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कृषि योग्य भूमि लील रही घाघरा
लाटघाट (सं.)।
Updated Sat, 13 Jun 2015 11:59 PM IST
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर से होकर बहने वाली घाघरा नदी में अभी बाढ़ नहीं आई है लेकिन नदी द्वारा कृषि योग्य भूमि को काटने का कार्य निरंतर जारी है। प्रशासन बंधे को कटने से बचाने में जुटा हुआ है।
बंधे के बचाव के लिए शासन द्वारा 17 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं। इससे बोरी में बालू भरकर नदी की धारा में डाला जा रहा है ताकि नदी के दबाव को बंधे से दूर किया जा सके और कटने से बचाया जा सके। वहीं, घाघरा बंधे को छोड़कर किसानों की कृषि योग्य भूमि को अपनी धारा में समेट रही है।
विगत पांच दिनों में 10 से 15 एकड़ भूमि घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है। महुला गांव निवासी श्यामाचरण राय, रामनवल राय, लौजारी, विशुनदेव, परमात्मा राय, ढ़िल्लू मद्घेशिया आदि की जमीन कट रही है। पिछले वर्ष 3600 एकड़ कृषि योग्य भूमि घाघरा की धारा में समा चुकी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन बंधे को बचाने में हलकान है लेकिन हमारी कृषि योग्य भूमि को बचाने के बारे में किसी को कोई फिक्र नहीं है।
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बंधे के बचाव के लिए शासन द्वारा 17 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए हैं। इससे बोरी में बालू भरकर नदी की धारा में डाला जा रहा है ताकि नदी के दबाव को बंधे से दूर किया जा सके और कटने से बचाया जा सके। वहीं, घाघरा बंधे को छोड़कर किसानों की कृषि योग्य भूमि को अपनी धारा में समेट रही है।
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विगत पांच दिनों में 10 से 15 एकड़ भूमि घाघरा की धारा में विलीन हो चुकी है। महुला गांव निवासी श्यामाचरण राय, रामनवल राय, लौजारी, विशुनदेव, परमात्मा राय, ढ़िल्लू मद्घेशिया आदि की जमीन कट रही है। पिछले वर्ष 3600 एकड़ कृषि योग्य भूमि घाघरा की धारा में समा चुकी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन बंधे को बचाने में हलकान है लेकिन हमारी कृषि योग्य भूमि को बचाने के बारे में किसी को कोई फिक्र नहीं है।
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