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परिषदीय विद्यालयों के बदहाल भवन में नौनिहाल

Fri, 06 Apr 2018 11:17 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Fri, 06 Apr 2018 11:17 PM IST
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Government schools building is going destroy
school shimla
परिषदीय विद्यालयों का नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। जिले में सैकड़ो स्कूल भवनों की हालत काफी जर्जर है। तमाम कोशिशों के बाद भी जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कवायद नहीं की गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई है। सब कुछ जानते हुए भी विभागीय अधिकारी इन जर्जर विद्यालयों को लेकर मौन साधे हुए है।  
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की कुल संख्या 3250 है। इनमें से लगभग सौ की संख्या में विद्यालय भवन काफी समय से जर्जर हैं। कई भवन तो ऐसे भी है जहां सिर्फ खंडहर बचे हैं। शहर क्षेत्र के गंगाराय जूनियर हाईस्कूल के एक हिस्से की छत दो-तीन साल पूर्व बरसात में गिर गई थी। गनीमत थी कि उस समय विद्यालय बंद था।
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बगल से गुजर रहे सार्वजनिक रास्ते के तरफ दीवार लटक गई है। इसके बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने उसे जमीदोज नहीं कराया। ऐसा ही कुछ हाल शहर में स्थित प्रथमिक विद्यालय अनंतपुर, एलवल आदि का भी। हांलाकि सभी जर्जर भवन वाले परिषदीय विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण करा दिया गया है। वर्तमान में इन्हीं अतिरिक्त कक्षाओं में ही विद्यालय का संचालन हो रहा है। भले ही जर्जर कक्षाओं में बच्चे नहीं पढ़ते लेकिन परिसर में जर्जर भवन होने से हमेशा ही खतरा मडराता रहता है।  
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 अक्सर टूटकर गिरता है छत का प्लास्टर
जहानागंज। ब्लाक क्षेत्र में वैसे तो कई विद्यालय भवन जर्जर स्थिति में है, लेकिन जूनियर विद्यालय धरवारा की स्थिति तो अत्यंत ही जर्जर है। तीन वर्ष पूर्व ही इस भवन को जर्जर घोषित कर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी अब तक न तो नया भवन ही बना न ही जर्जर भवन को गिरवाया ही गया। जबकि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक से की जा चुकी है।

यहां 130 बच्चे नामांकित है तो वहीं तीन अध्यापक, दो अनुदेशक और एक अनुचर तैनात है। प्रधानाध्यापिका प्रतिमा मिश्रा ने बताया कि विद्यालय का भवन काफी जर्जर है। सितंबर 2015 में ही भवन को जर्जर घोषित कर दिया गया है। इसके बाद से खंड शिक्षाधिकारी के निर्देश पर प्राथमिक विद्यालय धरवारा परिसर में कक्षाओं का संचालन किसी तरह से कराया जा रहा है।

भवन की दशा की बात की जाये तो छत का प्लास्टर अक्सर ही गिरता है। वर्तमान में तो वह परिसर काफी जर्जर हो चुका है। जिसे गिराये जाने की जरूरत है, क्योकि हमेशा ही इस जर्जर भवन से हादसा होने की संभावना बनी रहती है। बच्चे खेलते-खेलते इस परिसर में भी पहुंच जाते है। नये भवन के निर्माण और पुराने को गिराये जाने के लिए बीएसए के साथ ही मुख्यमंत्री तक से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई।


161 में आधा दर्जन स्कूल जर्जर
अहरौला। शिक्षा क्षेत्र अहरौला में प्राथमिक के 116 और जूनियर के 45 विद्यालय है। इसमें आधा दर्जन से अधिक विद्यालय भवन वर्तमान में जर्जर स्थिति में है। जर्जर विद्यालयों के प्रधानाचार्यो ने बताया कि इन भवन में पठन-पाठन का कार्य तो नहीं हो रहा है, फिर भी हादसे की हमेशा ही आशंका बनी रहती है। जर्जर विद्यालयों में प्राथमिक विद्यालय गहजी, प्राथमिक विद्यालय कल्याणपुर, प्राथमिक विद्यालय बसईपुर, प्राथमिक विद्यालय दमदियावन, प्राथमिक विद्यालय युद्धिष्ठिरपट्टी, प्राथमिक विद्यालय पूरामया पांडेय, प्राथमिक विद्यालय बिलारी शामिल है।



पिछले शिक्षण सत्र तक लगभग 100 परिषदीय विद्यालय भवन जर्जर के रुप में चिन्हित हो चुके थे। वर्तमान सत्र में इसकी स्थिति की जानकारी के लिए सभी बीआरसी से रिपोर्ट मांगी गई है। किसी भी जर्जर भवन में कक्षाओं का संचालन नहीं किया जा रहा है, लेकिन अभी किसी भी जर्जर भवन को गिराये जाने की कवायद नहीं की गई है। जर्जर भवनों को गिराने की अनुमति के लिए शासन को पत्र भेज गया है। अनुमति मिलते ही जर्जर भवन गिरा दिये जाएंगे।  
अनिल सिंह, जेई, बेसिक शिक्षा विभाग, आजमगढ़। 
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