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‘लावारिसों’ का भी बनेगा मृत्यु प्रमाण-पत्र
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:17 PM IST
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आजमगढ़। अभी तक लावारिस शवों की पहचान के लिए पुलिस 72 घंटे तक उसे मोर्चरी में रखती थी। इस बीच यदि परिजनों ने पहुंचकर पहचान कर ली तो ठीक नहीं तो उसका पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया जाता था।
अब पालिका की ओर से लावारिस शवों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। इससे परिजन कभी भी फोटो देख अपनों की पहचान कर सकेंगे और पहचान देकर मृत्यु प्रमाण-पत्र भी प्राप्त करेंगे।
अभी तक लावारिस शवों की पहचान पुलिस तक ही सीमित थी। पुलिस के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही परिजन उनकी पहचान करते थे। शासन की ओर से शत प्रतिशत मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के मद्देनजर अब नगर स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से लावारिस शवों को मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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इस प्रक्रिया में उन्हें लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले भारत रक्षा दल का सहयोग मिला है। इसके तहत शव के अंतिम संस्कार की सूचना देने वाले को अपना आधार देना होगा। साथ ही मृतक की फोटो, एफआईआर और पंचनामा की कापी भी इसमें लगाई जाएगी। इसके बाद प्रमाण पत्र तैयार किया जाएगा।
इससे मृतक के रिश्तेदार कभी भी पालिका में आकर फोटो के आधार पर अपने परिजन की पहचान कर सकेंगे और नि:शुल्क प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे।
बीआरडी करेगी सहयोग
लावारिस शवों के साथ बेकद्री आम बात है। पुलिस पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वो शवों का अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे तमसा में बहा देती थी। इसे देख भारत रक्षा दल ने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया था।
दल अभी तक 250 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुका है। अब लावारिस मृतकों के प्रमाण-पत्र के लिए भी ये संगठन नगर स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करेगा। शव की जानकारी नगर स्वास्थ्य को उपलब्ध कराएगा
कब्रिस्तान और श्मशान का चक्कर
शासन की ओर से शत प्रतिशत जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के निर्देश हैं। लेकिन शहरवासी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
कार्य पूरा करने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी अब कब्रिस्तानों और श्मशानों का चक्कर लगाएंगे और पता करेंगे कि कितने लोगों और किसकी मौत हुई है। इसके बाद उसका प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शासन की ओर से शत प्रतिशत मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के निर्देश हैं। इसके तहत शहरी क्षेत्र में लावारिस शवों का भी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। परिजन कभी भी पहचान कर अपने रिश्तेदार का मृत्यु प्रमाण-पत्र हासिल कर सकेंगे। डॉ. वीके अग्रवाल, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
अब पालिका की ओर से लावारिस शवों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। इससे परिजन कभी भी फोटो देख अपनों की पहचान कर सकेंगे और पहचान देकर मृत्यु प्रमाण-पत्र भी प्राप्त करेंगे।
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अभी तक लावारिस शवों की पहचान पुलिस तक ही सीमित थी। पुलिस के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही परिजन उनकी पहचान करते थे। शासन की ओर से शत प्रतिशत मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के मद्देनजर अब नगर स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से लावारिस शवों को मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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इस प्रक्रिया में उन्हें लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले भारत रक्षा दल का सहयोग मिला है। इसके तहत शव के अंतिम संस्कार की सूचना देने वाले को अपना आधार देना होगा। साथ ही मृतक की फोटो, एफआईआर और पंचनामा की कापी भी इसमें लगाई जाएगी। इसके बाद प्रमाण पत्र तैयार किया जाएगा।
इससे मृतक के रिश्तेदार कभी भी पालिका में आकर फोटो के आधार पर अपने परिजन की पहचान कर सकेंगे और नि:शुल्क प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे।
बीआरडी करेगी सहयोग
लावारिस शवों के साथ बेकद्री आम बात है। पुलिस पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वो शवों का अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे तमसा में बहा देती थी। इसे देख भारत रक्षा दल ने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया था।
दल अभी तक 250 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर चुका है। अब लावारिस मृतकों के प्रमाण-पत्र के लिए भी ये संगठन नगर स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करेगा। शव की जानकारी नगर स्वास्थ्य को उपलब्ध कराएगा
कब्रिस्तान और श्मशान का चक्कर
शासन की ओर से शत प्रतिशत जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के निर्देश हैं। लेकिन शहरवासी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
कार्य पूरा करने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी अब कब्रिस्तानों और श्मशानों का चक्कर लगाएंगे और पता करेंगे कि कितने लोगों और किसकी मौत हुई है। इसके बाद उसका प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शासन की ओर से शत प्रतिशत मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के निर्देश हैं। इसके तहत शहरी क्षेत्र में लावारिस शवों का भी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। परिजन कभी भी पहचान कर अपने रिश्तेदार का मृत्यु प्रमाण-पत्र हासिल कर सकेंगे। डॉ. वीके अग्रवाल, नगर स्वास्थ्य अधिकारी