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Azamgarh News: यूरिक एसिड बढ़ने को नजरअंदाज न करें...बीमारी गंभीर हो सकती है

Tue, 28 Apr 2026 01:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:24 AM IST
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Do not ignore the increase in uric acid...the disease can become serious.
अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
आजमगढ़। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान का असर युवाओं की सेहत पर भी दिखने लगा है। पहले उम्रदराज लोगों में आम मानी जाने वाली यूरिक एसिड की समस्या अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 12 मरीज पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके कुशवाहा ने बताया कि ओपीडी में 130-140 मरीज आ रहे हैं। इसमें से 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 10-12 लोगों में यूरिक एसिड की समस्या रहती है। खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली से समस्या खासकर युवाओं में बढ़ रही है। इसके अलावा वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती। शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है।
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यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण-
जोड़ों में तेज दर्द (खासकर पैर के अंगूठे, घुटने, टखने में)
जोड़ों में सूजन और अकड़न।
प्रभावित जगह की त्वचा का लाल या गरम होना।
चलने-फिरने, उठने-बैठने में दिक्कत।
हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन।
लगातार थकान और बेचैनी।
रात के समय दर्द का ज्यादा बढ़ना।
गंभीर स्थिति में किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या।

बचाव के उपाय-
ज्यादा पानी पीएं (दिन में 8–10 गिलास)।
प्रोटीन और प्यूरीन वाले खाद्य पदार्थ कम करें (जैसे लाल मांस, मछली)।
शराब और बीयर से परहेज करें।
वजन नियंत्रित रखें।
नियमित व्यायाम करें (हल्की वॉक, योग)।
मीठे पेय (कोल्ड ड्रिंक, जूस) कम करें।
हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं।
दाल और प्रोटीन संतुलित मात्रा में लें।
समय-समय पर जांच कराते रहें।
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