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दहेज लोभी पति को उम्रकैद
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आजमगढ़। दहेज हत्या के मामले में अदालत ने पति को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। शुक्रवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश ध्रुव राय की अदालत ने सुनाई। जबकि इसी मामले का एक अन्य आरोपी ससुर की दौरान मुकदमा मौत हो गई। घटना कंधरापुर थाना क्षेत्र की है।
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गढ़वाल गांव निवासी कन्हैया की पुत्री की शादी वर्ष 2000 में बरजी गांव निवासी रामाश्रय के साथ हुई थी। नौ अक्तूबर 2012 को उसकी मौत हो गई। कन्हैया ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि शादी के बाद ससुराल के लोग दहेज में मोटर साइकिल की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। जिसके सूचना उसने अपने पिता कन्हैया को दी थी। इसी दहेज की मांग को लेकर रामाश्रय और उसके पिता श्रीपति ने घटना के दिन विवाहिता मीरा की गला दबाकर हत्या कर दी और उसके शव को जला दिया। इस मामले में कंधरापुर थाना पुलिस ने विवाहित के पति रामाश्रय और ससुर श्रीपति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्र ने इस मुकदमे के वादी कन्हैया, लालसा, आशा, विनोद, डा यूबी चौहान, विवेचक संतोष कुमार शर्मा को बतौर साक्षी अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद पति को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गढ़वाल गांव निवासी कन्हैया की पुत्री की शादी वर्ष 2000 में बरजी गांव निवासी रामाश्रय के साथ हुई थी। नौ अक्तूबर 2012 को उसकी मौत हो गई। कन्हैया ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि शादी के बाद ससुराल के लोग दहेज में मोटर साइकिल की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। जिसके सूचना उसने अपने पिता कन्हैया को दी थी। इसी दहेज की मांग को लेकर रामाश्रय और उसके पिता श्रीपति ने घटना के दिन विवाहिता मीरा की गला दबाकर हत्या कर दी और उसके शव को जला दिया। इस मामले में कंधरापुर थाना पुलिस ने विवाहित के पति रामाश्रय और ससुर श्रीपति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता दीपक मिश्र ने इस मुकदमे के वादी कन्हैया, लालसा, आशा, विनोद, डा यूबी चौहान, विवेचक संतोष कुमार शर्मा को बतौर साक्षी अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को को सुनने के बाद पति को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।
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