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Azamgarh News: पराली जलाएं नहीं, खेत में खाद बनाएं
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ज्ञानपुर। धान की कटाई के बाद अगर आप पराली जलाने के बारे में सोच रहे हैं तो ठीक नहीं है। इससे जहां पर्यावरण प्रदूषण बढ़ेगा। मुकदमा भी हो सकता है। इसकी निगरानी के लिए कृषि विभाग ने 79 न्याय पंचायतों में दो सदस्यीय टीम गठित की है। कृषि विभाग का कहना है कि पराली को खेत में खाद बनाएं। इसके लिए विभाग डी कंपोजर मुहैया कराएगा।
जिले में धान की कटाई की जा रही है। हार्वेस्टर से धान की कटाई करने वाले अधिकतर किसान पराली को खेतों में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण एवं मृदा को नुकसान पहुंचता है। शासन ने करीब सात से आठ साल पूर्व ही इस पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद अब भी लोग पराली जला रहे हैं।
कृषि विभाग ने ब्लॉकों को एडवाइजरी जारी किया है। जिसमें पराली प्रबंधन पर जोर दिया गया है। पराली जलाने वाले किसानों पर तीन स्तर पर निगाह रखी जा रही है। इसमें मोडिस सैटेलाइट, कृषि विभाग व तहसील के अधिकारी किसानों पर निगाह रखेंगे। सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर ढाई हेक्टेयर पर 2500 रुपये, पांच हेक्टेयर पर पांच हजार रुपये और पांच हेक्टेयर से ऊपर खेतों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि डी-कंपोजर से पराली को खेतों में ही नष्ट कर खाद बनाई जा सकती है। इसके लिए आठ हजार शीशी डी-कंपोजर आ रहा है। जिसे किसानों को नि:शुल्क दिया जाएगा। ऐसे में किसान पराली न जलाएं। अगर कोई भी किसान सैटेलाइट या अधिकारी-कर्मचारियों की निगाह में आएगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। न्याय पंचायत स्तर पर लेखपाल और प्राविधिक सहायक की ड्यूटी लगाई गई है।
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जिले में धान की कटाई की जा रही है। हार्वेस्टर से धान की कटाई करने वाले अधिकतर किसान पराली को खेतों में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण एवं मृदा को नुकसान पहुंचता है। शासन ने करीब सात से आठ साल पूर्व ही इस पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद अब भी लोग पराली जला रहे हैं।
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कृषि विभाग ने ब्लॉकों को एडवाइजरी जारी किया है। जिसमें पराली प्रबंधन पर जोर दिया गया है। पराली जलाने वाले किसानों पर तीन स्तर पर निगाह रखी जा रही है। इसमें मोडिस सैटेलाइट, कृषि विभाग व तहसील के अधिकारी किसानों पर निगाह रखेंगे। सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर ढाई हेक्टेयर पर 2500 रुपये, पांच हेक्टेयर पर पांच हजार रुपये और पांच हेक्टेयर से ऊपर खेतों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि डी-कंपोजर से पराली को खेतों में ही नष्ट कर खाद बनाई जा सकती है। इसके लिए आठ हजार शीशी डी-कंपोजर आ रहा है। जिसे किसानों को नि:शुल्क दिया जाएगा। ऐसे में किसान पराली न जलाएं। अगर कोई भी किसान सैटेलाइट या अधिकारी-कर्मचारियों की निगाह में आएगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। न्याय पंचायत स्तर पर लेखपाल और प्राविधिक सहायक की ड्यूटी लगाई गई है।
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