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घाघरा ने मिटाया तीन पुरवों का अस्तित्व

Sun, 16 Aug 2020 11:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2020 11:42 PM IST
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Ghaghra wiped out the existence of many villages
लाटघाट। घाघरा नदी का रौद्र रूप चरम पर है। जहां गांव चारों तरफ से घिरा हुआ है और घरों में पानी घुसा है। वहीं देवारा खास राजा के मुरारी के पुरवा का 22 घर, त्रिलोकी के पुरवा का 17 घर और तीर्थराज का 10 घर घाघरा में विलीन हो गया। इन पुरवों के लोग बंधे पर या विसरा गोला गोरखपुर और नई बस्ती रौनापार में शरण लिए हुए हैं।
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प्रधान प्रतिनिधि पल्टन यादव ने बताया कि त्रिलोकी का पुरवा देखते ही देखते घाघरा में विलीन हो गया। मुरली का पुरवा बीते एक सप्ताह में कट गया तो वहीं तीर्थराज का पुरवा भी घाघरा में कटकर विलीन हो गया है। कुल 46 लोगों का आशियाना अब तक घाघरा में विलीन हो चुका है। एक तो बाढ़ की मार दूसरे घर भी घाघरा में विलीन हो जाने से लोगों पर पहाड़ टूट चुका है। इनकी हालत बद से बदतर हो गई है लेकिन अभी गांव में देखने कोई नहीं पहुंचा है। घाघरा नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सुबह बढ़ने के बाद देर शाम तक नदी के जलस्तर में स्थिरता देखी जा रही है। उधर नदी स्थिर जलस्तर के बीच कटान तेज कर दिया है। 80 गांव व 325 पुरवे में अभी भी पानी भरा हुआ है। बीते तीन दिनों से घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी लेकिन बीती देर शाम से नदी के जलस्तर में स्थिरता दर्ज की गई है। घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच नदी ने कटान तेज कर दिया है। सभी गांव में अब भी बाढ़ का पानी कुछ घरों में भरा हुआ है। जोकहरा के पास बना बांध टूट गया गया था। इससे पूरे क्षेत्र में बाढ़ का पानी भर गया था। हजारों बीघा फसल डूब गई थी। कटे हुए बांध को बनाए जाने के बाद भी रिसाव हो रहा है। घाघरा नदी का पानी गांवों में बढ़ता जा रहा है। इससे झुग्गी झोपड़ी में बसे लोगों पर खतरे की आशंका बढ़ गई है। नतीजन लोग गांव से पलायन को मजबूर हो रहे हैं। पक्के मकान वालों ने छत पर बसेरा बना लिया है। गांव चक्की, देवारा खास राजा, भदौरा, साहडीह, बाका, बूढ़नपट्टी, अजगरा, अजगरा मगर्वी, देवारा ईश्माइलपुर, रोशनगंज, हैदराबाद, कुढही, सहदेवगंज आदि गांवों में पानी की तेज धार चल रही है। ग्रामीण अपने छोटे बच्चों को छप्परों पर बिठा रहे हैं ताकि बच्चे पानी की तेज धार में बह न जाए। पर्याप्त संख्या में नाव भी उपलब्ध नहीं है। बाढ़ पीड़ित तटबंध पर तिरपाल की झोपडी बनाकर रहने को विवश है। ग्रामीणों ने राहत सामग्री न बांटे जाने का आरोप लगाया। एसडीएम सगड़ी अरविंद सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में जहां भी घर कट गए हैं। उनमें तत्काल सहायता पहुंचाई जा रही है। फसल की क्षति हुई है। उसका सर्वे कराया जाएगा और शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में हर संभव मदद की जाएगी।
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