी नहीं होती है। गांव में हिंदू और मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग बराबर है और सामान्य दिनों में दोनों समुदाय आपसी सौहार्द के साथ रहते हैं, लेकिन बकरीद के समय यह गांव संवेदनशील हो जाता है।
ग्राम प्रधान रसीला देवी वे बताया कि करीब 35 वर्ष पहले कुर्बानी को लेकर दो समुदायों के बीच गंभीर विवाद हुआ था। मामला न्यायालय तक पहुंचा और हाईकोर्ट के आदेश के बाद गांव में कुर्बानी पर रोक लगा दी गई। ग्रामीणों के अनुसार उस समय हुए विवाद के बाद कई दिनों तक गांव में कर्फ्यू जैसे हालात रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशासन द्वारा लगातार सख्ती बरती जाती है। बकरीद के अवसर पर किसी भी प्रकार की कुर्बानी न हो, इसके लिए गांव में पुलिस बल की तैनाती की जाती है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहता है। अब लोग कुर्बानी के लिए पास के अन्य गांवों का रुख करते हैं। थानाध्यक्ष शशिमौली पांडेय ने बताया कि सालों पुरानी इस स्थिति के कारण यह गांव आज भी बकरीद के समय विशेष निगरानी में रहता है।
लोहरा में पुलिस का चला सघन तलाशी अभियान, घरों की ली तलाशी-अमिलो। बकरीद के पर्व को सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुबारकपुर थाना क्षेत्र के लोहरा में प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। बुधवार की शाम बकरीद की पूर्व संध्या पर गांव में घर-घर जाकर कुर्बानी के जानवरों की सघन तलाशी ली गई।
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पुलिस प्रशासन ने निगरानी के लिए दो टीमें गठित की थीं। एक टीम का नेतृत्व लोहरा चौकी प्रभारी कुलदीप कुमार और दूसरी टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक अखिलेश चौबे कर रहे थे। थानाध्यक्ष शशिमौली पांडेय ने बताया कि तलाशी के दौरान कुर्बानी के जानवरों की जांच की गई तथा अधिकांश जानवरों को पहले ही पास के गांवों या निर्धारित अस्थायी बाड़ों में भेज दिया गया है।
प्रशासन द्वारा हर वर्ष की तरह इस बार भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। गांव में तीन दिनों तक पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें कैंप कर लगातार निगरानी रखेंगी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एक प्लाटून पीएसी तैनात की गई है। इसके अलावा गांव में 15 उपनिरीक्षक, 50 पुरुष आरक्षी, 12 महिला आरक्षी और राजस्व विभाग की टीम में लेखपाल बीरबल, देवानंद, दीपक और राकेश चौधरी सहित अन्य कर्मियों की तैनाती की गई है।
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ग्राम प्रधान रसीला देवी वे बताया कि करीब 35 वर्ष पहले कुर्बानी को लेकर दो समुदायों के बीच गंभीर विवाद हुआ था। मामला न्यायालय तक पहुंचा और हाईकोर्ट के आदेश के बाद गांव में कुर्बानी पर रोक लगा दी गई। ग्रामीणों के अनुसार उस समय हुए विवाद के बाद कई दिनों तक गांव में कर्फ्यू जैसे हालात रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रशासन द्वारा लगातार सख्ती बरती जाती है। बकरीद के अवसर पर किसी भी प्रकार की कुर्बानी न हो, इसके लिए गांव में पुलिस बल की तैनाती की जाती है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहता है। अब लोग कुर्बानी के लिए पास के अन्य गांवों का रुख करते हैं। थानाध्यक्ष शशिमौली पांडेय ने बताया कि सालों पुरानी इस स्थिति के कारण यह गांव आज भी बकरीद के समय विशेष निगरानी में रहता है।
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लोहरा में पुलिस का चला सघन तलाशी अभियान, घरों की ली तलाशी-अमिलो। बकरीद के पर्व को सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुबारकपुर थाना क्षेत्र के लोहरा में प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। बुधवार की शाम बकरीद की पूर्व संध्या पर गांव में घर-घर जाकर कुर्बानी के जानवरों की सघन तलाशी ली गई।
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पुलिस प्रशासन ने निगरानी के लिए दो टीमें गठित की थीं। एक टीम का नेतृत्व लोहरा चौकी प्रभारी कुलदीप कुमार और दूसरी टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक अखिलेश चौबे कर रहे थे। थानाध्यक्ष शशिमौली पांडेय ने बताया कि तलाशी के दौरान कुर्बानी के जानवरों की जांच की गई तथा अधिकांश जानवरों को पहले ही पास के गांवों या निर्धारित अस्थायी बाड़ों में भेज दिया गया है।
प्रशासन द्वारा हर वर्ष की तरह इस बार भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। गांव में तीन दिनों तक पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें कैंप कर लगातार निगरानी रखेंगी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत एक प्लाटून पीएसी तैनात की गई है। इसके अलावा गांव में 15 उपनिरीक्षक, 50 पुरुष आरक्षी, 12 महिला आरक्षी और राजस्व विभाग की टीम में लेखपाल बीरबल, देवानंद, दीपक और राकेश चौधरी सहित अन्य कर्मियों की तैनाती की गई है।