{"_id":"581f782f4f1c1bfb02b378f3","slug":"have-to-follow-the-laws-of-islam","type":"story","status":"publish","title_hn":"करना होगा इस्लाम के कानून का पालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करना होगा इस्लाम के कानून का पालन
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:06 AM IST
विज्ञापन
महिलाओं के लिए सख्त नियम लागू, फेसबुक न चलाएं और न पहने जींस
- फोटो : Reuters
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलरियागंज कस्बा स्थित जामिअतुल फलाह मदरसे में तीन तलाक के मुद्दे पर पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। शनिवार को सेमिनार में मौलानाओं ने महिलाओं को उनका हक और अधिकार देने की बात कही।
सेमिनार में कर्नाटक से आए मौलाना अहमद सेराज उमरी ने कहा कि महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए और उन्हें जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनके बारे में सही जानकारी भी देनी होगी। यह तभी संभव है, जब हमें कुरान की सही जानकारी होगी। आमतौर पर हम अपने घरों पर भी महिलाओं को उनका हक नहीं दे पाते हैं जबकि तकरीर और भाषण खूब करते हैं।
अब सिर्फ तकरीर और भाषण से काम नहीं चलेगा। हमें इस्लाम के कानून का पालन हर हाल में करना होगा। अध्यक्षता करते हुए जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि शोध पत्र लिखने वालों को शोध पत्र लिखकर खामोश नहीं हो जाना चाहिए बल्कि उन्हें यह देखना चाहिए कि इसमें क्या कमी है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। इस्लाम के पैगाम को प्रस्तुत करने से पहले खुद को और घर-परिवार को इस्लामिक मॉडल बनाना होगा।
विज्ञापन
कार्यक्रम को नुसरत अली, मौलाना ताहिर मदनी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर नईमुद्दीन इस्लाही, अबू शहमा, राजिउल इस्लाम नदवी आदि लोग उपस्थित थे। मकबूल फलाही ने सभी का आभार प्रकट किया। संचालन मौलाना एजाज अहमद कासमी ने किया।
विज्ञापन
सेमिनार में कर्नाटक से आए मौलाना अहमद सेराज उमरी ने कहा कि महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए और उन्हें जो जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनके बारे में सही जानकारी भी देनी होगी। यह तभी संभव है, जब हमें कुरान की सही जानकारी होगी। आमतौर पर हम अपने घरों पर भी महिलाओं को उनका हक नहीं दे पाते हैं जबकि तकरीर और भाषण खूब करते हैं।
विज्ञापन
अब सिर्फ तकरीर और भाषण से काम नहीं चलेगा। हमें इस्लाम के कानून का पालन हर हाल में करना होगा। अध्यक्षता करते हुए जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि शोध पत्र लिखने वालों को शोध पत्र लिखकर खामोश नहीं हो जाना चाहिए बल्कि उन्हें यह देखना चाहिए कि इसमें क्या कमी है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। इस्लाम के पैगाम को प्रस्तुत करने से पहले खुद को और घर-परिवार को इस्लामिक मॉडल बनाना होगा।
विज्ञापन
कार्यक्रम को नुसरत अली, मौलाना ताहिर मदनी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर नईमुद्दीन इस्लाही, अबू शहमा, राजिउल इस्लाम नदवी आदि लोग उपस्थित थे। मकबूल फलाही ने सभी का आभार प्रकट किया। संचालन मौलाना एजाज अहमद कासमी ने किया।